Results from pollution – (Pollution results) प्रदूषण से होनेवाले परिणाम

जानिए वातावरण में प्रदुषण के परिणाम – Pollution Result, प्रदुषण के परिणामो के प्रकार – Types of pollution results, पर्यावरण में ओजोन का महत्व – Importance of ozone in the environment, मौसम पर प्रदूषण के परिणाम – Pollution results on weather Info in Hindi .

प्रदूषण के परिणाम - Pollution Results

वर्तमान काल में पर्यावरणीय समस्या ( Environmental problem ) अधिकतर निर्माण हो रही है। प्रकृति के इस जीवन चक्र में जीवित प्राणी पर पर्यवरणीय प्रदुषण का अभाव हो रहा है। वातावरण में पैले प्रदूषण के कारण सजीव प्राणी के आरोग्य पर Direct Effect हो रहा है। जैसे वाहन का धुर जिसके कारण मानव शरीर के श्वास प्रक्रिया में बदलाव आता है। इस प्रकार के प्रदूषण का प्रभाव मानव शरीर पर होने के कारण शरीर पर इसका विपरीत परिणाम होता है। प्रदूषण अलग अलग प्रकार के परिणामो के वजह से निर्माण होता है। सायनाइड ( Cyanide ) जैसे रसायन, प्रमाण से अधिक रसायनो का उपयोग, या जिसपर प्रदुषण का Effect होता है ऐसे संवेदनशील पदार्थ।

 

प्रदुषण के परिणामो के प्रकार – Types of pollution results :

प्रदूषण के दुष्परिणाम मानव व मानव निर्मित पर्यावरण पर जिस तरह दिखाई देता है उसी प्रकार सभी सजीवप्राणी ( living creatures ) और नैसर्गिक पर्यावरण ( Natural environment ) पर ही दिखाई देता है। कई बार प्रदुषण प्रक्रिया धीरे धीरे होने लगती है या परिणाम जानने के लिए अनेक वर्ष लग जाते है। खाना और जल के जंतु के कारण होने वाला प्रदूषण, या वाहन से निर्मित प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए मानव के आरोग्य पर होने वाला परिणाम या दुष्परिणाम धीरे धीरे ध्यान में आता है। इसके कारण कई सारे जगह पर मानव स्थलांतर ( Migration ) कर रहा है। यह प्रदूषण का परिणाम देश के लिए बहुत कठिनाई का है।

Read More – Pollution Control ke Upay Yojana

Read More – Pollution kya aur kaise hota hai

 

मौसम के परिणाम – Weather results :

मौसम के बदलाव के कारण प्रकृति में कई सारे प्रभाव होते रहते है। जैसे 2005 में महाराष्ट्र और अन्य रज्यो में प्रमाण से अधिक वर्षा हुई थी। यह घटना एक मौसम के बदलाव का भाग हो सकता है। उदा. अतिवृष्टि, अनावृष्टि या तापमान का बढ़ना आदि जैसे बदल मौसम का बदलाव बतलाता है।

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाया है कि वायु प्रदूषण मानव भावनाओं को प्रदूषित करता है। जिससे उन्हें कमजोर बना दिया जाता है। शोध साबित हुआ है कि श्वसन वायु प्रदूषण के कारण, मस्तिष्क की मस्तिष्क संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किए गए प्रयोगों में, शोधकर्ताओं ने दिमाग के हिप्पोकैम्पस स्मृति ( Hippocampus memory ), सीखने की प्रक्रिया ( learning process ) और मस्तिष्क के हिस्से ( Parts of the brain ) का अध्ययन करके इसका निष्कर्ष निकाला है।

 

प्रदूषण के कारण मौसम पर होने वाला परिणाम अधिक तर आबादी पर दिखाई पड़ता है। पुरातन वर्ष में मौसम के बदल नैसर्गिक वजह से होते थे। आद्योगिक क्षेत्रों में विकास के लिए हर समय बिजली की जरूरत के कारण, वाहन के लिए इंधन, बिजली तैयार करने के लिए कोयला आदि जैसे इंधन की जरूरत होने लगी। इस ज्वलन प्रक्रिया से निर्माण होने वाला कार्बन डाय ऑक्साइड ( Carbon dioxide ) और अन्य दूषित वायु ( Corrupt Air ) वातावरण में प्रसार होने लगा। ऐसे ही मानवी प्रक्रिया से वातावरण में प्रदुषण निर्माण होने लगा।

इन कारणों से वायु प्रदूषण हो रहा है।

1. सिगरेट आतिशबाजी ( Cigarette fireworks ) आदि का धुआं।

2. हानिकारक गैस ( Harmful gas ) की रिसाव।

3. सीवरेज परियोजना।

4. वाहन से बाहर काला धुआं आ रहा है।

5. कोल धूल।

6. शहर में धूल की मात्रा।

7. रासायनिक युक्त कचरा ( Chemical waste ) आदि

 

ओजोन परत में कमी – Decrease in ozone layer :

अवकाश में सूर्य के घातक किरणों से बचाव के लिए ओझेन उपयोगी है। सूर्य से घातक किरने UV-B को रोकने के लिए ओझेन एक महत्वपूर्ण है। वातावरण में निर्माण सी एफ सी हरितगृह का मिलाफ ओझेन से होने के कारण वायु से सीधा संपर्क आता है और इससे कठिन परस्थिति निर्माण होती है। अधिक समय से ओझेन पर ऐसे अपद्रव्य पदार्थ का हमला होने के कारण ओझेन प्रत कम होने लगी है। इसे Ozene Hole भी कहा जाता है।  इसी Ozene Hole के कारण पृथ्वी पर सूर्य के अतिनिल किरणे रोगों का संचार करती है। Ozene लेअर से आने वाली किरणों का सीधा प्रभाव सजीव जिओ पर होता है। इसके कारण पृथ्वी पर कर्करोग और त्वचा रोग जैसे विकार होने लगते है।

ओजोन की कमी पृथ्वी के वायुमंडल या ओजोन परत में मौजूद ओजोन की कुल स्थिर मात्रा की कमी दर्शाती है। इसे पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के चारों ओर समताप मंडल में कमी के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है। दूसरे घटना को ओजोन छेद के रूप में जाना जाता है, समताप मंडल की घटनाओं के अलावा, ट्रोपोस्फेरिक ओजोन रिक्ति की घटनाओं में भी शामिल है।

सॉल्वैंट्स, प्रोपेलेंट्स, हेलोकार्बन रेफ्रिजरेंट्स ( Halocarbon refrigerants ) और फोम-फ्लाइंग एजेंट ( Foam-flying agent ), Chloro Carbon, CFCs, HCFC, जैसे मानव निर्मित रसायनों को ओजोन-अपूर्ण पदार्थ (ओडीएस) भी कहा जाता है। जो इस समस्या का मुख्य कारण हैं।

 

मानव निर्मित पर्यावरण पर दुष्प्रभाव – Side effect on man-made environment :

किसी भी प्रकार के प्रदुषण के समीप होने के कारण शरीर पर अधिक विपरीत परिणाम होने लगता है। खाना बनाते समय लकड़ी या कोयले के ज्वलन कारण निर्माण होने वाले वायु के मध्यम से टी बी व अन्य श्वसन रोग का संचार होता है। इस प्रकार के रोगों का परिणाम छोटे बचे, बूढ़े और महिला ओ पर दिखाई देता है। शहरी विभागों में वाहन के कारण यह प्रदुषण अधिक होता है। यह प्रदुषण समश्या भारत में अधिकतर निर्माण होने लगी है। इसके कारण जीवित प्राणी के शरीर पर अधिक प्रभाव होने लगा है।  मनव निर्मित सेंद्रिय प्रदूषक जिसके कारण पर्यावरण बदल रहा है, मानवी शक्ति में बदलाव हो रहे है,  रोगप्रतिकार शक्ति ( Immune power ) का कम होना, मधुमेह, कर्करोग जैसे रोग निर्माण होते है।

ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप, विसर्जन, मानसिक विकार इत्यादि की ओर जाता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण मानशिक रोगी बढ़ रहे है। मानव निर्मित साधनो का गलत तरिके से उपयोग करके ध्वनि प्रदुषण को बढ़ावा दे रहे है। इस प्रदुषण की वजह से मानव जीवन में अधिक विकारो का संचार हो रहा है। भारत सरकार द्वारा इस ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए कई सारे Program लिए जा रहे है।

 

अतिजैवीकरण – Eutrophication :

यह एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। अतिजैवीकरण याने जल में शैवाल या जलपर्णी जैसे जल में तैयार होने वाली वनस्पति में विकास। यह प्रकार आजु बाजु  के छोटे तालाब, नदी, या खंडित Mines में दिखाई देता है। जल प्रदुषण के कारण अतिजैवीकरण के प्रक्रिया में अधिक विकास हुआ है। इसके कारण नैसर्गिक क्रिया में बदलाव होते है।

खेती से निकलने पानी, घर में उपयोगी होने वाला Sewage, Drainage, दूषित व औद्योगिक कारणों से निर्माण द्रव्यों के माध्यम से शैवाल में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार की बढती हुई वनस्पति पानी में निर्माण होने वाले ऑक्सीजन को अपने सोख लेती है। इसके कारण जैविक ऑक्सीजन की मांग होने लगती है। इसलिए जैविक ऑक्सीजन के प्रभाव से जल में स्थिर प्राणी की संख्या कम होने लगती है।

 

conclusion

दोस्तों प्रदुषण के परिणाम हमारे पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर होते हैं। इसके अलावा प्रदूषण कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाओं की गति को बढ़ाता है और उन प्रक्रियाओं को हानिकारक बनाता है। इसीलिए प्रदुषण नियंत्रण करना जरुरी है।

 

Author By Kajal…

 

यह भी जरुर पढ़े

1.  RCC कॉलम तैयार करे

2.  इंजिन का कार्य 

3.  PUC कैसे बनाए 

4.  ट्रांसमिसन का कार्य

5.  मायक्रोमीटर का कार्य 

6.  फेरोसिमेंट बनाने के तरीके

7.  गुणकारी दही के लाभ 

8.  तुलसी है एक वरदान 

9.  घुटने दर्द होने पर ट्रीटमेंट करे

10.  रेसिपीज बनाने के  तरीके 

11.  नीबू के महत्वपूर्ण गुण 

1.  नए आविष्कार वाले हेलमेट

2.  BS-4 वाहन के स्ट्रोंग फीचर्स

3.  इलेक्ट्रिकल कैसे कम करती है 

4.  रस्ता संकेत 

5.  वाहनों का आविष्कार 

6.  पहिए का आविष्कार 

7.  पढाई कैसे करे 

8.  ट्रांसफोर्मर का कार्य 

9.  मल्टीमीटर का उपयोग

10.  पिस्टन रिंग का उपयोग 

11. सफल होने का रहस्य 

Post Comments

error: Content is protected !!