मौल्यवान संपत्ति के बारेमे जानकारी – Information about Maulyvaan Sampati

मौल्यवान संपत्ति – Maulyvaan Sampati, मौल्यवान संपत्ति के बारेमे जानकारी – Information about Maulyvaan Sampati, राजा का सपना क्या है-What is the king’s dream.

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है। आज के लेख में हम जानेंगे कि यदि दूसरों के प्रति दया और सम्मान किया जाता है, तो निश्चित रूप से उसकी खुशियों का प्रभुत्व होगा।

मौल्यवान संपत्ति - Maulyvaan Sampati

 

मौल्यवान संपत्ति – Maulyvaan Sampati :-

बहूत समय पहले की बात है शामनगर के राजा कृष्णदेवराय सिंह थे। वहा की प्रजा अपने राजा से बहूत खुश थी। राजा बहूत ही दयालु था। और अपने प्रजा का बहूत ख्याल रखता था। मुसिबत के समय राजा अन्न धान्य भी देता था। और किसी को भुखा नही सोने देता था। वह बहूत ही र्धार्मक वृत्ति का था।

उसके राज्यों में पंडितो का, ब्राह्मणों का आना जाना था वहां पर उनका बहूत आदर सत्कार होता था। दरबार से उन्हे कभी खाली हाथ से वापस नही जाने देते थे। राजा बहूत ही प्रतापी, दयालु था। उसकी कइ्र्र राज्यों में ख्याती फैली हुई थी। त्यौहारों में राजकीय कार्यक्रमो में वह अपनी प्रजा को दान धर्म करता था। साधु-सन्यासी उसके महल से बिना भोजन किये और दान लिये वापस नही जाते थे।

एक दिन पडोस के राजा जयचंद्र ने शामनगर के राजा कृष्णदेवराय पर आक्रमण कर दिया। राजा बहूत चिंतित हो गया। उसने अपनी प्रजा और परिवार का ध्यान रखते हुये बच्चे, बुढे, औरतो को पहले सूरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। विराटनगर के राजा जयचंद्र की सेना शामनगर में घुस गई। जयचंद्र की सेना ने कृष्णदेवराय की सेना को घेर लिया। कृष्णदेवराय के साथ कुछ और लोग भी थे। राजा ने सोचा मेरे साथ यह लोग भी मारे जायेंगे। इसिलिए राजा ने राजा जयचंद्र के सेनापति को कहा कि मेरे साथ चल रहे इन लोगो को जाने दो, मैं आत्म समर्पण करता हुं। सेनापति ने राजा के कहने पर राजा के साथ चल रहे कुछ लोंगो को छोड दिया।

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मौल्यवान संपत्ति

अपने राज्य पहुंचने पर जयचंद्र के सेनापति ने राजा को बताया की इसके साथ और 10 लोगो को मैने पकडा था। राजा के कहने पर मैने उनको छोड दिया। राजा जयचंद्र ने राजा कृष्णदेवराय को पुछा ऐसा क्यां? राजा ने कहा वह मेरे राज्य के संत और विद्वान थे, महापंडित थे। आपने आक्रमण करने पर मै उन्हे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहा था, तभी सेनापति ने हमें गिरप्तार कर लिया। मेरे होने न होने से राज्य में कोई फर्क नही पडेगा, लेकिन महान संत न होने से बहोत ही फर्क पडेगा। विद्वान मेरे राज्य की अनमोल संपत्ति है। इनका कोई मुल्य नही होता। इनसे लोगो में धार्मिक वृत्ति बनी रहती है। किसी भी राज्य के भले के लिए उन राज्य के संतो का बचे रहना बहूत ही आवष्यक होता है।

संतो और विद्वानो से अपने राज्य की संस्कृती बची रहती है, युवको को शिक्षित किया जा सकता है, नये समाज का निर्माण होता है। युवकों को धर्म श्रेष्ठ, कर्म श्रेष्ठ बनाया जा सके। यही नही रहेंगे तो भविष्य को शिक्षित कौन करेगा। यह भी मेरे साथ मारे जाते तो इनका परिवार, गुरूकुल, आश्रम, आश्रम में पलने वाले बच्चे सभी बिखर जाते। मैं इनकी रक्षा नही कर सका इसका दोष मुझपर आता। मेरे होने न होने से राज्य में कोई फर्क नही पडेगा, संतो का ना होने से बहोत ही फर्क पड सकता है।

राजा जयचंद्र ने राजा कृष्णदेवराय की बातों से प्रभावित होकर राजा को छोड दिया और उनका राज्य भी वापस कर दिया। राजा को सलामत उनके राज्य में पहुंचा दिया।

तात्पर्य :-

क्योकि मौलवान वो है जो संस्कृति को समझता है। आपके मन को इच्छा शक्ति जागृत रहेगी तो आपके मन में अपने राज्य तथा दुसरो के प्रति आदर रहेगा। यह आदर आपको ऊचाई पर पहुंचाने में मदत करेगा।

मौल्यवान संपत्ति - Maulyvaan Sampati

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