गरिब लकडहारा और चिड़िया की कहानी – Poor logger and bird

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नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है। आज के लेख में यह जानेंगे की, जीवित प्राणी भी भावनाओं से ग्रस्त हैं, जीवन और जीव दर्द से पीड़ित हैं यह समझने के लिए सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है।

गरिब लकडहारा और चिड़िया - Poor logger and bird

 

गरिब लकडहारा और चिड़िया – Poor logger and bird :-

विवके नगर के राज्य में बहूत समय पहले रामु नामक एक गरिब लकडहारा रहता था। उसके मन में पशु-पक्षी और जानवरों प्रति बहुत दया थी। वह जंगल से लकडिया लाकर उन्हे पास के शहर में बेचता था। और इस तरह अपने परिवार का और अपना पेट पालता था। वह रोज जंगल जाता था,एक दिन रोज की तरह जंगल में लकडिया कांट रहा था। और शाम हो गई थी, वह थक गया, लकडियां भी बहुत सारी इकटठी किया उनको ले जाने में तकलिफ हो रही थी। वह थकान के कारण पेड के निचे बैठ गया।

कुछ देर बाद चिडियों की चिल्लाने की आवाज आई। उसने देखा पेड पर सांप चढ रहा था। उसी पेड पर चिडियां के बच्चे थे जो चिं-चिं कर चिल्लाने की आवाज थी। चिडियां भी चिल्ला रही थी। सांप घौसले की तरफ बढ रहा था। यह देख रामु चिडियां के बच्चे को बचाने पेड पर चढने लगा। रामु को पेड पर चढता देख सांप वापस आने लगा। उसी दौरान चिडियां भी अपने बच्चों की आवाज सुनकर वापस आई। रामु को पेड पर देखा तो चिडिया समझी उसने बच्चों को मार दिया।

वह चिडीयां चोंच मार-मारकर रामु को घायल करने लगी और चिल्लाने लगी। चिडीयां की आवाज सूनकर और चिडीयां भी वापस आई। सभी चिडियां ने रामु पर एक साथ हमला कर दिया। बिचारा रामु किसी तरह पेड से निचे उतरा। चिडियां ने घौसले में जाकर देखा तो उसके बच्चे सुरक्षित व जिवित थे। चिडियां खुश थी, चिडिया के बच्चों ने चिडिया को हकिकत बताई तो चिडीया को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह रामु लकडहारे से माफी मांगना चाहती थी और आभार व्यक्त करना चाहती थी।

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गरिब लकडहारा और चिड़िया –

गरिब लकडहारा और चिड़िया - Poor logger and bird

कुछ दिन पहले चिडिया को खाना ढुंढते समय एक मौल्यवान हिरा मिला। वो उठाकर उसने अपने घौसले में लाकर रख दिया था। चिडिया ने रामु को वह हिरा शुक्रिया के तौर पर देना चहा यह सोचकर उसके सामने हिरा डाल दिया, चिं चिं कर वहा से डाल दिया। चिडिया ने दिया हुआ हिरा रामु ने उठा लिया। रामु ने भी हाथ उठाकर चिडिया का धन्यवाद किया तथा घर की और निकल गया। जंगल की चिडीयां भी रामु के साथ-साथ उडने लगी मानो की धन्यवाद कर रही हो।

 

तात्पर्य :-

जिव-जंतुओं को भी भावनायें तकलिफ होती है। जिव-जंतुओ को भी दर्द तकलिफ होता है इसिलिए जरूरी है कि उनकी भावनाओं को समझना।

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