Chandragupta and Acharya Chanakya – चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य

चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य – Chandragupta and Acharya Chanakya, चाणक्य का मायाजाल-Chanakya’s magic, आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ विचार-Best thoughts of Acharya Chanakya, आचार्य चाणक्य के की कूटनीतिक-Acharya Chanakya’s diplomacy.

नमस्कार, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है. दोस्तों आज के लेख में हम आचार्य चाणक्य के कूटनीति तथा बौद्धिक विचारो का आभास करेंगे. तो दोस्तों इस लेख से अच्छा ज्ञान का विचार आप आत्मसात करेंगे और बुरे विचार को आत्मार्पित नही करेंगे, हम आशा करते है.

चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य - Chandragupta and Acharya Chanakya

 

चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे. ओ एक विद्वान अर्थशास्त्री, राजनीति, कूटनीतिक इन सभी विषयो में पारंगत थे. उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र, राजनीती, कृषि आदि के महां ग्रंथ है. इनका जन्म इ. पूर्व 375 में पाटलिपुत्र में हुआ था. आज के उड़ीसा का भाग पहले पाटलिपुत्र कहलाता था. इन्होने तक्षशिक्षा की शिक्षा प्राप्त की, यह वह जगह है जो आज पाकिस्तान के रावलपिंडी के नजदीकी है. चाणक्य जी को धन, यश और पद का कोई लोभ नहीं था इसलिए वह राजपाठ से दूर एक कुटिया में रहते थे.

 

चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य – Chandragupta and Acharya Chanakya :-

उसी समय की बात है जब मगध एक महाराज्य कहलाता था. मगध का राजा महानंद था उन्होंने एक यज्ञ रखा था. उस यज्ञ में चाणक्य भी मौजूद थे. यज्ञ समाप्त होने के बाद राजा महानंद के प्रधान के जगह पर चाणक्य जी खाने को बैठ गए, जब राजा महानंद काले रंग के इस साधु को देखते ही क्रोधित हो गए और उनका अपमान करके उन्हें बाहर निकाला गया. और वह और कोई नही बल्कि नितिकारी चाणक्य थे. इसपर क्रोधित होकर चाणक्य ने प्रतिज्ञा ली की जबतक मै महानंद राजा का नाश न कर दू अपनी शिखा नहीं बांधूंगा. और यह प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए उन्हें किसी राजा का साथ नहीं मिला क्योकि उस ज़माने में राजा महानंद एक बहुत बढे साम्राज्य के राजा थे.

 

चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य

अब ऐसे ही कुछ दिन, कुछ माह निकल गए. तब पोरस का राजा सिकंदर दुनिया जितने निकला था. और अब उसकी नजर भारत पर आई थी, और उसका पहला आक्रमण मगध के राजसिंहासन पर था. इसका अनुमान चाणक्य को लग गया था. यह बात समझाने के लिए फिर से चाणक्य महानंद के पास गए. पर राजा महानंद ने चाणक्य को बंदी बनाने का आदेश दिया तब ऐसे-तैसे चाणक्य वहां से भाग निकले. तब चाणक्य ने अपने अंदर के कूटनीति राक्षस को जगाया और प्रण लिया की मैं मगध को एक नया राजा दूंगा.

फिर वह घूमते हुए किसी गांव में पहुंचे वह से कुछ लड़के राजपाठ का खेल खेल रहे थे. उस खेल में जो राजा बना था उसको देखके ही चाणक्य प्रभावित हो गए. उस लगके की उम्र 15 – 16 साल होगी, उसके चेहरे पर तेज़ था. आँखों में सागर था, तभी चाणक्य ने सोच लिया मगध का अगला राजा यही होगा. और बालक को उसके माँ-बाप से खरीदकर अपनी कुटिया ले आये. और सालों तक उसे प्रशिक्षण देते रहे और उस चंद्र को हर एक प्रशिक्षण दिया, हर एक कौशल्य शिकाया जो एक राजा के पास होना चाहिए.

 

चाणक्य का मायाजाल :-

चंद्र की शिक्षा जब पूरी हो गयी तब चाणक्य का पहला लक्ष था सिकंदर को भारत आने से पहले ही भगा देना. इसके लिए उन्होंने अपने कूटनीतिक डाव खेलना शुरू कर दिया. जब उन्होंने सिकंदर की सेना का अभ्यास किया तो उसे पता चला की सिकंदर की सेना काफी प्रवास करके शारीरिक रूप से थक चुकी थी. अब उन्हें पता चल गया की उन्हें क्या करना है.

तब आचार्य चाणक्य ने सेना का मानसिक संतुलन बिगाड़ने का काम शुरू कर दिया. इसके लिए उन्होंने चंद्र को सिकंदर की सेना में भर्ती होने को कहा और वहा की बाते लेने को कहा, जिससे सिकंदर की चाल पर नजर रखा जा सके. अब उन्होंने यह भ्रम फैलाया की हमारी भारत माता सिकंदर की सेना से नाराज है, हमारी माता बहुत क्रोधित है, अब बिना युद्ध किये ही सिकंदर की सेना मर जाएगी. इस काम के लिए उन्होंने कुछ युवा लड़कों की फ़ौज तैयार की थी. और भ्रम से सिकंदर की सेना को डरा दिया.

अब चाणक्य ने चूहों के द्वारा वह बीमारी फैलानी शुरू कर दी. चंद्र सेना में जहर देने लग गए. बिना कुछ हतियार के बिना ही उनके शेकडो सेना मर गए. अब उनकी सेना में महामारी फ़ैलने लगी और फिर पूरी सेना में मानसिक बीमारी का आगमन हुआ और इस तरह चाणक्य ने कूटनीतिक द्वारा सिकंदर को भारत आने से पहले भगा दिया. और चाणक्य ने उस कहावत को बदल दिया जो है. ”जो जीता वही सिकंदर” इस कहावत को हम कह सकते है ”जो जीता वही चाणक्य”

 

आचार्य चाणक्य के की कूटनीतिक :-

अब चाणक्य का लक्ष था मगध को जितना, इसके ली उन्होंने मगध पे हमला भी किया लेकिन पूरी तरह परास्त हो गए. चंद्र जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भाग निकला, चाणक्य और चंद्र वहा से भाग निकले और एक कुटिया के पीछे छुपकर रात में निकल ही रहे थे, तभी उन्होंने देखा उस कुटिया में रात को एक माँ अपने बेटे को खाना परोस रही थी.

खाना गरम था, लड़के ने उस गरम खाने में हात डाल दिया और देखते ही उसका हाट जल गया क्योकि खाना गरम था. तब माँ ने गुस्सा होकर लड़के से कहा की तुम भी उस चंद्र और चाणक्य के की तरह मुर्ख हो क्या जो बाजु वाली सतहों को न खाकर पहले अंदर की खिचड़ी खाना चाहते हो. यह बात सुनकर चाणक्य को अपनी भूल का पता चला और चंद्र से कहा की हमे पहले राज्य के बाहर वाले गांव जितना होगा जिससे हमारी ताकद बढ़ेगी.

राजा महानंद को मारने के लिए चाणक्य ने कूटनीतिक दाव खेला, उन्होंने विषकन्या तैयार करना शुरू कर दिया क्योकि चाणक्य को पता चला की राजा शराबी था, इसी का फायदा चाणक्य ने विषकन्या के सहायता से राजा महानंद को कमजोर बनाया, और जब राजा बीमार रहने लगा तब उन्होंने मगध पर आक्रमण किया और राज्य को जित लिया तभी से चंद्र ”चंद्रगुप्त मौर्य” के नाम से जानने लगे.

 

आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ विचार :-

1. ज्ञान एक ऐसी दौलत है जिसे कोई भी चुरा नहीं सकता.

2. एक बात जो  सीखी जा सकती है,  कुछ भी करना चाहता है तो वह पुरे ध्यान से, मन लगाकर और जोरदार प्रयास के साथ करें.

3. मूर्खो की तारीफ सुनने से अच्छा है, की बुद्धिमान व्यक्ति की फटकार सुनो.

4. सभी प्रकार के भय से बदनामी का भय सबसे अधिक होता है.

5. आलसी व्यक्ति का न कोई वर्तमान है, ना कोई भविष्य.

6. कोई काम शुरू करने से पहले अपने आप से तीन सवाल जरूर पूछे, की

 

”मै यह काम क्यों कर रहा हूँ”

”इसका क्या परिणाम होगा”

”क्या मै सफल हो पाउँगा”

आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ विचार

1. जब यह बात गहराई से सोचने पर इसका संतोषमय उत्तर मिल जायेगा

2. जिस व्यक्ति को हमें काम से निकालना है, उससे वाही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे, जैसे हिरन का सिकार करने से पहले शिकारी मधुर आवाज में गाता है.

3. यह एक कडवा सच है की हर दोस्ती के पीछे एक स्वार्थ होता है, बिना स्वार्थ से दोस्ती नहीं होती.

आचार्य चाणक्य बहुत बड़े नितिकारी, और अर्थशास्त्री थे. अगर आज भी हम उनके बताये गए विचारो पर अमल करते है तो हम सदा सुखी रह सकते है.

 

तो दोस्तों चंद्रगुप्त और आचार्य चाणक्य – Chandragupta and Acharya Chanakya के बारे में जाना है. दोस्तों आज का लेख आपको उपयोगी लगता है, तो अपने परिचितों तथा मित्र को साझा करो. अगले लेख में हम कुंडली के बारे में जानकारी देंगे तब तक के लिए हमसे जुड़े रहे www.apnasandesh.com पर और ऐसे ही लाभकारी जानकारी प्राप्त करते रहें. और अपना ज्ञान बढ़ाएँ.

धन्यवाद…

हसते रहे – मुस्कुराते रहे…

 

Author By :- सचिन कोठे सर

 

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