Basic information of CNC machine – CNC मशीन की बेसिक जानकारी

सीएनसी मशीन की बेसिक जानकारी – Basic information of CNC machine, CNC क्या है – What is CNC, Programming क्या होती है, in Hindi. सीएनसी मशीन का उपयोग, मशीन लर्निंग and CNC machine in Hindi. computer numerical control कैसे काम करती है, CNC का full form क्या है?

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का फिर से स्वागत है हमारे वेब पोर्टल apnasandesh.com पर. हम एक बार फिर आपके लिए एक नया विषय लेकर आए हैं, दोस्तों, यह लेख उन लोगों के लिए है जो हर दिन नई चीजें सीखना चाहते हैं, और यह टॉपिक है CNC Technology.

CNC मशीन की बेसिक जानकारी - Basic information of CNC machine

हमारे अनुभव से Engineer तथा जो Engineer बनना चाहते है, उनके लिए और जो व्यक्ति Technology से अवगत रहना चाहता है उनके लिए यह लेख बेहद ही उपयोगी होगा. आज के युग में Industry की बात की जाए तो Industry में सभी Engineer CNCमशीन पर ही काम करते है. 10 वी, 12 वी, ITIतथा Polytechnicकिये हुए 80 प्रतिशत Students को CNC मशीन पर ही काम दिया जाता है. लेकिन CNC की Programming सीखना इतने जल्दी आसान नहीं, उसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, तभी कहा एक CNC Operator Engineer बना जा सकता है. तो चलिए दोस्तों आज हम CNC के Basic चीजों के बारे में जानेंगे.

CNC मशीन की बेसिक जानकारी – Basic information of CNC machine :-

सीएनसी क्या है – What is CNC :-

CNC का विस्तृत रूप है computer numerical control. औद्योगिक इंडस्ट्री में अलग-अलग मशीनों का उपयोग तथा use होता है. इसीलिए इंडस्ट्री में Mass Production के लिए Conventional मशीन का (Lath, Milling, Drilling, Grinding, etc) Use हो रहा है. लेकिन Conventional मशीन पर एक जैसा उत्पादन नहीं हो सकता क्योंकि यह पूर्णतः वर्कर पर डिपेंड होता है. इसके कारण जॉब रिजेक्शन बढ़ जाता है. और Company अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाती और यह सभी काम Automatic हो सके इसलिए numerical control का Use किया गया है. मशीन टूल्स चालू करने के लिए, स्पिण्डल चालू करना, कूलेंट चालू करना, Depth ऑफ़ Cut लगाना, स्पीड देना इस तरह सभी काम पुरे करने के लिए एक विशिष्ट ऐसी इलेक्ट्रॉनिक तंत्र का उपयोग करके मशीन को सांकेतिक भाषा से सूचना दी जाती है. सांकेतिक भाषा (code) यह अंग्रेजी अक्षर से और अंक से सूचित किए जाते है.

अंग्रेजी अक्षर – A to Z

अंक (Number) – 0 to 9

जैसे की – Spindle Clock wise चालू करने के लिए M3 यह कोड दिया जाता है.

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CNC मशीन के फायदे :-

High Accuracy (अचूकता) :-

इस मशीन में, ”अंतर” Micron में दे सकते है इसलिए यह Accuracy बहुत hagh होती है.

Increase Production (उत्पादन वाढ) :-

प्रोग्राम में ही टूल्स की झिज भर सकते है, और एक ही Programmingमें मल्टी टूल्स का उपयोग कर सकते है. इसलिए उत्पादन बढ़ने लगता है.

Reduce Time (समय की बचत) :-

CNC पर एक से ज्यादा टेबल होते है. एक टेबल पर Operation चालू रहता है तो दूसरे टेबल पर जॉब सेटिंग करके रखा जा सकता है. इससे टाइम बचत होती है.

Very less Rejection (उत्पादन के losses कम होना) :-

CNC Programming Perfect माप से सेट किया होता है, तो Rejection बहुत कम होता है.

Reduced Inspection and Cost :-

सिर्फ पहला ही जॉब चेक किया जाता है. और उसमे कुछ Problem रहा तो Programming Edit किया जाता है. उसके बाद जॉब चेक नहीं किया जाता.

Less Scrap :-

CNC मशीन में scrap के प्रमाण बहुत कम होते है.

Less man Power :-

दिए हुए सायकल टाइम के अनुसार CNC ऑटोमेटिक चालू रहते है, इससे एक आदमी दो मशीन Operate कर सकता है. इसलिए man power कम लगता है.

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More मशीन Life :-

मशीन को रेगुलर ऑइल पुरवठा होने के वजह से मशीन की लाइफ बढ़ जाती है.

 

CNC मशीन के नुकसान – Disadvantages  :-

CNC में जिस प्रकार ज्यादा फायदे है उसी प्रकार उसके कुछ Disadvantages भी होते है.

High Investment Cost :-

CNC में आधुनिक तंत्र का उपयोग किया हुआ है, और यह बहुत प्रभावी भी है इसलिए मशीन के ली ज्यादा किंमत देना पड़ता है.

High Maintenance Cost :-

CNC मशीन के फिटनेस के लिए हमें उच्च शिक्षित Engineer और अनुभवी Engineer की जरुरत होती है, CNC मशीन के पार्ट भी बहुत Costly होते है.

CNC मशीन पर जॉब मशीनिंग करने की पद्धति :-

सीएनसी मशीन को operate करने के लिए जिन जिन चीजों की जरुरत होती है, वह सीक्वेंस CNC को Information भेजनी पड़ती है. उन चीजों का ज्ञान या हरेक सीक्वेंस का ज्ञान ओपेरटर को होना जरुरी है.

CNC मशीन टूल्स पर जॉब मशीनिंग करने के लिए शुरुआत से लेके आखरी तक हर एक स्टेप का नियोजन तैयार करना  है. इसलिए Operator और CNC Engineer को निम्नलिखित ज्ञान होना जरुरी है.

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Study of Part Drawing :-

जो पार्ट या जॉब मशीनिंग करना है, उस पार्ट की ड्राइंग तैयार की हुई रहती है. ड्राइंग पूर्णतः ISI (Indian Standard Institution) के नियमानुसार रहते है. इस ड्राइंग पर की Length, Width, Round Diameter, Drill Radius, corner radius, chamber angle radius, सरफेस रफनेस ग्रेड, और ड्राइंग symbol दिया हुआ रहता है. इस तरह पूरी ड्राइंग की Study करना पड़ता है.

 

To Determine the Co-Ordination :-

पार्ट ड्राइंग पूरी तरह समाज लेंने के बाद ड्राइंग के ऑपरेशन के अनुसार, हरेक ऑपरेशन का सीक्वेंस फिक्स कर देंगे. ऑपरेशन का सीक्वेंस सोचते समय प्रथम कोनसा ऑपरेशन Easy है और कोनसा ऑपरेशन हार्ड है इस प्रकार ऑपरेशन की शुरुआत और end रखना है. Operation सीक्वेंस फिक्स होने के बाद Co-Ordination निकलने के लिए शुरुआत का पॉइंट (Work Zero) ेखि जगह पर लेना जरुरी है. और वहा से आगे सभी पॉइंट के Co-Ordinate निकलना है. ज्यादातर Co-Ordinate माइक्रोन में रहते है इसलिए माइक्रोन का ज्ञान होना बहुत जरुरी है.

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Preparing a Part Program :-

CNC मशीन अल्फ़ा – न्यूमेटिकल कोड द्वारा चलती है. अल्फ़ा याने (A – Z) और न्यूमेरिक याने (0 – 9) नंबर याने प्रोग्राम यह 50 % Co-Ordinate का होता है. और 50 % यह कोड का होता है. NC कोड के द्वारा CNC के लिए एक-एक करके उनके क्रमवार सूचना दि जाती है. इन सुचना का संग्रह याने एक प्रोग्राम होता है.

 

Program Editing :-

CNC प्रोग्राम तैयार करने के बाद वह CNC मशीन के कोड बोर्ड (Computer) में सही से भरना चाहिए. प्रोग्राम भरते समय पैनल के सभी किज (Key) के काम पता रहना चाहिए. प्रोग्राम में (+) (-) स्लॉस, दशांक के चिन्ह का अचूक वापर करना चाहिए. इनपर ही मशीनिंग प्रोसेस होती है. इसी प्रकार प्रोग्राम में आने वाले प्रॉब्लम दूर करने के लिए Alt, cancel, delete, insert, place, backspace, cursor, page up, page out आदि का ज्ञान होना जरुरी है.

 

Work Piece and Mounting :-

CNC में जॉब पकड़ने के लिए फिक्चर (Fixture), पैलेट्स और चक्र का उपयोग किया जाता है. और टूल्स पकड़ने के लिए हेड, टूल मिक्सिंग, ऑटोमैटिक टूल चेंजर इन साधनो का Use किया जाता है. इस के लिए हमें इन साधनो का ज्ञान और कार्यपद्धति का भी पता होना जरुरी है.

 

Work Zero Offsetting :-

जॉब और टूल की सेटिंग करने के बाद ड्राइंग पर फिक्स पॉइंट को Zero मानके Co-Ordinate निकले रहते है. जॉब के उसी पॉइंट को टूल्स टाच करके, offset पद्धत का Use करके सभी एक्सेस की किंमत Zero करना चाहिए. इसी चीज को Zero offset setting कहते है. यह पद्धत अलग-अलग कंपनी के Control System के अनुसार अलग-अलग रहती है. इसे हम ”CNC part -2” आर्टिकल में विस्तार से जानेंगे, क्योकि वर्क Zero Offset भरने के बाद ही प्रोग्राम रन होता है.

 

To See Simulation :-

तैयार किया हुआ प्रोग्राम बिना मशीन चालू किये उसका tool-path (टूल की प्रक्रिया) को स्क्रीन पर देख सकते है. प्रोग्राम में कुछ गलती हो गयी तो वह हमें स्क्रीन पर ही पता चल जाता है. इसी को Simulation कहते है.

 

To Run the Program :-

आगे की सभी क्रिया पूरी होने के बाद, पैनल की start Key का use करके मशीनिंग सुरु हो जाती है.

 

तो दोस्तों, यह लेख उन लोगों के लिए है जो हर दिन नई चीजें सीखना चाहते हैं, जो Industry में CNC मशीनों पर काम करते हैं या CNC मशीन के बारे में जानते हैं। लेकिन एक लंबे दिन के बाद भी, वह CNC प्रोग्रामिंग नहीं सीखते है, और ऑपरेटर ही बने रहते है। लेकिन दोस्तों घबराइए मत, मैं आपको CNC टेक्नोलॉजी के बारे में सब कुछ विस्तार से बताता रहूँगा, इसके लिए आप हमारे वेब पोर्टल www.apnasandesh.com पर आते रहे और अन्य चीजों के बारे में जानकारी प्राप्त करते रहें और दूसरों को साझा करते रहें। ऐसे ही आप हसते-मुस्कुराते रहिये, मै आपका दोस्त जल्द ही आपके सामने आऊंगा CNC – Part 2 को लेकर.

धन्यवाद….

 

Author By :- सचिन कोठे सर

 

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