मार्किंग टूल्स के बारे में जानकारी – Information About Marking Tools

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मार्किंग टूल्स के बारे में जानकारी - Information About Marking Tools

आज हम आपके लिए एक येसा लेख लाये है. जिसके बगैर आप कोई भी काम PERFECT नहीं कर सकते. जी हा दोस्तों हम बात कर रहे है. मार्किंग और मार्किग टूल्स के बारे में, जब कभी हमें कोई भी जॉब बनाना पड़ता है, तो सबसे पहले उसकी ड्राइंग के नुसार ही जॉब बनाना पड़ता है.

दोस्तों, आप सभी जानते हैं कि हमें अपने दैनिक जीवन में किसी भी वस्तु या घटक को बनाना होता है, तो हम सबसे पहले इसके डिजाइन के बारे में सोचते हैं और हम जिस डिजाइन के बारे में बात कर रहे हैं, उसे ही मार्किंग के रूप में जाना जाता है। मार्किंग के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण को चिह्नित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण को मार्किंग उपकरण (Marking Tools) कहा जाता है,

 

मार्किंग और मार्किंग टूल्स के बारे में जानकारी – Information About Marking and Marking Tools :-

मार्किंग की प्रक्रिया – METHOD OF MARKING :-

☛ सबसे पहले जिस जगह पर मार्किंग करनी हो उस जगह को अछी तरह साफ़ करनी चाहिए,

☛ मार्किंग साफ दिखने के लिए उस जगह पर रंगीन CHALK का उपयोग करना चाहिए,

☛ जिस तरह हमें जॉब बनाना है उसी तरह उसकी ड्राइंग बनाकर मार्किंग करनी चाहिए,

☛ जॉब पर काम करने से पहले मार्किंग की हुई जॉब को अछी तरह देख लेना चाहिए,

☛ अगर पंच का उपयोग हो तो उसके अनुसार ही पंच करनी चाहिए,

☛ जो जॉब हमे बनाना है, उसको चेक करने के लिए या नापने के लिए सही टूल्स होने चाहिए,

 

☛ अगर हमें सर्कल बनाना है तो उसके लिए सबसे पहले डीवाईडर से सर्कल बनाये,

☛ पंच की सहायता से पंच करके ही सर्कल बनाये,

☛ जॉब पर मार्किंग करने से पहले मार्किंग टूल का सही होना जरूरी है,

☛ अगर किसी जॉब पर होल करना हो तो सेंटर पंच के जरिये पंच कीजिये,

☛ जॉब की ड्राइंग अनुसार ही पंच करना चाहिए,

☛ पंच हार्ड और सक्त होना चाहिए,

 

मार्किंग करने के कारण – REASON OF MARKING :-

✦ मार्किंग करने से कारीगर को पता चल जाता है की उसे सबसे पहले क्या करना चाहिए,

✦ मार्किंग करने से कारीगर को पता चल जाता है की जॉब कटिंग कहा से और कैसे करे,

✦ फाईलिंग करने के लिए जॉब को कितनी मात्रा में कम करना चाहिए,

✦ कारीगर को मार्किंग से सही गाइड लाइन का काम पता चलता है,

✦ मार्किंग से ही कोई भी जॉब सही और परफेक्ट बनाया जा सकता है,

 

डीवाईडर  – DIVIDER :-

दो बिन्दुओ को मिलाने और गिनने के लिए जिसका उपयोग होता है उसे डीवाईडर कहते है, डीवाईडर दो प्रकार के होते है,

A) ऑडीनरी डीवाईडर – ORDINARY DIVIDER,             B)  स्प्रिंग डीवाईडर – SPRING DIVIDER

✦ कोई भी काम करने से पहले डीवाईडर को देख लेना चाहिए,

✦ काम करते या मार्किंग करते समय डीवाईडर पर जादा भार नहीं देना चाहिए,

✦ डीवाईडर की नोक से कभी भी सेंटर पंच का काम नहीं करना चाहिए,

✦ जॉब पर सर्कल करते समय सेंटर पंच से मार्किंग करनी चाहिए,

✦ डीवाईडर की नोक उस मार्किंग पर सही बैठनी चाहिए,

✦ काम ख़तम होने के बाद इसे साफ़ करके रख देना चाहिए,

 

स्क्राइबर  – SCRIBER :-

☛ स्क्राइबार यह एक बहुत ही तेज धार वाला टूल होता है,

☛ इसका मुख्य उपयोग जॉब पर मार्किग करना होता है,

☛ यह टूल बहुत है सक्त और हार्ड होता है,

☛ स्क्राइबार का एक नोक बहुत नुकीला होता है, और दूसरा ९० डिग्री करने के बाद मोड़ दिया जाता है,

☛ स्क्राइबार यह ४ इंच से ८ इंच तक के साइज़ में होता है,

☛ स्क्राइबार स्टील का बना होता है,

☛ स्क्राइबार का उपयोग सुखी जगह पर नहीं करनी चाहिए,

☛ स्क्राइबार से एक ही बार में मार्किंग होनी चाहिए,

☛ स्क्राइबार को कभी भी सेंटर पंच की तरह उपयोग नहीं करनी चाहिये,

☛ स्क्राइबार की मार्किग करते समय इसे मजबूती से पकड़नी चाहिए,

☛ स्क्राइबार का उपयोग करने से पहले इसे साफ़ करना चाहिए,

 

पंच के प्रकार – TYPES OF PUNCH :-

  • सेन्टर पंच
  • डॉट पंच
  • पिन पंच
  • सॉलिड पंच
  • हालो पंच

सेन्टर पंच :-

✦ सेन्टर पंच का उपयोग ड्रिल करने की जगह पर किया जाता है,

✦ सेन्टर पंच हाई कार्बन स्टील का बना होता है,

✦ सेन्टर पंच की लम्बाई ४ इंच से लेकर ६ इंच की होती है,

✦ सेन्टर पंच बहुत हार्ड और सक्त होता है,

✦ सेन्टर पंच मार्किंग के लिए भी इसका उपयोग कर सकते है,

 

डॉट पंच :-

✦ डॉट पंच यह हाई कार्बन स्टील का बना होता है,

✦ डॉट पंच हार्ड और सक्त होता है,

✦ डॉट पंच का उपयोग स्क्राइबार से लगी मार्किंग को मजबूत करने के लिए किया जाता है,

✦ मार्किंग करते समय मार्किंग हैमर का उपयोग करना चाहिए,

✦ इसकी लम्बाई ४ इंच से लेकर ६ इंच की होती है,

 

पिन पंच :-

✦ पिन पंच हाई कार्बन स्टील का बना होता है,

✦ यह भी बहुत हार्ड और सक्त होता है,

✦ पिन पंच को नाप लेकर बनाया जाता है,

✦ बाजार में भी ये सेट में मिलते है,

✦ पिन को लगाने और निकालने के लिए इसका उपयोग किया जाता है,

✦ हात से पकड़ने वाले भाग को नर्लिग़ होती है,

✦ मोटर गाड़ी रिपेयरिंग वालो के पास भी ये पंच उपयोगी होता है,

 

सॉलिड पंच :-

✦ सॉलिड पंच हाई कार्बन स्टील का बना होता है,

✦ सॉलिड पंच बहुत हार्ड और सकत होता है,

✦ इसके साइज़ में अंतर होता है,

✦ जॉब के अनुसार सॉलिड पंच का उपयोग करते है,

✦ सॉलिड पंच को गरम या फिर ठन्डे लोहे पर पंच के लिए उपयोग करते है,

 

हालो पंच :-

✦ हालो पंच हाई कार्बन स्टील का बना होता है,

✦ हालो पंच सॉलिड पंच की तरह हार्ड और सक्त बना होता है,

✦ हालो पंच का उपोयग कोई भी लाहे की पतली शिट या चादर पर गोलाकार होल करने के लिए उपयोग करते है,

दोस्तों, उम्मीद है की आपको मार्किंग और मार्किंग टूल्स के बारे में जानकारी – Information About Marking and Marking Tools यह आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें। और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ।

धन्यवाद।

हसते रहे – मुस्कुराते रहे।

 

 

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Author By :- Prashant Sayre Sir

 

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