Introduction of Taps – (Various types of Taps) टैप का परिचय kaise kare

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नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है apnasandesh.com में, आज के इस आर्टिकल में हम Taps के बारे में बात करते हैं, तो आइए दोस्तों जानते हैं Taps के बारे में विस्तृत जानकारी:

टैप का परिचय - Introduction of Taps

दोस्तों सायद आपने इसे से रिलेटेड हमारा पिछला लेख पढ़ा ही होगा, उस लेख में हमने टैपिंग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की है. तथा उसी लेख को पूरा करते हुए आज हम इस लेख के माध्यम से Taps का महत्व और उसके परिचय के बारे में आपको परिचित करवा रहे है.

 

Introduction of Taps – (Various types of Taps) टैप का परिचय kaise kare

टैप का उपयोग बहुत ही सरल और आसान है, इसका इस्तेमाल इंडस्ट्री में किसी भी जॉब में होल के अन्दर थ्रेडिंग करने के लिए किया जाता है. यह एक अंदरूनी थ्रेड्स काटने वाला टूल है और जिसके द्वारा गोलाकार होल के अन्दर थ्रेड्स काटी जाती है. Taps का हाथ और मशीन से भी इस्तेमाल किया जाता है, और बारीक से बारीक छेद में भी आसानी से थ्रेड्स बना लेता है,

किसी गोलाकार सुराख़ में थ्रेड काटने की क्रिया को टैपिंग कहते है. इसका मटेरियल हाई कार्बन स्टील या फिर हाई स्पीड स्टील का बना होता है, और इसकी बॉडी को हार्ड और सख्त भी किया जाता है. इस तरह की Taps की साइज़ अलग-अलग होती है, और एक सेट में तिन टैप होते है, इस टैप की थ्रेड्स में पहिला टैप दूसरा टैप और फाइनल मतलब तीसरा टैप होता है. तथा प्रत्येक टैप में कटिंग एज होती है, जिसकी मदत से टैपिंग किया जाता है.

 

टैप के प्रकार – Types of Taps :-

1. हैण्ड टैप (Hand Tap)

2. टेपर टैप (Taper Tap)

3. मीडियम टैप (Medium Tap)

4. फिनिशर टैप (Finisher Tap)

5. टैप ड्रिल साइज़ (Tap Drill Size)

 

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हैण्ड टैप – Hand Tap :-

इस तरह के टैप हाथो के द्वारा चलाये जाते है, इन टैप पर बनी शेंक स्क्वेयर की साइज़ की होती है, इस स्क्वेयर पर टैप रेच की सहायता से इसे फिट किया जाता है. इस टैप में अधिकतम तिन का साइज़ होता है, जिसका प्रयोग करना बड़ा ही आसन होता है, पर प्रयोग करते समय सावधानी भी रखनी पड़ती है.

 

टेपर टैप – Taper Tap :-

टेपर टैप को भारत स्टैण्डर्ड के अनुसार ”रफ़ टैप” कहते है, किसी भी जॉब में अगर होल और उसपर टेपिंग करनी हो तो सबसे पहले होल को साफ करना चाहिए और बाद में पहिले नंबर की टैप का इस्तेमाल करना चाहिए, यह टैप 6 इंच से 8 इंच तक ग्राइंड की रहती है ताकि टैपिंग करते समय आसानी से होल के अन्दर बैठ सके टैपिंग क्रिया शुरु करने से पहले इसका उपयोग किया जाता है.

 

मीडियम टैप – Medium Tap :-

इस टैप को भारत स्टैण्डर्ड के अनुसार ”इन्टर मिडीअटर” कहते है, इस टैप का भी सामने वाला भाग मतलब चार या फिर पांच थ्रेड्स ग्राइंड की रहती है. और यह टेपर की होती है, इसका प्रयोग भी टेपर टैप के बाद किया जाता है. इस टैप को चलाते ही पूरी थ्रेड्स बन जाती है, इसलिए किसी भी होल में टैपिंग करते समय या होने के बाद पूरी थ्रेड्स बन जाती है, और टैप का कार्य भी खत्म हो जाता है.

 

फिनिशर टैप – Finisher Tap :-

इस टैप को भारत स्टैण्डर्ड के अनुसार ”फिनिशिंग टैप” कहते है, इस तरह के टैप का उपयोग आखरी में किया जाता है, क्योंकि यह टैप फिनिशिंग का काम करते है. इस टैप की आगे की एक दो चूड़ियाँ टेपर में ग्राइंड की रहती है, इस टैप का उपयोग पहिला और दूसरा मतलब टेपर टैप और मीडियम टैप के बाद किया जाता है. इसी टैप के द्वारा थ्रेड्स की गहराई और फिनिशिंग का कार्य पूरा किया जाता है.

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टैप ड्रिल साइज़ – Tap Drill Size :-

1. अगर टैपिंग करना हो तो सबसे पहले ”टैप” ड्रिल के साइज़ का लेना चाहिए,

2. इसके बाद में ड्रिल के मदत से ही साइज़ के अनुसार टैपिंग की जाती है,

3. अगर टैप की साइज़ का ड्रिल किया जाये तो टैप सुराख़ में से ही बाहर आ जायेंगा और टैपिंग की प्रक्रिया पूर्ण तरीके से नहीं होंगी,

4. इसलिए टैपिंग करते समय ड्रिल होल बहुत ही छोटा हो तो टैप टूटने का डर लगा रहता है, इसलिए जब भी टैप करना हो तो टैपिंग के अनुसार सही और सटीक साइज़ का ड्रिल होना बहुत जरुरी है.

5. मार्केट में स्टील की बनी एक स्केल जिसे ”रूलर स्केल” भी कहते है, उस स्केल पर टैपिंग के साइज़ के ड्रिल की पूरी लिस्ट बनी रहती है, इस स्केल का हम उपयोग टैपिंग के लिए कर सकते है.

 

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टैप का परिचय - Introduction of Taps

टैप की बॉडी :- टैप का वह भाग जिसपर थ्रेड्स कटी हुई होती है उसे हम ”Body” कहते है,

टैंग :- शेंक के सिरे पर बने गोलाकार भाग को ”Tang” कहते है,

शेंक (Shank) :- बॉडी के पीछले हिस्से वाले भाग को ”Shank” कहते है, और इस का उपयोग टैप रेंच पकड़ने में किया जाता है,

फ्लूट और ग्रूव (Flutes or Groove) :- टैप की बॉडी पर तिन या चार ग्रूव बने होते है, जिसे फ्लूट कहते है और यह फ्लूट कटिंग एज बनाते है, और यही कटाई का काम भी करते है.

कटिंग फेस (Cutting Face) :- ग्रूव या फिर थ्रेड्स के कटिंग वाले भाग के और अगले किनारे को कटिंग फेस कहते है.

हील (Heel) :- थ्रेड्स के पीछे वाले झुके हुए सिरे को ”Heel” कहते है.

 

Introduction of Taps – (Various types of Taps) टैप का परिचय kaise kare

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Author By :- Prashant Sayre Sir

 

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