Modern methods of irrigation – सिंचाई के आधुनिक तरीके in Hindi

असल में सिंचाई के आधुनिक तरीके – Modern methods of irrigation, सिंचाई की नई तकनीक. New irrigation technology kya hai, सिंचाई प्रणाली क्या है – What is irrigation system?, Sinchai karne ke naye tarike? Ways of irrigation, सिंचाई प्रणाली की परिभाषा क्या है – What is the definition of irrigation system?, History of irrigation, सिंचाई का समय-निर्धारण दृष्टिकोण और Modern methods of irrigation क्या है? जानिए सभी जानकारी हिंदी में.

सभी को नमस्कार और apnasandesh.com पर आपका स्वागत है. मेरा नाम भाग्यश्री है. दोस्तों, शायद आपको मेरा पहला लेख पसंद आया होगा, उस लेख में हमारी टीम ने ”Hima Das” की जीवनी के बारे में बताया है. जैसा कि मुझे कृषि विषय (Agriculture) के बारे में लिखना पसंद है और मैं आज उसी संबंधी लेख को प्रकाशित करने जा रही हु, आशा है कि आपको यह लेख भी पसंद आएगा. तो चलिए दोस्तों, हम सिंचाई के बारे में विस्तृत जानकारी जानते हैं.

सिंचाई के आधुनिक तरीके - Modern methods of irrigation

 

Modern methods of irrigation – सिंचाई के आधुनिक तरीके in Hindi

सिंचाई के तरीके – Irrigation ki nai taknik kya hai :-

दोस्तों आप सभी जानते है की सजीव सृष्टि तथा पौधों की वृद्धि के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण तत्व है. विभिन्न प्रकार के पौधों को उनकी बढ़ती अवधि के दौरान अलग-अलग समय पर अलग-अलग मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है. नदियों को प्रत्यक्ष वर्षा या बाढ़ के पानी के माध्यम से पौधों को पानी की आपूर्ति की जाती है. जैसा कि यह प्राकृतिक प्रक्रियाएं हैं, भारी बारिश हो सकती है और फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है या फसलों के लिए पानी की आपूर्ति में कमी पैदा कर सकती है.

अतः एक कृत्रिम विधि की आवश्यकता है जिसके द्वारा पानी को एकत्र किया जा सके और संग्रहित किया जा सके ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके. विज्ञान की इस पद्धति को “Irrigation” कहा जाता है. सिंचाई के विभिन्न तरीके होते हैं.

 

सिंचाई प्रणाली क्या है?

फसलों के पूर्ण पोषण के लिए फसल अवधि में फसलों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूमि को पानी के कृत्रिम अनुप्रयोग के विज्ञान के रूप में सिंचाई को परिभाषित किया जा सकता है. फसलों में पोषक तत्व सिंचाई के माध्यम से भी लगाए जा सकते हैं.

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सिचाई करणे के प्रकार – Modern methods of irrigation

खेत मे फसल को पाणी देणे की विशिष्ट प्रक्रिया को सिचाई कहते है. सिचाई करने के लिए कुल मिलाके आठ प्रकार के तरीकों का उपयोग होता है.

1. बाढ़ इरिगेशन विधि –  Flood irrigation method

2. बोर्डर इरिगेशन विधि – Border Irrigation Method

3. रिंग अंड बेसिन इरिगेशन विधि – Ring and Basin Irrigation Method

4. रिज इरिगेशन विधि – Ridge Irrigation Method

सिंचाई के आधुनिक तरीके - Modern methods of irrigation

5. फ्लट बेड इरिगेशन विधि – Flat bed irrigation method

6. स्प्रिंकलर इरिगेशन विधि – Water Sprinkler Irrigation Method

7. बाय व्हाल्व इरिगेशन विधि – by wholly irrigation method

8. टपक इरिगेशन विधि – drip irrigation method

 

Flood irrigation method :-

सिचाई करने का यह बहुत पुराना तरिका है. इस तरीके मे खेत मे नाली बनाकर पाणी सभी दिशाओ मे बहने देते है. इस तरीके से पाणी देणे से बहुत सारा पाणी बह जाता है. इस तऱह पाणी देणे से मेहनत और पाणी देणे के लिये लगणे वाला खर्च भी कम लगता है.

 

Border Irrigation Method :-

इस तरीके मे जमीन को 6 से 18 मीटर चौडी और 30 से 150 मीटर लंबाई के तुकडो मे बांट दिया जाता है और उस जमीन के तुकडे को समान किया जाता है. इसके बाद कम से कम 30 सेमी उंचा बांध बनाकर उन्ही पटटो से पाणी दिया जाता है.

 

Ring and Basin Irrigation Method :-

इस तरीके मे 4*4 मीटर आकार के चौरस प्लांट बनाये जाते है. उसके चारो किनारो मे छोटे बांध बनकर तयार किया जाता है और उसमे जरुरत के हिसाब से पानी भर दिया जाता है. ये तरीका फलबाग, हरी सब्जियो, प्याज तथा लहसून इत्यादी के लिये आपणया जाता है. यह तरीका सारे जग मे प्रसिद्ध है.

 

Ridge Irrigation Method :-

यह तरीका आलू, ज्वारी, कपास, गन्ना, सब्जीया इस तरह के एक लाईन मे लगणे वाले फसल के लिये इस्तेमाल किया जाता है.

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Flat bed irrigation method :-

इस तरीके मे पाणी कि बहाणे कि दिशा और उसके बहने कि स्पीड को कम करणे हेतू उतार कि तरफ बांध न बनते हुये उसे आडे तरीके से बांध बनाना होता है. और उसी बांध कि मदद से फासल को पाणी दिया जाता है. इसे फ्लट बेड इरिगेशन मेथड कहते है.

 

Water Sprinkler Irrigation Method :-

1. पंप के द्वारा पाणी को जरुरत के हिसाब से प्रेशर दे कर नोझल के छोटे गड्डो से पाणी को फवारे कि तऱह फसल को पाणी देणे कि तकनीक को Water Sprinkler Irrigation कहते है.

2. जैसे कि नाम द्वारा हि हमे पता चलता है कि हमे पानी को फसल पर फवारना होता है. इस तरीके से हम पौधो तथा फसलो को बरसात के जैसे पाणी दे सकते है. ये तरीका पाणी कि बहुत बचत करता है तथा इसे रेती जैसी जमीन के लिये इस्तेमाल किया जाता है.

3. ये तरीका चावल और ज्यूट को छोडकर बाकी सभी फसलो को दिया जा सकता है. इस तरीके से पाणी देणे से हम सामान्य तरीके के मुकाबले 30 से 35 % पानी कि बचत कर सकते है.

4. एक Sprinkler supply इरिगेशन सिस्टीम कि किमत लगभाग 10 हजार रुपयो तक हो सकती है. 10 एकड जमीन कि सिचाई के लिये 15 हॉर्स पावर वाले पंप सेट कि जरुरत होती है.

5. इस तरीके से हम रात मे फसल को पाणी नही दे सकते और स्प्रिंकलर शुरू नही किया जा सकता है. इस तरीके से जब खेतो मे पाणी दिया जाता है तब कई ऐसी जगहो पर पाणी दिया जाता है जहा उसकी आवश्यकता नही होती, और इसी कारण वहां बे वजह कि वनस्पतियां बढ जाती है और उन्हे निकालने का खर्च बढ जाता है. दिन मे पाणी देणे के कारण 20 से 40 % पाणी धूप से सुख जाता है. Sprinkler Irrigation Method मे पाणी कि उपयोगिता 70 से 75 % है.

 

By wholly irrigation method :-

यह तरीका फलबाग कि सिचाई के लिये बहुत उपयुक्त है तथा यह तरीका सिर्फ फलबाग कि सिचाई के लिये हि अपनाया जाता है.

 

Drip irrigation method :-

1. फसल के जड के पास उसके जरुरत के हिसाब से, प्लास्टिक कि नली द्वारा पुरे खेत मे फैलाकर टोटी कि मदत से बुंद बुंद से पाणी दिये जाने वाली नयी तकनीक को ड्रीप इरिगेशन मेथड कहा जाता है.

2. सिचाई के सभी तरीको मे पाणी कि सबसे ज्यादा बचत करणे वाला तरीका ड्रीप इरिगेशन का है. सिचाई के सभी तरीको मे यह सबसे अच्छा तरीका साबित हुवा है. इस तरीके मे प्लास्टिक कि नली को छोटे छोटे ड्रीपर लगाये जाते है.

3. इस ड्रीपर से एक एक बुंद पाणी फसल के जड के पास दिया जाता है. इस तरीके से सिचाई करणे पर पाणी का 85 से 90 % बचत किया जा सकता है.

4. ड्रीप इरिगेशन कि शुरुवात 1860 मे कूछ जर्मन शास्त्रज्ञो द्वारा किया गया. इन्होने यह तकनीक मिट्टी से बने पाईप कि मदत से कि थी. इसके बाद इजरायल के सिमचा ब्लास नामक शास्त्रज्ञ ने इस तकनीक सन 1940 मे विकसित किया गया. 1990 तक दुनिया मे 3 लाख हेक्टर जमीन इस तकनीक द्वारा सिचाई कि जा रही थी. Drip irrigation method के लिये 10 एकर जमीन सिचने के लिये 3 हॉर्स पावर के पंप सेट कि जरुरत होती है. इस तकनीक से हम रात ओर दिन मे भी फसल को पाणी दे सकते है या फिर पंप सेट को चलाया जा सकता है.

 

सिंचाई का महत्व –

निम्नलिखित कारणों से कृषिऔर खेतीके लिए सिंचाई आवश्यक है:

1. पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से मिट्टी से खनिजों और पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं. ये खनिज मिट्टी में मौजूद पानी में घुल जाते हैं. फिर पानी इन पोषक तत्वों को संयंत्र के सभी हिस्सों में पहुंचाता है, जिससे विकास और प्रकाश संश्लेषण होता है.

2. सिंचाई नमी प्रदान करती है जो पौधे के जीवन चक्र के अंकुरण चरण के दौरान महत्वपूर्ण है.

3. सिंचाई से मिट्टी अधिक उपजाऊ (उसमें नमी डालकर) और जुताई करने में भी आसानी होती है.

4. उचित सिंचाई से खेत से उपज भी बढ़ती है.

दोस्तों, उम्मीद है की आपको सिंचाई के आधुनिक तरीके – Modern methods of irrigation यह आर्टिकल पसंद आया होगा. यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें. और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ..

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