How to use fertilizer in farming – खेती में खाद का उपयोग कैसे करे

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How to use fertilizer in farming

नमस्कार, APNASANDESH.COM पर आपका स्वागत है. दोस्तो पिछले लेख मे हमने organic farming benefits के बारे मे जाना था. आज के लेख मे हम खाद के प्रकार (TYPES OF FERTILIZERS), खाद देणे के तरीके (METHODS TO USE FERTILIZERS) तथा खाद के फायदो (ADVANTAGE OF FERTILIZERS) के बारे मे जानकारी प्राप्त करेंगे. उम्मीद करती हु दोस्तो आपको मेरा यह लेख उपयुक्त साबित होगा. अगर आपको मेरा लेख अच्छा लगा तो दोस्तो इसे अपने मित्रो से शेयर जरूर करे. तो चलिये दोस्तो जानते है खाद के बारे मे विस्तृत जानकारी.

खेती में खाद का उपयोग कैसे करे –

WHAT IS FERTILIZER?

पौधो के वृद्धि के लिये उपयुक्त मुल्द्रव्यो को कृत्रिम तरीको से दिये जाणे वाले अन्नद्रव्यो को खाद कहते है. वनस्पतियो के शरीर कि अच्छे तरीके से वृद्धि होणे हेतू सोला मुलद्र्व्यो कि आवश्यकता होती है. इन मुलद्रव्यो को आवश्यक मूलद्रव्य (ESSENTIAL ELEMENTS) कहा जाता है. कुछ मूलद्रव्यो कि वनस्पतियो को अधिक मात्र मे जरुरत होती है इसीलिये उन्हे मुख्य अन्नद्रव्य कहते है. मुख्य अन्नद्रव्य 6 होते है.

नत्र (NITROGEN), 

स्फुरद (PHOSPHORUS), 

पालाश (POTASSIUM), 

कॅल्शियम( CALCIUM), 

मेग्नेशियम (MAGNESIUM), और गंधक (SULPHER)

इनमें से नत्र, स्फुरद पालाश प्रधान अन्नद्रव्य है तथा कॅल्शियम मेग्नेशियम, और गंधक ये उद्यमी अन्नद्रव्य है. कूछ अन्नद्रव्यो कि जरुरत फसल को कम मात्रा होती है इस वजह से इन्हे सूक्ष्म अन्नद्रव्य कहा जाता है. होल, मैगनीज, बोरॉन, जस्ता तथा तांबा क्लोरीन (Copper chlorine) यह सब सूक्ष्म अन्नद्रव्य है.

खाद के बारे में उचित जानकारी –

नत्र (NITROGEN) – 

हरित द्रव्यो को निर्माण कर पत्ते को गहरा हरा रंग देता है. नत्र यह एक रोग का हिस्सा है. नत्र कोशिकाओ कि रचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा अन्न जमा करणे का महत्वपूर्ण काम करता है.

फोस्फोरस (PHOSPHORS) – 

स्फुरद वनस्पतियो कि वृद्धि श्वसन तथा उत्पत्ती के लिये महत्वपूर्ण काम करता है. वनस्पतियो के कोशिका विभाजन कि प्रक्रिया मे आवश्यक रहने से यह पौधो कि वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण हिस्सा है. स्फुरद प्रकाश संश्लेषण प्रभेदन तथा कोशिका विभाजन कि प्रक्रिया मे महत्वपूर्ण सहयोग देता है. यह Nucleic acid, Coenzymes, Nucleus Octride, Phosphoprotein, Phospholipid तथा sharkara phosphate इन जीवरसायनो का मुख्य स्रोत है.

पालाश (POTASSIUM ) –

पालाश पेड पौधो कि खाल को मोटा और मजबूत बनाता है. जडो के रोग बिमारी तथा थंड से पालाश बडे पैमाने पर पाणी सहता है तथा पाणी का उपयोग काम करता है. निंबू वर्गीय फलो मे एवं अंगूर के बागो मे अस्कोर्बिक आम्ल (Ascorbic acid) कि मात्रा को बढाता है.

गंधक (SULFUR) –

गंधक तेल के बिजो मे तेल कि मात्रा बढाता है. द्विदलीय जडो के उपर गांठ बनाता है. अमिनो आम्ल तथा प्रथीनो को तयार करणे मे मदत करता है. राई वर्गीय वनस्पतीयो के लिये गंधक कि आवश्यकता होती है.

कॅल्शियम – 

कॅल्शियम पेशीयो कि वृद्धि, विभाजन, और कोशिकाओ को मजबुती प्रदान करता है. इसके उपयोग से जडो कि वृद्धि जलद होती है. जडे, फलो का छिलका मजबूत करता है. बीज मकई के दंडे अच्छे बनते है. जडो के जीवाणू कि गांठ कि वृद्धि जल्द होती है. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) के स्थलांतर को मदद करता है. सेंद्रिय आम्ल कि तीव्रता को कम कर वनस्पतीयो पर होनेवाले बुरे प्रभाव को कम करता है.

मैग्नेशियम – 

मैग्नेशियम हरीतद्रव्यो का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह स्फुरद कि प्रक्रिया को पुरा करणे मे मदद करता है.

लोहा (IRON) – 

लोहा हरितद्रव्य निर्मान मे होणे वाली ऑक्सीकरण प्रतिक्रिया प्रतिक्रिया (Oxidation reaction reaction) मे काम करता है. यह वनस्पतीयो कि जडो कि गांठ मे होनेवाले लेग हिमोग्लोबिन (Leg hemoglobin) का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

जस्ता – 

यह स्टार्च निर्माण प्रक्रिया से संबंधित है. ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis), प्रकाश श्वषण कार्बन डाय ऑक्साईड शोषण करता है.

तांबा – 

अ जीवनसत्व का निर्माण करणे मे सहायता करता है.

बोरोन – 

नयी कोशिकाओ कि वृद्धि, परागकनो कि वृद्धि, पुंकेसर के काम मे तथा बीज और फल तयार होणे हेतू मदद करता है.

मंगल –

यह नत्र का संचयन करता है.

खाद का वर्गीकरण –

जैविक खाद –

वनस्पती, जानवर तथा जीवाणूओ के अवशेषो के सहायता से मिलने वाले खाद को जैविक खाद कहते है. जैविक खाद को भरखाद भी कहा जाता है. जैविक खाद मे रसायनिक खाद के मुकाबले अन्न्द्रव्यो का प्रमाण कम होता है. जैविक खाद मे गोबर का खाद, कम्पोस्ट खाद, हद्दियो का खाद, मच्छलीओ का खाद, हरियाली का खाद, आदी का समावेश होता है. जैविक खाद जमीन कि उपज को बढाता है.

अजैविक खाद –

अजैविक खाद को हि रासायनिक उर्वरक (Chemical fertilizer) कहा जाता है. याह 3 प्रकार के होते है.

✦ एकेरी खाद 

फसल को सिर्फ एक हि अन्नद्रव्य देणे वाले खाद को एकेरी खाद कहते है. उदा. सुरिया, सुपर फोस्फेट, अमोनियम सल्फेट, म्युरेट ऑफ पोटाश.

✦ संयुक्त खाद 

फसल को दो या उससे अधिक अन्नद्रव्य देनेवाले खाद को संयुक्त खाद कहा जाता है. उदा. डायअमोनिम फोस्फेट, नायट्रो फोस्फेट.

✦ मिश्र खाद 

दो या उससे अधिक खादो के मिश्रण को मिश्र खाद कहा जाता है. उदा. सुफला.

गोबर का खाद –

यह खाद किसानो के लिये काफी फायदेमंद है. यह खाद घर मे बनाया जा सकता है. यह खाद जानवरो के मल मुत्र तथा घास फूस से बनाया जाता है.

कम्पोस्ट खाद – 

गाव के तथा खेती से मिलणे वाले कुडे कचरे तथा जानवरो या मानव के मलमुत्र एक साथ सडा कर बनाये गये खाद को कम्पोस्ट खाद कहते है. इस खाद मे 0.77 प्रतिशत नत्र, और 0.44 प्रतिशत स्फुरद तथा 0.68 प्रतिशत पालाश होता है. जीवाणू के मदद से कुडे कचरे को जानवरो या मानव के मलमुत्र से सडाया जाता है.

हरियाली खाद – 

जमीन के अंदर हरे पेड-पौधो तथा पत्तीया इत्यादि को गाड कर खाद बनाया जाता है. इस खाद को हरियाली खाद कहा जाता है. यह जमीन कि उपज को बढाता है.

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                                                                                                                      Author By : भाग्यश्री…


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