Eco-friendly Holi kaise manaye – इको फ्रेंडली होली कैसे मनाये

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Eco friendly Holi kaise manaye - इको फ्रेंडली होली कैसे मनाये

 

Eco friendly Holi kaise manaye – इको फ्रेंडली होली कैसे मनाये:

नमस्कार आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का स्वागत है. दोस्तों आज आपके लिए इस वर्ष के होली त्यौहार को इको-फ्रेंडली कैसे मनाये इसके बारे में बताने जा रहे है. क्या आप जानते है? होली त्यौहार को इको-फ्रेंडली कैसे बनाये, क्या आप जानते इको-फ्रेंडली होली मनाने की तकनीक? इको-फ्रेंडली होली मनाने का नया तरीका, कैसे बनाये इको फ्रेंडली होली, ईको-फ्रेंडली होली के लिए क्‍या करें, ”त्‍यौहार स्‍पेशल” जानिए कैसे मनाए खुशियों से भरपूर इको-फ्रेंडली होली.

होली का उल्लासपूर्ण त्योहार वसंत के आगमन का जश्न मनाने के लिए किया जाता है, जबकि होली में उपयोग किए जाने वाले रंग वसंत ऋतु के विभिन्न पड़ावों को दर्शाते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से, आधुनिक समय में होली सभी चीजों के लिए सुंदर नहीं है. विभिन्न अन्य त्योहारों की तरह, होली भी बेरहमी से व्यवसायिक, उद्दाम और अभी तक पर्यावरणीय गिरावट का एक अन्य स्रोत बन गई है. होली को प्रदूषित करने और प्रकृति के साथ तालमेल बनाने के लिए, कई सामाजिक और पर्यावरणीय समूह होली मनाने के अधिक प्राकृतिक तरीकों की वापसी का प्रस्ताव दे रहे हैं.

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दोस्तों इस लेख का मुख्य उद्देश्य होली समारोहों के आसपास के विभिन्न हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना है और लोगों को एक पर्यावरण अनुकूल होली मनाने के लिए प्रोत्साहित करना है.

 

ईको-फ्रेंडली होली मनाए (How to celebrate Eco-friendly Green Holi):

होली त्यौहार बस दरवाजे पर दस्तक दे रही है, और निश्चित रूप से हम में से अधिकांश ने इस त्योहार को भव्य तरीके से मनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है? लेकिन, इस बार इको-फ्रेंडली होली मनाने की कोशिश करें, ताकि यह उत्सव सुरक्षित होने के साथ-साथ भव्य भी हो सके.

क्या आप अपने पर्यावरण को, विशेष रूप से वायु या फिर वातावरण को प्रदूषित करना पसंद करेंगे? निश्चित रूप से आप ऐसा नहीं चाहेंगे, क्योंकि वायु प्रदूषण और किसी भी प्रकार का प्रदुषण जटिल मुद्दों के भार को ट्रिगर करता है. इसलिए, अभी और आने वाले वर्षों के लिए जोखिम भरी होली पर पर्यावरण के अनुकूल होली चुनें. हम चाहेंगे कि यदि हमारी वजह से पर्यावरण सुरक्षित हो सकता है, तो हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए. और खुद की भी सुरक्षित रहना चाहिए.

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होली त्योहार में प्राकृतिक रंगो के बजाय रासायनिक विषारी रंगो का इस्तेमाल अधिक हो रहा है. हमारे बचपन में जब हम फूलो का रंग बनाकर होली त्योहार मानते थे, वो ख़ुशी और वे यादगार पल आज के वर्तमान युग के रासायनिक रंगो में कहा, रासायनिक रंग सिर्फ बनावटी दुनिया का एक मिलावटी साधन है. दोस्तों बता दे की अपनी सुरक्षा के लिए रासायनिक रंगो से बचे, तथा-

विषाक्त रासायनिक रंगों का उपयोग, ना करे.
होली की आग जलाने के लिए लकड़ी का उपयोग, कम करे.
होली के दौरान पानी का व्यर्थ उपयोग, ना करे.

 

रासायनिक रंगों के हानिकारक प्रभाव से बचे:

पहले के समय में जब त्यौहार समारोह इतने अधिक व्यवसायिक नहीं थे, होली के रंगों को वसंत के दौरान खिलने वाले पेड़ों के फूलों से तैयार किया जाता था, जैसे कि भारतीय कोरल वृक्ष (पारिजात) और जंगल की लपट (केसू), दोनों में चमकदार लाल रंग होते हैं. इनमें से अधिकांश पेड़ों में औषधीय गुण भी थे और उनसे तैयार होली के रंग वास्तव में त्वचा के लिए फायदेमंद थे,

शहरी करण और बांधकाम के लिए पेड़ों की कटाई या फिर वर्षा कम होने से और अधिक मुनाफे के लिए अधिक तनाव के साथ इन प्राकृतिक रंगों को रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा निर्मित औद्योगिक रंगों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, इसीलिए वर्तमान में रंगो से कई स्किन की बीमारी होती है.

 

गुलाल में हानिकारक रसायन:

सूखे रंग, जिन्हें आमतौर पर गुलाल के रूप में जाना जाता है, और बता दे की गुलाल में दो विषाक्त घटक होते हैं. एक कोलूरेंट जो विषैला होता है और एक ऐसा घटक है जो एस्बेस्टस या सिलिका हो सकता है, लेकिन दोनों घटक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते है. कोलोरेंट्स में निहित भारी धातुएं अस्थमा, त्वचा रोग और आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं.

 

पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए Eco-Friendly होली त्योहार:

पर्यावरण प्रेमी हमें संदेश देते है की प्राकृर्तिक रंगो का अधिक उपयोग करे, क्योंकि वर्तमान में रासायनिक रंगो के मिलावट से पर्यावरण और स्वास्थ्य में तकनीकी प्रॉब्लम हो रहे है.

नवदान्य, दिल्ली ने अबीर गुलाल नामक एक पुस्तक प्रकाशित की, जिसमें जैव विविधता की बात की गई जो प्राकृतिक रंगों के स्रोत बताती है.

विकास विकल्प, दिल्ली और कल्पवृक्ष, पुणे द्वारा बच्चों को अपनी प्राकृतिक होली के रंग बनाने के सरल तरीके सिखाने के लिए शैक्षिक उपकरण विकसित किए हैं.

स्वच्छ भारत अभियान बच्चों को सुंदर प्राकृतिक रंग बनाने के तरीके सिखा रहा है.

अपने खुद के होली के रंग बनाओ,

 

स्वास्थ्य को खतरा –

होली, एक खुशी का मौका है, लेकिन अब निम्न कारणों से बीमारियों का स्रोत बन गया है :

रासायनिक रंगों के कारण हवा में निलंबित कण त्वचा, आंख, गले और नाक की एलर्जी का कारण बनते हैं.

5 से 16 वर्ष की आयु के बच्चे रंगों के कारण स्किन या त्वचा जैसे समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं.

होली में उपयोग की जाने वाली रासायनिक रंग लोगों के स्किन पर एक अवशेष छोड़ देगी जिससे स्थायी नुकसान होता है.

रंगों द्वारा उत्सर्जित केमिकल से वातावरण में प्रदुषण की मात्रा बढ़ जाती है.

रंगो में उपयोग किए जाने वाले रसायनों का अप्रत्यक्ष रूप से पेट की बीमारियों के कारण होता है, अगर भोजन के सेवन से पहले हाथ ठीक से नहीं धोए जाते, तो इससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है.

 

रंग रासायनिक स्वास्थ्य प्रभाव:

ब्लैक लीड से – ऑक्साइड किडनी विफलता,

ग्रीन कॉपर सल्फेट – आई एलर्जी, पफनेस और अस्थायी अंधापन,

सिल्वर एल्युमिनियम – ब्रोमाइड कार्सिनोजेनिक,

ब्लू प्रशिया – ब्लू कॉन्ट्रैक्ट डर्मेटाइटिस,

रेड मर्करी सल्फाइट – अत्यधिक विषाक्त त्वचा कैंसर का कारण बन सकता है. आदि.

☘ होली त्यौहार प्रेमियों को Eco-Friendly होली की शुभकामनाएं ☘

 

Inspection supervision:

Overview:- Eco-friendly Holi Kaise Manaye – इको फ्रेंडली होली कैसे मनाये (How to celebrate eco-friendly Holi).

Name:- होली का त्यौहार,

Caution:- रासायनिक रंगों से बचाव,

Final Word:- Eco-Friendly होली, सुरक्षित होली मनाये,

 

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