Holika dahan ki jankari – होलिका दहन की जानकारी (त्यौहार का इतिहास)

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Holika dahan ki jankari - होलिका दहन की जानकारी

 

होलिका दहन की जानकारी – Holika dahan ki jankari :

नमस्कार, एक बार फिर आप सभी का Apna Sandesh वेब पोर्टल में स्वागत है. दोस्तों आज हम आपको प्राचीन भारतीय वसंत होली त्योहार के बारे में बताने जा रहे हैं. जी हाँ दोस्तों होलिका दहन और उससे जुड़ी बातें, दोस्तों, हमारा एक सवाल है, क्या आप जानते हैं? होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है, होली त्यौहार का आध्यात्मिक कारण क्या है, होली स्पेशल रंगपंचमी की जानकारी, होली के रंगीन त्योहार के बारे में, होली कैसे और क्यों मनाई जाती है?

अपना संदेश के सभी लेखकों द्वारा आप सभी को होली की शुभकामनाएँ: दोस्तों इस लेख में भारत के रंगीन उत्सव होली के पीछे प्राचीन कथाएँ, इनके आवश्यक सत्य के बारे में जानकारी, जाने.

 

होली क्यों मनाई जाती है और यह क्या सिखाती है:

जीवन रंगों से भरा होना चाहिए, जीवन के हर एक चरण में प्रत्येक रंग को अलग-अलग देखने और आनंद के लिए डिज़ाइन किया गया है. अगर सभी रंगों को एक साथ मिला दिया जाए तो ये सभी काले-नीले दिखाई देंगे. लाल, पीले, हरे आदि के सभी रंग अलग-अलग होने चाहिए, लेकिन साथ ही साथ हमें उनका आनंद भी लेना चाहिए. इसी तरह, जीवन में किसी व्यक्ति द्वारा निभाई गई भूमिकाएं उनके भीतर शांतिपूर्ण और अलग होनी चाहिए,

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हम जिस भी स्थिति में हैं, हमें अपना योगदान 100 प्रतिशत देना चाहिए और फिर हमारा जीवन देखो आनदमय और रंगों से भरा होगा, इस अवधारणा को प्राचीन भारत में “वर्णाश्रम” कहा गया है. इसका मतलब है कि – प्रत्येक व्यक्ति – चाहे वह डॉक्टर हो, शिक्षक हो, पिता हो या जो भी हो, उस भूमिका को पूरे उत्साह के साथ निभाए, क्योंकि कभी भी अपने कर्तव्य से भागना नहीं चाहिए, मन के इन अलग-अलग चरित्रों को अलग और अलग रखना एक सुखी जीवन का रहस्य है और यही हमें होली सिखाता है.

 

प्राचीन भारत का होली महोत्सव:

होली भारत का एक प्राचीन और रंगों का त्योहार है और मूल रूप से यह ‘होलिका’ के रूप में जाना जाता है. इस त्योहारों का प्रारंभिक धार्मिक कार्यों में विस्तृत वर्णन मिलता है जैसे कि जैमिनी का पुरवामीमांसा-सूत्र और कथक-ग्रह्य-सूत्र, इतिहासकार यह भी मानते हैं कि होली सभी आर्यों द्वारा मनाई गई थी, ऐसा कहा जाता है कि होली ईसा से कई शताब्दी पहले अस्तित्व में थी, माना जाता है कि होली त्योहार का अर्थ वर्षों से बदल गया है. पहले यह विवाहित महिलाओं द्वारा उनके परिवारों की खुशियों और खुशहाली के लिए किया
जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान था और पूर्णिमा (राका) की पूजा की जाती थी.

प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों में संदर्भ:

वेदों और पुराणों जैसे नारद पुराण और भाव पुराण में विस्तृत विवरण होने के अलावा, होली के त्योहार का जैमिनी मीमांसा में उल्लेख मिलता है. विंध्य प्रांत के रामगढ़ में पाए गए 300 ईसा पूर्व के एक पत्थर के उत्थान ने इस पर होलिकोत्सव का उल्लेख किया है. राजा हर्ष ने भी अपने काम रत्नावली में होलिकोत्सव के बारे में उल्लेख किया है जो 7 वीं शताब्दी के दौरान लिखा गया था,

 

प्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक –

उलबरूनी ने भी अपनी ऐतिहासिक यादों में होलिकोत्सव के बारे में उल्लेख किया है.

 

प्राचीन चित्रों और भित्ति चित्रों में संदर्भ:

होली के त्योहार पर पुराने मंदिरों की दीवारों पर मूर्तियों में एक संदर्भ भी मिलता है. विजयनगर की राजधानी हम्पी में एक मंदिर में 16 वीं शताब्दी का एक पैनल खुदा हुआ है, जो होली के आनंदमय दृश्य को दर्शाता है.

16 वीं शताब्दी का अहमदनगर पेंटिंग वसंत रागिनी के विषय पर है – वसंत गीत या संगीत, यह एक शाही जोड़े को एक भव्य झूले पर बैठा दिखा रहा है, जबकि युवतियां संगीत खेल रही हैं और पिचकारियों के साथ रंगों का छिड़काव कर रही हैं.

मध्ययुगीन भारत के मंदिरों में बहुत सारी अन्य पेंटिंग और भित्ति चित्र मिले है जो होली का चित्रण विवरण प्रदान करते हैं.

 

महापुरूष और पुराण (होलिका दहन की जानकारी – होली त्यौहार का इतिहास):

भारत के कुछ हिस्सों में, विशेष रूप से बंगाल और उड़ीसा में, होली पूर्णिमा को श्री चैतन्य महाप्रभु (1486-1533) के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है. हालाँकि, ‘होली’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘जलना’ है. इस शब्द के अर्थ को समझाने के लिए कई किंवदंतियाँ हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख है दानव राजा हिरण्यकश्यप से जुड़ी किंवदंती है.

हिरण्यकश्यप चाहता था कि उसके राज्य में हर कोई केवल उसकी पूजा करे लेकिन भगवान की लीला देखो, उसका ही खुद का पुत्र भक्त प्रल्हाद भगवान नारायण का एक भक्त था. दोस्तों चलिए इस कहानी के सारांश को अधिक जानते है और समझते है ”होलिका दहन की कहानी”

दोस्तों शायद आप सभी जानते होंगे की, भक्त प्रह्लाद से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, होली का त्योहार मनाया जाता है. भक्त प्रह्लाद भगवान को समर्पित एक बच्चा था, लेकिन उसके पिता भगवान में विश्वास नहीं करते थे, तो कहानी इस तरह से आगे बढ़ती है कि, प्रह्लाद के पिता एक नास्तिक राजा थे और उनका बेटा हर समय भगवान के नाम का जप करता था. लेकिन इसे भगवान की लीला ही समजना पड़ेगा. क्योंकि एक दानव के यहां एक भक्त जो हर समय अपने प्रभु का ध्यान करता था. इसके कारण वह दानव अपने बेटे को सबक सिखाना चाहता था,

 

होलिका दहन की कहानी:

दानव राजा हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को समझाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन प्रह्लाद में कोई बदलाव नहीं आया, दानव राजा हिरण्यकश्यप यह सब देखकर गुस्से से आँख बबूला हो गया, वह राजा सोचता की मैं खुद ही भगवान हु. इसी भ्रम में अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने का विचार किया. इसलिए उन्होंने अपनी बहन की मदद ली और दोस्तों शायद आप इस कहानी को पुरातन वर्ष से वाकिब होंगे की राजा हिरण्यकश्यप की बहन ”होलिका” को वरदान था की वह किसी को भी अपनी गोद में लेकर आग में प्रवेश करती है, तो उसको खुद कुछ नहीं होगा, लेकिन उसकी गोद में बैठे व्यक्ति भस्म हो जाएगा.

राजा की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाने के लिए अपने गोद में बिठाया, लेकिन प्रह्लाद के अनमोल भक्ति-भाव से श्री ॐ नारायणा याने भगवान “हरि” का जाप किया और भगवान को समर्पित हो गए, लेकिन नारायण भक्ति से गहरे जुड़े प्रह्लाद ने सभी पुराने संस्कारों को नष्ट कर दिया और फिर नए रंगों के साथ आनंद का जन्म हुआ,

इस कहानी से यह एक अच्छा संदेश मिलता है की जीवन का हर पल एक उत्सव है. हम अतीत को छोड़कर एक नई शुरुआत की ओर बढ़ते हैं. हमारी भावनाएं हमें आग की तरह जलाती हैं, लेकिन जब रंगों का फव्वारा फूटता है, तो हमारे जीवन में आकर्षण होता है. अज्ञानता में, भावनाएँ एक बोझ की तरह होती हैं, जबकि ज्ञान में वही भावनाएँ जीवन में रंग भर देती हैं. सभी भावनाएँ एक रंग से जुड़ी होती हैं जैसे,

  • लाल रंग क्रोध के साथ,
  • हरा रंग खुशी के साथ,
  • पीला, प्यार के साथ,
  • गुलाबी, महानता के साथ,
  • सफेद शांति और केसर संतुष्टि / त्याग और बैंगनी ज्ञान के साथ,

दोस्तों इसी तरह हर त्योहार का सार जानें और ज्ञान में होली का आनंद लें.

 

☘ आप सभी को होली की शुभकामनाएं ☘ 

 

Inspection supervision:

Overview:- Holika Dahan ki jankari – होलिका दहन की जानकारी ((होली त्यौहार का इतिहास जाने).
Name:- होली का त्यौहार, Holi tyohar ka itihas jane,
Caution:- रासायनिक रंगों से बचाव,
Final Word:- सुरक्षित होली मनाये, बुरा न मानो, होली है.

 

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