Aushadhi Nirmiti kaise hoti hai – औषधि निर्मिती कैसे करे

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Aushadhi Nirmiti kaise hoti hai - औषधि निर्मिती कैसे करे

 

औषधिनिर्मिती कैसे करे – Aushadhi Nirmiti kaise hoti hai

Aushadhi Nirmiti kaise hoti hai: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार की तरह आज भी हम आपको नई जानकारी से अवगत कराने जा रहे है. दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में औषधि निर्मिती कैसे होती है? औषधिनिर्मिती के बारे में जानकारी, औषधिनिर्मिती कैसे करे, Drug manufacturing ke bare me jankari. इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर आपको जानना है तो आप सही आर्टिकल पढ़ रहे है. हाँ प्रिय पाठक, आपके इन सरे प्रश्नों के समाधान इस आर्टिकल से अवगत होंगे, तो आइये जानते है औषधिनिर्मिती प्रक्रिया के बारे में,

औषधिनिर्मितिशास्त्र क्या है. हम जो दवाईया खाते है. क्या आप को पता है, वह किस तरह बनाई जाती है? और कैसे बनाई जाती है? यह सब बाते हमें तो पता ही नही होता, और हम सिर्फ दवाईया खाने का काम करते है.

 

औषधिनिर्मिती के बारे में जानकारी:

दोस्तों, आज हम आपको औषधि नीर्मिति किस तरह होती है. इसके बारे में जानकारी देने जा रहे है, जैसे की औषधियो का वापर वैद्कीय क्षेत्र में जितने सरलता से किया जाता है, उसी तरह ही यह एक औषधि निर्मिती का सरल भाग है. ऐसा हर किसी को लगता है. लेकिन इसकी वस्तुस्थिति बहुत ही अलग होती है. दवाई इस संज्ञा के निचे आनेवाली कोई भी चीजे खुद के इस्तेमाल में आने तक अनेक तरह के कठीन चाचणीयों (परीक्षणों) से जाना पड़ता है. (Aushadhi Nirmiti kaise hoti hai – Aushadhi Nirmiti kaise kare)

हमें यह तो पता होना चाहिए की, वह दवाइया कब और कैसे इस्तेमाल करनी चाहिए, इसका नियोजन हमें बताया जाता है. इन्ही सारी प्रक्रियाओं को ही “औषधि निर्मिती शास्त्र” कहा जाता है. वैद्यकीय शास्त्र से सबंधित ये अभ्यासक्रम डॉक्टर भी पूरा करते है. और वहां जाकर औषधि निर्मिति शास्त्र का प्रशिक्षण लिया जाता है. इसमें नई दवाईयो की खोज करना, और उनका परिक्षण करना इन सारी चीजो पर डॉक्टर्स काम करते है.

 

औषधिनिर्मिती कैसे होती है:

21 वी शतक में ओषधि निर्मिती यह मनुष्य के संपर्क में न आनी चाहिए, ऐसी अभिलाषा रखी जा रही है. इसका अर्थ यह है की, एक बार अगर कच्चा माल प्रक्रिया करने के लिए गया है, और उससे कोनसी कैसे स्वरूप में बनेगी. (काप्सुल, मलम , गोली) यह हवाबंद स्वरूप में ही बाहर आना चाहिए, यह अपेक्षा रखी जा रही है. औषधि निर्मिती कारखानो में किसी बाहर के व्यक्ति को प्रवेश नही होता है. इतना ही नही बल्कि जैसे की एखादे ऑपरेटशन थीएटर में स्वच्छता रखी जाती है. वहां पर काम करने वाले कामगारों को पोशाक पहनकर, और हाथ के दस्ताने पहनकर यन्त्र का इस्तेमाल किया जाता है.

दोस्तों, दवाईया ही नही बल्कि इनके अंदर की हवा बाहर निकालकर, और स्वच्छ करके रखा जाता है. इन सारे चीजो को पैकबंद करके दवाखाना और मेडिकल में पहुचाया जाता है. औषधिनिर्मिती शास्त्र में अनेक बायोकेमिकल प्रक्रियाओ का मिश्रन रहता है. वैसा ही वह औषधियों का डोस लेने के लिए भी बनाना रहता है. जैसे की तिन या चार मिलीग्राम ऐसा डोस रहने वाली इतनी दवाईया कम रहती है. फिर उसका इस्तेमाल करना, और मरीजो को देना मुश्किल हो जाता है. फिर यही दवाई पूरक स्वरूप में मिश्रित करके उसकी गोलिया बनाइ जाती है.

 

औषधिनिर्मिती सावधानी और सुरक्षा:

दवाइया बनाते समय उसके अंदाजे का ध्यान रखना यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. गोलिया बनाते समय वह एक आकार की या, बारीक़ हो, लेकिन उस गोली को पहचानने के लिए वह एक चिन्ह रखा जाता है. कोंसी दवाईया कितने तापमान पर कितना टिक सकती है. एक खोली में उनका जीवन कितना, कोनसी दवाई प्रकाश से दूर रखनी चाहिए, इस बारे विचार किया जाता है. छोटे बच्चो के हात में गलती से भी न आनेवाली दवाइया, डॉक्टर के बिना चिट्टी से मिलने वाली दवाइया, सामान्य मनुष्य को जरुरत रहने वाली दवाइया, ऐसे अनेक तरह की जानकारी के बारे में सोचा जाता है.

सरकारी नियमो के अनुसार “फुड एंड ड्रग“ ऐसा कायदा हर एक देश में लागु किया जा रहा है. इसका पालन बाहर देशो की कंपनियों को भी किया जाता है. औषधिनिर्मिती में 1 लाख से ज्यादा गोलिया, कैप्सूल ऐसी एक भाग में विभागणी करना, और बाद में उसका परिक्षण किया जाता है. इस परिक्षण में उत्तीर्ण हुई दवाईया ही बेचने के लिए भेजी जाती है.

दोस्तों 30 – 40 साल पहले फार्मासिस्ट खुद की दवाइयो में मिश्रण करके डॉक्टर के बताये नुसार वह रुग्णों को दी जाती थी, वह रिवाज प्रगत देशो में अब बंद कर दी गयी है. इतनाही नही बल्कि दवाई बेचने वाले दुकानो मे भी फार्मासिस्ट की ही जवाबदारी समझी जाती है.

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औषधि निर्माण प्रक्रिया:

दवा निर्माण प्रक्रिया आम तौर पर सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक की भौतिक और रासायनिक विशेषताओं के अनुसार चुनी गई विशिष्ट इकाई प्रक्रियाओं के संयोजन से बनती है.

सूखा दाना: एक ग्रेन्युल के लिए एक कम घनत्व पाउडर का संघनन, रोलर संघनन प्रक्रिया में पेंच फीड, संघनन और मिलिंग सिस्टम का संयोजन होता है.

पाउडर सम्मिश्रण: फार्मास्यूटिकल उद्योग में, ठोस खुराक के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले अंतिम मिश्रण को बनाने के लिए कई प्रकार के excipients को एक साथ मिश्रित किया जा सकता है. प्रत्येक व्यक्तिगत दवा तैयार करने की विशिष्टता यह आश्वस्त करती है कि कोई भी दो सम्मिश्रण प्रक्रिया कभी समान नहीं हो सकती हैं.

Fluid bed granulation: शीर्ष स्प्रे, नीचे स्प्रे (Wurster) और रोटरी (स्पर्शरेखा स्प्रे) आमतौर पर खाद्य और दवा उद्योगों में उपयोग किया जाता है.

Hot-melt extrusion: खराब घुलनशीलता और जैव उपलब्धता के साथ दवाओं के वितरण को सक्षम करने के लिए दवा प्रसंस्करण में उपयोग किया जाता है. विशेष रूप से रुचि आणविक स्तर पर मैट्रिक्स में सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) को फैलाने के लिए एचएमई का उपयोग है, इस प्रकार ठोस समाधान बनाते हैं.

 

दवा निर्माण की प्रक्रिया:

सुखाने की प्रक्रिया: पाउडर की नमी को समझना और नियंत्रित करना कई दवा प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है.

फार्मास्यूटिकल मिलिंग: उपकरण के अक्ष के साथ कोण पर खिलाकर एक वर्कपीस से सामग्री को हटाने के लिए दवा उपकरण मशीनरी में रोटरी कटर का उपयोग करने की प्रक्रिया होती है.

टैबलेट कोटिंग उपकरण: विकल्पों में बैच प्रक्रिया कोटिंग पैन, ऑफ-प्रेस निरंतर कोटिंग या निरंतर प्रसंस्करण शामिल है.

फार्मास्युटिकल एनकैप्सुलेशन: एक नरम खोल या कठोर पूर्व-निर्मित कैप्सूल में एक दवा की ठोस या तरल खुराक का समावेश होता है.

 

Author by-APARNA

 

Inspection supervision:

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