E-mail ka aaj tak ka safar – ई-मेल का आज तक का सफर

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E-mail ka aaj tak ka safar - ई-मेल का आज तक का सफर

 

E-mail ka aaj tak ka safar – ई-मेल का आज तक का सफर:

E-mail ka aaj tak ka safar: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में E-mail ka aaj tak ka safar, संदेश भेजने की प्रक्रिया, भविष्य (future) की संदेश भेजने वाली प्रोसेस, संदेश के बारे में जानकारी, Apna Sandesh kaise bheje, और जानिए इसके प्रक्रिया. हाँ प्रिय पाठक, आपके इन सरे प्रश्नों के समाधान इस आर्टिकल से अवगत होंगे, तो आइये जानते है ई-मेल का सफर,

 

ई-मेल का आज तक का सफर:

आप सभी को पता ही होगा की ई-मेल याने क्या है? इसके बारे आज हम आपको बताने जा रहे है. मेल याने एक डाक और टपाल. यह एक सबका महत्वपूर्ण विषय है. दोस्तों, पोस्टमैन आते दिखा की, मन के मन में लगता है, की इसके पास हमारे लिए भी 2-3- पत्र होगी, बड़े शहरो में दिन में एक बार तो छोटे गावो में हफ्ते में २ बार पोस्टमैन आता है.

दोस्तों बता दे की सुरुआती ज़माने से पोस्टमैन और उन्हके द्वारा दी जाने वाला संदेश पत्र पढ़ने में बहुत ही प्यारा लगता था. लेकिन वर्तमान में वही संदेश पत्र E-mail के रूप में प्रख्यात है.

तो चलिए दोस्तों संदेश पत्र यानि की E-mail का सुरुआत से अभी तक का सफ़र कैसा और इसका इतिहास क्या है. इसके बारे में विस्तार पूर्व जानते है.

 

संदेश पत्र का सुरुआती दौर:

दोस्तों, जब कभी भी हमें पत्र में से सन्देश मिलता है. तो सबसे पहले खयाल आता है की इसका शुरआती दौर कैसा रहा होगा, शुरआत से देखे तो सन्देश पत्र को एक प्रान्त से दुसरे प्रान्त तक पहुचाने के लिए वाहन का ही इस्तेमाल होता था. पूर्वकालीन युग में घोड़े-ऊंट यही वाहन उपलब्ध थे. तब खलीता पत्र लेकर जाता था. मतलब ये महगी सेवा सिर्फ बड़े लोगो को ही उपलब्ध थी. (E-mail ka aaj tak ka safar – Apna Sandesh kaise bheje)

सामान्य लोगो का व्यवहार इतने तक ही मर्यादित था, इन सेवा ओ की जरुरत नही पड़ती थी. इसका मजाकि उदहारण याने, जब शिवाजी महाराज आग्रा के जेल से छूटे और घोड़े के साथ दक्षिण के और जाने लगे, शिवाजी महाराज और उनको पकड़ने का औरंगजेब का हुकुम एक ही गति से दौड़ रहे थे. यह था कुछ पुराना नजारा,

 

औद्योगिक क्रांति के बाद ई-मेल सेवा:

फिर औद्योगिक क्रांति के बाद रेलगाड़ी, मोटर ऐसी जलद वाहने आ गयी थी. उनको उपयोग में आने का मार्ग था. मनुष्य के व्यवहार के क्षेत्र में बढ़ने वाली टपाल सेवा की गरज सरदारों तक ही सिमित थी. रेल के कारण भारत के बड़े गाव जोड़ने में आई. और इसी माध्यम से 2-4 दिन में कहा से कहा तक टपाल पहुचने लगी. विदेशो में 15 दिन में पत्र जाने लगे. इसमें क्रांति होने लगी वह तारयंत्र के कारण. बिजली की गति के  कारण आसान होने लगा. (E-mail ka aaj tak ka safar – Apna Sandesh kaise bheje)

दोस्तों, विश्व की सबसे बड़ी सेवा याने वह थी विद्युतचुम्बकीय लहर. यह लहर प्रकाश के गति के कारण उस पर मात करना कठिन है. प्रश्न ऐसा की, वाहन इतना जलद है फिर भी उसका उपयोग कैसा करना? ये बात पता होते ही रेडियो प्रसारण को सुरुवात हुई. लेकिन यह माध्यम शासकीय माध्यम के निचे रहता है. फिर भी रेडियो प्रसारण एकतर्फी याने रेडियो स्टेशन तक श्रोते रहते थे. दोस्तों, यह तंत्रज्ञान की हर बार की ही कहानी थी. जग के 2 संगणक को जोड़नेवाला आकाश में टंगा हुआ भूस्थिर उपग्रह यह हमारा तीसरा पहलु है. यह तिन पैलू सिद्ध होने के बाद ई-मेल का जमाना आया.

 

कंप्यूटर और ई-मेल:

जिस के पास संगणक, टेलिफोन और उससे जुडी हुई ई-मेल की सुविधा है. उसकी एक स्वतन्त्र डिरेक्टरी रहती है. इस के पत्ते बहुत ही मजाकदार होते है. जैसा की टाटा इंस्टिट्यूट में काम करने वाले वि.गी.कुलकर्णी इनकी नोंद हमें VJK @HBCSE. TIER.RES.IN  ऐसी है तो हमें लंदन से हमें इनको सन्देश भेजना है. तो हमें सन्देश टाइप करना होगा और वहां के संगणक पर डालना होगा. फिर संगणक संदेश वहन के लिए तैयार हुआ, फिर यह पत्ता की-बोर्डपर टाइप करना, फिर दो संगणक आंतरराष्ट्रीय टेलीफ़ोन द्वारा जोड़ा जाता था.

 

नया जमाना नया ई-मेल:

फिर कुछ समय बाद, कंप्यूटर में ऑर्डर करने का जमाना आया, इसमें किसी भी संदेश को आसानी से टाइप किया जाता था. दोस्तों, ई-मेल के कई फायदे हैं, जैसे वैज्ञानिकों को लगता है कि यह एक वरदान ही है. दुनिया के दो अलग-अलग प्रयोगशालाओं के विद्वान सहयोग के साथ कुछ प्रयोग कर रहे थे, इसलिए वे अपने आह्वान को किसी भी समय बता सकते हैं. यदि हमें संदेश परिषद को भरना है, तो, पत्रों में समय बर्बाद किए बिना, हम उन्हें अपना विषय, ई-मेल के माध्यम से जारी कर सकते हैं. इस तरह आधुनिक E-mail के माध्यम से पत्राचार होने लगा, वर्तमान के संदेश पत्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे.

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Author by:- APARNA

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