Jal strot ke bare me jankari – जल स्रोत के बारे में जानकारी

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Jal strot ke bare me jankari - जल स्रोत के बारे में जानकारी

 

जल संसाधन के उपाय कैसे करे – Jal strot ke bare me jankari

jal strot par jankari: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार की तरह आज भी हम आपको नई जानकारी से अवगत कराने जा रहे है. दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में जल के स्त्रोत क्या है? जल संसाधन के उपाय कैसे करे? Jal strot कौन कौन से है, जल के स्रोत के चित्र, Prakrutik jal strot ke bare me jankari. प्राकृतिक जल स्रोतों के नाम, इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर आपको जानना है तो आप सही आर्टिकल पढ़ रहे है. हाँ प्रिय पाठक, आपके इन सरे प्रश्नों के समाधान इस आर्टिकल से अवगत होंगे, तो आइये जानते है जल स्रोत के बारे में,

 

जल स्त्रोत के बारे में जानकारी:

प्रिय पाठक, आप हर एक पल जरूर सुनते होंगे और हम सभी कहते भी है, की जल है तो कल है. हम जल के बिना जीवित नही रह सकते है. दोस्तों, पृथ्वी का अधिकतर जल (लगभग ९७%) महासागरो व समुद्रो में पाया जाता है. शेष जल (३%) नदियों, तालाब, झीलों, आदि में पाया जाता है. दोस्तों, वायु में जल, जलवाष्प रूप में होता है.

 

जल के अन्य स्त्रोत (sources of water):

पृथ्वी के पृष्ठ का 3/4 भाग जल से गिरा है. संसार में प्राप्त कुल जल का ९७.४% महासागरो में पाया जाता है. तथा कुल २.६% ताजा जल नदियों, झीलों, तालाबो, झरने में पाया जाता है.

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वर्षा का जल:

वर्षा जल प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले जल का शुद्ध रूप है. बादलो में वर्षा की बुँदे अपने शुद्ध रूप में होती है, वर्षा जल की पहली बार बौछार में धुल के कण, बैक्टीरिया, वायुमंडल में उपस्थित घुली हुई गैस मिली होती है. बाद की बौछार में अशुद्धिया कम हो जाती है.

 

नदिया तथा झील का जल:

बहुत कम मात्र में स्वच्छ जल झीलों, नदियों, भूमिगत जल आदि के रूप में प्राप्त है, जो मनुष्य के लिए उपयुक्त है. यह वह जल है, जिसका प्रकृति में लगातार चक्रं होता है.

 

समुद्री जल:

समुद्र प्राकृतिक जल का सबसे बड़ा संग्राहक है. क्योंकि नदिया व झीले यह पर ही आकर मिलती है. पृथ्वी में कुल जल का लगभग ९७% भाग समुद्रो में पाया जाता है, लेकिन यह जल इतना खारा होता है की, इसका प्रयोग पिने, खाना पकाने, खेती करने तथा उत्पादन में नही किया जा सकता है. समुद्री जल में अशुद्धिया होती है. जो नदी के जल में उपस्थित होती है, इसमें साधारण २.५% नमक होता है.

 

जल की अवस्थाये (stage of water):-

प्रकृति में जल तिन अवस्थाओ में पाया जाता है. ठीस (बर्फ), द्रव (जल), गैस (जलवाष्प). ठोस अवस्था में जल, बर्फ, कोहरा इनके रूप में होता है. जब बर्फ अधिक संगुणित हो जाती है, तो यह हिम कहलाती है, स्वच्छ जल अधिक मात्रा में आर्कटिक और अन्टार्टिक ग्लेशियर में हिम पिघलने से प्राप्त होती है. द्रव अवस्था में अधिकतर जल समुद्री जल से मिलता है.

जल का बहुत थोडासा प्रतिशत नदियों के रूप में पृथ्वी के पृष्ठ पर होता है. गैसिय अवस्था में जल में वायु में उपस्थित जलवाष्प के रूप में रहता है. वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा भिन्न-भिन्न होती है. जल ठोस अवस्था में बदल जाता है. जब इसका तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से निचे गिरता है. यदि ठोस अवस्था में जल गर्म किया जाये, तब यह 0 डिग्री C पर द्रव अवस्था में बदलने शुरू हो जायेगा. जल धीरे-धीरे वाष्पीकृत होता है, तथा जलवाष्प में बदलता है. उच्च ताप (0 डिग्री – 100 डिग्री c) पर जल तेजी से जलवाष्प में बदल जाता है. और वायु में मिल जाता है.

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यह चीजे ध्यान में रखिये:-

1. पदार्थ जो पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप में पाए जाते है. तथा मनुष्य द्वारा प्रयोग किये जाते है. यह प्राकृतिक स्त्रोत कहलाते है.

2. वायु,जल, भिमी,खनिज लावन,पौधे तथा जंतु यह प्राकृतिक स्त्रोत है.

3. वायु के बाद जल एक प्रमुख नवीनीकरण स्त्रोत है.

4. पृथ्वी पर जल कुल २.६% उपयोग करने के योग्य है.

5. जल-चक्र की प्रक्रिया द्वारा अपने आप पुनर्चक्रित हो सकता है.

6. जल सभी सजीवो के जिवंव्यापन के हेतु महत्वपूर्ण है.

7. जल ठोस,तथा गैस,और द्रव अवस्था में पाया जाता है.

8. दोस्तों, जब बर्फ पिघलती है ,तो तापमान ० डिग्री तक आने में सारी बर्फ पिघल जाती है,

9. जल का व्यर्थ किये बिना इसका उचित तरीके से तथा बुध्धिमानी से उपयोग करना जल संरक्षण कहलाता है.

10. बाँध में उपयोग के लिए वर्षा-जल को ही एकत्र करना और वर्षा जल के संरक्षण करना दोस्तों.

 

Author by- APARNA

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