Mahavir jayanti ke bare me jankari – महावीर जयंती की बारे में जानकारी

महावीर जयंती की बारे में जानकारी. Mahavir jayanti ke bare me jankari, महावीर जयंती क्यूँ मनाते है, bhagwan mahavir ki jankari. स्वामी महावीर का त्यौहार कब मनाया जाता है, (swami mahavir ka Tyohar kab manaya jata hai), भगवान महावीर का मोहत्सव.

Mahavir jayanti ke bare me jankari - महावीर जयंती की बारे में जानकारी

 

Mahavir jayanti ke bare me jankari – भगवान महावीर जयंती की बारे में जानकारी:

bhagwan mahavir ki jankari: नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है apnasandesh.com पर, दोस्तों आज हम आपके लिए ऐसा आर्टिकल लेकर आए हैं, जो हमारी आस्था और आत्मा पर टिका है, जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे हैं भगवान महावीर की जिसे हम वर्धमान के नाम से भी जानते हैं.

दोस्तों क्या आप जानते है आखिर क्यों महावीर जयंती मनाते है? क्या आपको पता है, भगवान महावीर के जयंती पर क्या हुआ था? और क्या आपको पता है जैन धर्म के संस्थापक कौन थे, और किस कारण वश हम हर साल महावीर जयंती मनाते है, दोस्तों अगर आप इन सारी बातों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप सही आर्टिकल पढ़ रहे है. जिससे आपको आपके हर सवाल का जवाब मिल जायेगा और पता चल जायेगा की, हम क्यूँ महावीर जयंती मनाते है, क्यूँ जैन धर्म के सारे लोग भगवान महावीर के बताये हुए मार्ग पर चलते है. उनकी पूजा करते है. तो चलिए दोस्तों सबसे पहले हम जानते है, भगवान महावीर के जीवन से जुड़ी कुछ बातों के बारे मे.

 

भगवान महावीर जयंती परिचय:-

महावीर स्वामी का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष 13 वी तिथि त्रयोदशी को मनाया जाता है, इसी दिन महावीर स्वामी का जन्म हुआ और उनके जन्म कल्याण का उपलक्ष में महावीर जयंती मनाई जाती है. हर साल महावीर जयंती बहुत ही उल्हास के साथ मनाया जाता है, यह त्यौहार जैन धर्म में बहुत बड़ा त्यौहार मनाया जाता है. शायद आप जानते होंगे की जैन धर्म की स्थापना प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव ने किया था. लेकिन समाज में वास्तविक रूप से जैन धर्म को समाज में प्रतिष्टित करने का श्रेय, 24 वे तीर्थकर महावीर स्वामी का है, महावीर स्वामी का जन्म 540 ईसा पूर्व कुंडग्राम (बिहार) भारत में हुआ था, स्वामी महावीर इनकी माता, लिच्छवी नरेश चेटक की बहन थी. इनका नाम त्रिशिला और पिता सिद्धार्थ जो क्षत्रिय थे.

स्वामी महावीर इनका बचपन का नाम वर्धमान था. इनकी पत्नी यशोदा और पुत्री अणोज्जा प्रियदर्शनी थी. जब स्वामी महावीर ने घर त्याग किया तब उनकी उम्र 30 साल थी, और 12 वर्षो तक कठिन तपस्या के बाद, अभिग्राम के निकट ऋजुपलिका नदी के तट पर, साल वृक्ष के निचे इनको ज्ञान की प्राप्ति हुई.

भारत में इस त्यौहार के उपलक्ष पर जैन मंदिरों को बहुत ही अछी तरह से सजाया जाता है, इस त्यौहार पर भारत में कई जगह पर जैन समुदाय के द्वारा अहिंसा रैली भी निकली जाती है. और इसी अवसर पर बहुत से गरीब और जरुरत मंद लोगो को दान भी दिया जाता है. और इसके साथ साथ सरकार से निवेदन करके मास, मछी के कटाई वाले क्षेत्र को बंद रखने की निवदन भी करते है.

 

जैन धर्म के 24 तीर्थकर:-

1. ऋषभदेव जी इन्हें आदिनाथ भी कहते है.

2. अजितनाथ जी

3. सम्भवनाथ जी

4. अभिनन्दन जी

5. सुमतिनाथ जी

6. पद्मप्रभु जी

7. सुपाश्वनाथ जी

8. चंदाप्रभु जी

9. सुविधिनाथ जी

10. शीतलनाथ जी

11. श्रेयासनाथ जी

12. वासुपूज्य जी

13. विमलनाथ जी

14. अनंतनाथ जी

15. धर्मनाथ जी

16. शांतिनाथ जी

17. कुंथुनाथ जी

18. अरनाथ जी

19. मल्लिनाथ जी

20. मुनिसुर्व्रत जी

21. नमिनाथ जी

22. अरिष्टनेमि जी

23. पार्श्वनाथ जी

25. महावीर स्वामी जी, इन्हें वर्धमान, वीर, अतिवीर भी कहा जाता है.

 

महावीर के तिन आधारभूत तिन सिद्धांत:-

दोस्तों, भगवान महावीर के तिन आधारभूत सिद्धांत है, इनमे सबसे पहले अहिंसा दूसरा सत्य और तीसरा अनेकांत अस्तेय ये तिन सिद्धांत लोगो को जीने की राह बताता है. इस तरह के सिद्धान्तो का पालन करने से सुख शांति मिलती है, आपको बता दे की भगवन महावीर मन वचन और कर्म किसी भी माध्यम से की गयी हिंसा की निषेध करते है, भगवान् महावीर जी ने बताया की किसी भी जीवो की रक्षा कर लेना और प्राणी मात्रा को तकलीफ नहीं पहुचना ही अहिंसा है.

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जैन धर्म में दिगम्बर और श्वेताम्बर समुदाय:

दिगम्बर समुदाय:

दिगम्बर मुनि वस्त्र नहीं पहनते है, उनके शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं रहता है, यह मुनि हमेशा नग्न अवस्थामे ही रहते है, इनके तीर्थकरो की मुर्तिया भी नग्न बनायीं जाती है, और उनका कभी भी श्रृगार नहीं किया जाता, इनको कभी भी फुल और फल नहीं चढ़ाये जताए पूजा करते समय.

 

श्वेताम्बर समुदाय:

श्वेताम्बर सन्यासी सफ़ेद वस्त्र पहनते है, श्वेताम्बर सन्यासी इनके शरीर पर हमेशा सफेद कपडे पहने रहते है, श्वेताम्बर तीर्थकरो की प्रतिमाए हमेशा लंगोट धारण करी हुई रहती है, इनकी प्रतिमा धातु की बनी रहती है, और कुंडल सहित प्रतिमाये बनाई जाती है, श्वेताम्बर तिर्थोकारो की प्रतिमाये उनका श्रृंगार भी किया जाता है.

जिव और पुद्रगल:- जैन धर्म में आत्मा को माना जाता है, इनमे उनको जिव कहते है, और अजीव को पुद्रगल कहा जाता है, इनके अनुसार जिव सुख दुःख, दर्द, आदि का अनुभव करते है, और फिर पुनर्जन्म लेता है.

मोक्ष:- जीवन व् मरण के चक्र से मुक्ति को मोक्ष कहते है.

 

जैन धर्म के प्रमुख त्यौहार:

1. पंचकल्याण,

2. महावीर जयंती,

3. ओली,

4. पज्जुशन,

5. पर्जुषण,

6. ऋषिपंचमी,

7. दिवाली, जैनधर्म,

8. ज्ञान पंचमी,

9. देव दिवाली,

ऊपर लिखे हुए त्यौहार जैन धर्म में मनाये जाते है.

 

Author by: Prashant

 

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