Radio station kyo hote hai – अलग-अलग रेडिओ स्टेशन

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Vividh Radio station kyo hote hai - अलग-अलग रेडिओ स्टेशन

 

Vividh Radio station kyo hote hai – अलग-अलग रेडिओ स्टेशन:

Radio ke bare me jankari: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का स्वागत है. तो दोस्तों जैसे की आप जानते है की हम आपको हर बार नई-नई जानकारी से अवगत कराते है. वैसे ही आज हम आपको एक नई जानकारी देने जा रहे है. वह जानकारी रेडिओ के बारे में है, दोस्तों आजकल सभी रेडिओ सुनत है लेकिन क्या आपको पता है कि रेडिओ का विकास कैसे हुआ? आखिर रेडिओ में अलग-अलग रेडिओ स्टेशन क्यों होते है? तो दोस्तों यह सब जानकारी आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से देने जा रहे है. तो आइये जानते है इन सारी बातोँ की जानकारी,

दोस्तों, सबसे पहले तो हम यह ज्ञात करते है की रेडिओ को कब और कैसे अस्तित्व में लाया गया और इसका महत्व क्या है तथा रेडिओ का प्रारंभ कब किया गया. इसके बारे में मनुष्य को कैसे पता चला? इसके बारे में जानकारी जाने.

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रेडिओ क्या है और रेडिओ के बारे में जानकारी:

A. रेडियो एक रेडियोएक्टिव तरंगों का उपयोग कर सिग्नल देने और संचार करने की तकनीक है.

B. रेडियो तरंगें 30 हर्ट्ज़ (Hertz) और 300 गीगाहर्ट्ज़ (गीगा) के बीच आवृत्ति की विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं.

C. वे एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण द्वारा उत्पन्न होते हैं जिसे एक एंटीना से जुड़ा ट्रांसमीटर कहा जाता है जो तरंगों को प्रसारित करता है और एक रेडियो रिसीवर द्वारा दूसरे एंटीना से जुड़ा होता है. (Vividh Radio station kyo hote hai – अलग-अलग रेडिओ स्टेशन)

D. रेडियो आधुनिक संचार, रडार, रेडियो नेविगेशन, रिमोट कंट्रोल, रिमोट सेंसिंग और अन्य अनुप्रयोगों में आधुनिक तकनीक में बहुत व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है.

 

RADIO में अलग-अलग रेडिओ स्टेशन क्यों होते:

आज की आधुनिक दुनिया में रेडिओ सन्देश प्राप्त करने का एक प्रभावी माध्यम बन चूका है. आजकल मोबाईल और टीवी में रेडिओ का प्रसारण होता है. दुनिया के किसी भी जगह पर कोई भी घटनाओ के बारे में हमे रेडिओ के माध्यम से पता चल जाता है.

आज रेडिओ के माध्यम से जानकारी का आदान-प्रदान करना बहुत सरल हो गया है. आजकल रेडिओ का उपयोग मनोरंजन के लिए भी किया जा रहा है. अनेक तरीके के संगीत, खेल और मनोरंजन के कार्यक्र यह सब हमको रेडिओ पर सुनने को मिलते है. रेडियो के माध्यम से बहुत सारे युवा-युवती को रोजगार का साधन निर्माण हो गया है. तो दोस्तों आइये सबसे फले जानते है की रेडिओ का विकास कैसे हुआ? और रेडिओ का कम कैसे चलता है?

 

रेडिओ का आविष्कार कैसे हुआ:

वैसे अगर देखा जाये तो रेडिओ के शोध का श्रेय किसी भी व्यक्ति को नही दे सकते है क्योकि बहुत सारे वैद्यानिको ने साथ में आकर जो प्रयास किये ये उनका फल है? फिर भी कुछ वैद्यानिक जीनोने रेडिओ के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जर्मनी के ट्रेनिच इर्ज़, इटली के गुश्लेल्मो मर्क्नी इनोने रेडिओ के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है. आज रेडिओ की जो सफलता है को सभी इन लोगो की वजह से है. तो दोस्तों यह कुछ रेडिओ के आविष्कार के बारे में बाते, अब थोड़ा उसके इतिहास पर नजर डालते है.

 

रेडिओ का अस्तित्व (इतिहास) क्या है:

1886 में जर्मन भौतिक विज्ञानी हेनरिक हर्ट्ज द्वारा रेडियो तरंगों की पहली पहचान की गई और उनका अध्ययन किया गया, इटैलियन गुग्लिल्मो मार्कोनी द्वारा 1895-96 के आसपास पहले व्यावहारिक रेडियो ट्रांसमीटर और रिसीवर विकसित किए गए थे, और 1900 के आसपास रेडियो का व्यावसायिक रूप से निर्माण होना शुरू हुआ.

19 वि सदी के सुरुवात में इंग्लैंड के महान वैद्यानिक मायकल फ्याराड़े इनोंने यह साबित करके बताया की अगर किसी wire से विद्युत् प्रवाह प्रवाहित किया जाये तो उस wire के आस पास चुम्बकीय क्षेत्र निर्माण होता है. यह प्रवाह जब निर्माण होता है तब एक प्रकार के विद्युत चुम्बकीय लहरे निर्माण करता है, यह विद्युत् चुम्बकीय लहरे बहुत दूर तक दुरी तय कर सकते है. इन लहरों का अध्यन सबसे पहले हर्ज़ नाम के वैद्यानिक ने किया, इसी कालावधि में मार्कोनी इस वैद्य्निक ने विद्युत् चुम्बकीय (इलेक्ट्रो मैग्नेटिक) लहरों को व्यावहारिक उपयोग में ला कर एक बिना wire का सेट तयार किया.

1904 में, सर जॉन एम्बोस ने पहला डायोड तय किया, इस डायोड में, एक कैथोड और एक प्लेट जब यह कैथोड इलेक्ट्रॉनों को निकालता है, तो प्लेटों को निर्देशित किया जाता है, या वे दिए गए निर्देशों के अनुसार आकर्षित होते हैं. 1906 में ली डी फारेस्ट इस वैद्यानिक ने पहिला ट्रायोड निर्माण किया, 1910 के आखिर में रेडिओ क्षेपक (ट्रांसमीटर) और रेडिओ ग्राहक (रिसीवर) का पूरी तरह विकास किया.

ट्रांसमीटर का काम यह होता है की रेडिओ स्टेशन में जो व्यक्ति बोलता है उसकी आवाज को विद्युत् चुम्बकीय लहरों में परिवर्तित करना, और रिसीवर का कम उन लहरों को प्राप्त करना होतो है.

 

रेडिओ सिग्नल कैसे प्राप्त होते है:

लेकिन दोस्तों, क्या आप जानते है की रेडिओ के सिग्नल हमको कैसे प्राप्त होते है? और रेडिओ में अलग-अलग रेडिओ स्टेशन क्यों होते है? आकाशवाणी के स्टूडियो में जब कोई व्यक्ति बोलता है तब उन के आवाज को माइक्रो फोन के जरिये विद्युत् लहरों में परीवर्तित किया जाता है ताकि उनको ज्यादा दूर तक ट्रांसमिट किया जा सके. और वहा उनको हाई फ्रीक्वेंसी वाली विद्युत् चुम्बकीय लहरों के साथ मिश्रित किया जाता है.

इन मिश्रित लहरों को modulated लहरे कहा जाता है. यह लहरे प्रसारण केंद्र के antenna के माध्यम से सभी दिशायो में प्रसारित किया जाता है. जब इन लहरों को प्रसारित किया जाता है उस वक्त इनकी फ्रीक्वेंसी तय की जाती है. जब हम रेडियो चालू करते है तब हम रेडिओ को जिस फ्रीक्वेंसी पर सेट करते है तब रेडिओ उसे ढूढ लेता है, और उस फ्रीक्वेंसी पर जो स्टेशन है वह हमको सुने देता है, और इस वजह से हम अलग-अलग स्टेशन के कार्यक्रम सुन सकते है.

दोस्तों आपके जानकारी के लिए बता दे की भारत में आकाशवाणी का प्रसारण 1936 को सुरु हुआ.

 

Author by: RITIK

 

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