Relgadi ka aavishkar kaise huaa – रेलगाडी का आविष्कार

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Relgadi ka aavishkar kaise huaa - रेलगाडी का आविष्कार

 

Relgadi ka aavishkar kaise huaa – रेलगाडी का अविष्कार कैसे हुआ:

Relgadi ke bare me jankari: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार हम आपको नई जानकारी से अवगत कराते है. तो दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में रेल्वे के इतिहास के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. आपको तो पता ही होगा की रेलगाडी याने क्या होती है? वह क्या काम करती है, और कैसी चलती है, यह सारी बाते तो आप सभी को पता ही है. दोस्तों, लेकिन कभी आपने यह सोचा है, इसका अविष्कार कैसे हुआ होगा, यह किस तरह काम करती होगी? क्या आप रेल्वे के बारे में जानते है, क्या आप रेलगाड़ी में भविष्य बनाना चाहते हो, और इसका उपयोग क्या है, रेल्वे में ऑफिसर कैसे बने (How to become a Railway officer), इन सारी बातोँ की जानकारी आज के लेख के माध्यम से हम ज्ञात कराते है.

रेलगाड़ी के प्रकार और उसके उपयोग के बारे में जानने से पहले आपको रेल्वे का महत्व और परिचय से वाक़िफ़ होना ज़रुरी है. इसलिए सबसे पहले हम रेलगाड़ी का परिचय कराते है.

 

रेलगाड़ी के बारे में जानकारी:

दोस्तों, कुछ शब्द ऐसे होते हैं, हम उनके लिए अलग शब्द बनाते हैं. लेकिन अर्थ वही होता है. जैसे रेलगाड़ी यह एक शब्द है जिसे दो तरीके के से विस्तृत किया जाता है. पुरातन वर्ष में रेल्वे भाप इंजन पर चलती थी इसलिए इसे आग गाड़ी कहना शुरू कर दिया. आज, अगर उसे एक इंजीनियर के रूप में देखा जाता है, तो हम अभी भी इसे आगगाडी कहते हैं, और अंग्रेजी शब्द में “रेलवे”

दोस्तों, क्या आप जानते है? सबसे पहले रेलगाड़ी कहा से चली थी? तो चलिए सबसे पहले यहा से ही सुरुआत करते है, सन 1825 में इंग्लैंड के staktan to daligtan यात्रा की थी. और उसकी गति 24 घंटे किलोमीटर, मतलब तेजी से जाने वाली साईकिल इतना थी. कुछ समय पछात सन 1990 में फ्रेंच के टीवीव्ही रेल ने गति पकड़ी, और वो 518 किलोमीटर वह 1 घंटे में याने हवाई जहाज इतना.

यह आविष्कार लोखंड के पटरी के कारण संभव हुआ था. जब भारत में रेल यात्रा शुरु हुई तब वह रेल ठाणे से बोरीबंदर इस मार्ग पर चली थी. जिस को 150 साल पुरे हो गए है. और भारत भर में रेल के माध्यम से आज देशभर में आना जाना सरल हुआ है. इतन ही नही बल्कि अनेक बड़े-बड़े शहरो में आना जाना रेल्वे के माध्यम सुरु हुआ है.

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रेलगाड़ी मार्ग की रचना:

भारत में सबसे ज्यादा कठिन मार्ग यानि कोंकण रेल मार्ग है. यह मार्ग बनाते समय बहुत ही बड़े पैमाने पर पुल बनाए गए है. और भारत में इतने पुल बहुत ही कम मिलेंगे. कुछ घाटी पार करते समय 210 फुट ऊँचाई से रेल गाडी जाती है. मतलब की वह पुल कुतुबमीनार इतना बड़ा है. रेल मार्ग बनाना यह बहुत ही कठिन बात है, यह कोंकण मार्ग देखकर ही समझ में आता है.

दोस्तों, रेल मार्ग बनाते हुए हर किलोमीटर पर आने वाला उच-निच भाग, और इसके ही साथ-साथ रेल पटरियों में फिसलने न पाए इसलिए यह पटरी रेल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है.

गाड़ी का पहिया और पटरी इनमे घर्षण नहीं होना चाहिए, और फिसलना नही चाहिए इसलिए, रेलमार्ग जमींन से थोड़े ऊँचे हिस्से पर रखा जाता है.

दोस्तों, रेल पटरी के उपर गिट्टी का इस्तेमाल करते है, और स्लीपर डालकर उसपर रेल पटरी पक्की की जाती है. इसके हर बात का फायदा, नुकसान इसी के कारण इंजन और अलग अलग डिब्बे बनाये जाते है. जगभर के महानगरो में सुरंग रेल का इस्तेमाल शतकों से किया जा रहा है.

 

जमीन के अंदर रेल्वे मार्ग:

शायद आप जानते होंगे की जमींन के अंदर 80 से 90 फूट गहरा सुरंग का रेलमार्ग बना है. दोस्तों, जैसे की कोलकाता में यह रेल मार्ग सुरु किया गया था. इने ही मेट्रो, सब-वे ऐसे नाम दिए गए है. दोस्तों, अपने देश की राजधानी दिल्ली में मेट्रो का इस्तेमाल देखा होगा. तथा अब हर महानगर पालिका मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए काम कर रही है. रेल गाड़ी के बारे में अगर हम एक शब्द में बताने जाये तो, जैसे एक साथ 3000 हजार आदमी बिना रुके एक जगह से दूसरी जगह जा सकते है. यह व्यवस्था हमारे लिए रेल गाडी के माध्यम से संभव हुई है. इस तरह की दूसरी सेवा हमारे ज़मीन पर नही है. और शायद ही भविष्य में होंगी,

 

Author By: Aparna

 

Inspection supervision:

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Use:- Freight, Passenger,

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