Space Hero ki Training kaise hoti hai – अंतरिक्षवीर की ट्रेनिंग

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Space Hero ki Training kaise hoti hai - अंतरिक्षवीर की ट्रेनिंग

 

अंतरिक्षवीर की ट्रेनिंग कैसे होती है – Space Hero ki Training kaise hoti hai

Space Hero kaise bane: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार की तरह आज भी हम आपको नई जानकारी से अवगत कराने जा रहे है. जो वर्तमान में Astronaut के नाम से प्रख्यात है. दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में अंतरिक्षवीर कैसे बने? अंतरिक्ष नायक कैसे बने? अंतरिक्ष यात्री कैसे बने? अंतरिक्षवीर की ट्रेनिंग कैसे होती है? अंतरिक्ष यात्री के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त करने के लिए आपने सही आर्टिकल का चयन किया है. हाँ प्रिय पाठक, आपके इन सरे प्रश्नों के समाधान इस आर्टिकल से अवगत होंगे, तो आइये जानते है अंतरिक्ष यात्री की ट्रेनिंग प्रक्रिया के बारे में,

अवकाशवीर के बारे में जानने से पहले हमें यह ज्ञात होना जरुरी है की अवकाशवीर यानि क्या होता है और इसका भविष्य से क्या तालुक है. तो आइये सबसे पहले अंतरिक्ष नायक का परिचय कराते है.

 

अंतरिक्ष नायक का पहला चरण:

18 मार्च, 1965 को रूस के अलेक्सी लियोनोव ने अपना पहला पैर नए विकास और अंतरिक्ष के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने की दिशा में लगाया. वोस्कोड -2 इस वाहन से पावेल बेलीयेव और अलेक्सी लियोनोव को 2 अवाकाशविरो को भेजने के लिए आया था. वोसखोद का अर्थ है “सूर्योदय”, इस विमानन के एक तरफ एक कक्ष बनाया गया था. वहां से निकलने का रास्ता था. तब लिओनोव्ह सबसे पहले उस जगह पर आये. फिर उन्होंने हमेशा के अवकाशयान के पोशाख के अलावा हवा का दाब रखता आएगा ऐसा पोशाख धारण किया था. फिर बाहर जाने का दरवाजा खोलकर उसने अवकाश में प्रवेश किया.

उस वाहन से 15 फुट लंबा तार जुड़ा हुआ था. वह उसके माध्यम से ही संपर्क में रहता था. अवकाश के दौरान पृथ्वी पर आना, हवा में उड़ना, और वहाँ चलने का आनंद अनुभव करने के बाद, वह अपने दरवाजे पर वापस चला गया. और थोड़ी सी पंचायत थी, एयर-टाइट सूट के साथ अंदर जाना मुश्किल था, पीछे से सिलेंडर, डोरी लगी हुई थी. सभी थोड़े देर के लिए खामोस रह गए लेकिन मन में जिज्ञासा और जूनून की वजह से कुछ देर पछात पहिले अवकाश भ्रमण की यशस्वी का नाम मानवी इतिहास में लिखा गया.

 

अंतरिक्ष यात्री बढ़ती संख्या:

दोस्तों, फिर ऐसा करते-करते अवकाशयान और अवकाश में प्रवास करने वालो की संख्या बढती गयी. पहिला अवकाश वीर युरी गगारिन, इसके बाद के 100 जन उनके हवाईदल के फाइटर जेट याने उन्हें वैमानिक कहा जाता था. जिस समय अवकाश स्थानक की स्थापना हुई और अपोलो और सोइझ में से तिन – तिन अवकाशावीर भेजे गए, तब प्रथम खगोल वैज्ञानिको को ही अवकाशयान में भेजने का सवाल सामने आया. एक कप्तान जो वैमानिक और किमान 2 बार अवकाश में गया है, ऐसा, दूसरा तंत्रज्ञ, जो अवकाशास्थानक की देखभाल कर सके, ऐसा तीसरा तंत्रज्ञ जो सिर्फ शास्त्रज्ञ, जो तरह-तरह के प्रयोग करके नया निष्कर्ष निकाल सके. ऐसे तिन-तिन की टीम भेजने की सुरुवात हुई.

 

अंतरिक्ष यात्रीओ का प्रशिक्षण:

फिर अवकाशवीरो को प्रशिक्षण देने की जरुरत पड़ने लगी. शास्त्रज्ञ और तंत्रज्ञ इनको वजनरहित अवस्था क्या है, लेकिन वैमानिक ज्ञान से इनके पास बहुत ही कम ज्ञान था. फिलहाल अवकाश में जाने वालो की पहले वैद्यकीय जाँच की जाती है. उसके बाद उसे शारीरिक क्षमता के परीक्षा के पड़ाव को पार करना पड़ता है. इसके बाद 3 महीने यंत्र, काम, अवकाश में करने काम, इनके बारे में प्रसिक्षण दिया जाता है. दोस्तों इस काल के ज़माने के बाद में “सिम्युलेटर” ट्रेनिंग सुरु की जाती है. (Antriksha yatri ki Training kaise hoti hai – Space hero kaise bane)

दोस्तों, अवकाश प्रवास करने के लिए उत्तम वैमानिक होना ही चाहिए, ऐसा नही है दोस्तों. अगर अपनी अच्छी तब्येत रही तो, और नशीब में होगा तो, कोई भी अवकाशभ्रमण करके आ सकता है.

 

अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना:

जो लोग अंतरिक्ष यात्री बनना चाहते हैं उन्हें शीर्ष शारीरिक स्थिति में होना चाहिए. प्रत्येक देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए स्वास्थ्य आवश्यकताएं होती हैं. वे आमतौर पर कुछ कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए एक उम्मीदवार की फिटनेस का आकलन करते हैं. उदाहरण के लिए, एक अच्छे उम्मीदवार में भारोत्तोलन की कठोरता को सहन करने और भारहीनता में कार्य करने की क्षमता होनी चाहिए. पायलटों, कमांडरों, मिशन विशेषज्ञों, विज्ञान विशेषज्ञों या पेलोड प्रबंधकों सहित सभी अंतरिक्ष यात्रियों को कम से कम 147 सेंटीमीटर लंबा होना चाहिए, अच्छी दृश्य तीक्ष्णता और सामान्य रक्तचाप होना चाहिए। उससे परे, कोई आयु सीमा नहीं है. अधिकांश अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षु 25 और 46 वर्ष की आयु के बीच के होते हैं, हालांकि कुछ वृद्ध लोग भी अपने करियर में बाद में अंतरिक्ष में चले गए हैं.

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अंतरिक्षवीर की ट्रेनिंग कैसे होती है:

इससे पहले कि वे अंतरिक्ष में उड़ सकें, अंतरिक्ष यात्रियों को सैकड़ों घंटे के प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है. यह तीन मुख्य वर्गों में विभाजित है.

सबसे पहले, नए लोगों को जो अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में अर्हता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें बुनियादी प्रशिक्षण का एक साल का कोर्स पास करना होता है. उम्मीदवार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विज्ञान, बुनियादी चिकित्सा कौशल और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के बारे में सीखते हैं. वे स्कूबा डाइविंग से भी परिचित हो जाते हैं.

इस पहले भाग के बाद, वे उन्नत प्रशिक्षण के एक और वर्ष पर जाते हैं. वे आईएसएस के विभिन्न भागों, प्रयोगों और परिवहन वाहनों और जमीनी नियंत्रण की भागीदारी के बारे में अधिक विस्तार से सीखते हैं.

फिर उन्हें एक मिशन को सौंपा जा सकता है. चालक दल के अन्य सदस्यों के साथ जितना संभव हो उतना काम करना, वे अपने मिशन के साथ जुड़े विशेष कार्यों के बारे में सीखते हैं और वे वजनहीनता के साथ परवलयिक उड़ानों से परिचित हो जाते हैं.

कई वर्षों के दौरान, अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, क्योंकि वे संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोप में प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा करते हैं. इसमें एक विदेशी भाषा सीखना शामिल हो सकता है – रूसी – (अंग्रेजी पहले से ही अनिवार्य है) और साथ ही मिशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों और विशेष गतिविधियों के बारे में जानने के लिए.

 

Author by:- APARNA

 

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