suspension system ke prakar – सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार

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suspension system ke prakar - सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार

 

सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार (Types of suspension system) पूरी जानकारी:

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में फिर आपका स्वागत है, दोस्तों आज हम आपके लिए सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार के बारे में जानकारी लेकर आये है, और इसी पर हम सम्पूर्ण जानकारी हासिल करेंगे, क्योंकि दोस्तों पिछले लेख में हमने सस्पेंशन सिस्टम की पूरी जानकारी प्राप्त की है. और आज के इस लेख में उसी के प्रकार तथा उपयोग (कार्य) के बारे में जानेंगे,

तो आइये जानते है, Types of Suspension system, कन्वेंशनल लीफ स्प्रिंग (Conventional Leaf Spring system), इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम (Independent Suspension System), हाइड्रो स्टेटिक सस्पेंशन सिस्टम (Hydrostatic suspension system), और एयर सस्पेंशन सिस्टम (Air suspension system), के बारे में. जी हाँ दोस्तों आज के इस लेख में, हम आपको सस्पेंशन सिस्टम और इनके प्रकार बारे में विस्तृत जानकारी देंगे.

 

सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार (Types of suspension system):-

1. कन्वेंशनल लीफ स्प्रिंग – Conventional Leaf Spring system.

2. इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम – Independent Suspension System.

3. हाइड्रो स्टेटिक – Hydrostatic suspension system.

4. एयर सस्पेंशन सिस्टम – Air suspension system.

5. रबर स्प्रिंग सस्पेंशन सिस्टम – Rubber Spring Suspension System.

 

Conventional Leaf Spring ki jankari:-

कन्वेंशनल लीफ स्प्रिंग इस तरह के लीफ स्प्रिंग में स्टील के बने पत्ते होते है, पुराणी गाडियों में लीफ स्प्रिग के पांच से लेकर सात पत्ते तक लगाया करते थे पर नए कारो में अब ये एक ही पत्ता लगाते है. इस पत्ते के सेंटर में एक बोल्ट के  द्वारा एक दूसरे से बंधे होते है, इसमें सबसे उपर वाले लीफ को घुमाया जाता है, और सारे पत्ते को एक दुसरे के साथ V clamp में बांध दिए जाते है.

 

इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम की जानकारी:-

जैसा कि आप जानते हैं, लीफ स्प्रिंग बिच में एक्सेल के साथ बंधे होते है, और उनके दोनों कोने चेसिस के साथ बंधे होते है, और इस कारण गाड़ी चलाते समय गाड़ी का एक पहिया कभी किसी पत्थर पर या किसी टीले पर चढ़ जाये तो एक्सेल दूसरी और से झुक जाती है. जैसा की आपने कभी तेजी से गाड़ी लेफ्ट या राईट मुड़ते वक्त महसूस किया होंगा, इसलिए इन खामियों को दूर करने के लिए, इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया गया है.  (suspension system ke prakar/type)

इस सिस्टम में एक पहिया उपर उठने पर दुसरे पहिये पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही इसके बॉडी पर कोई फरक पड़ता है. जैसे गाडी सड़क पर चलती है ठीक वैसे ही मोड़ आने पर भी लेवल में ही रहती है, इसलिए वाहनों में इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम (Independent Suspension System) का उपयोग किया जाता है.

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हाइड्रो स्टेटिक (Hydrostatic suspension system) का उपयोग:-

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए हम बता दे की यह सिस्टम हमारे देश में प्रयोग में नहीं लायी जाती, यह प्रणाली हमारे देश के बाहर दुसरे देशो में अधिक प्रचलित है, यह सिस्टम एक ऑयली पदाथो को दबाने के लिए प्रयोग में लायी जाती है.

इस सिस्टम में चार यूनिट चार पहियों पर लगे रहते है, और आपस में एक पाइप के व्दारा जुड़े रहते है, गाड़ी चलते वक्त कभी गाड़ी का एक पहिया उपर की और उठ जाये तो इसमे लगे यूनिट के कारण, इसके अन्दर ऑयली पदार्थ प्रेस होकर दुसरे यूनिट में पहुच जाता है. जिसके कारण गाड़ी लेवल पर रहती है, इस तरह की सस्पेंशन सिस्टम BMC कार में दिखाई देती है. डायफ्राम के उपर लगा हुआ पूरा यूनिट ऑयली पदाथो से भरा रहता है, और उसे यह लीक भी होने नहीं देता, जबकि निचे का हिस्सा काफी मजबूत बना रहता है.

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एयर सस्पेंशन सिस्टम (Air suspension system) का उपयोग:-

एयर सस्पेंशन सिस्टम यह भी हाइड्रो स्टेटिक सस्पेंशन सिस्टम की तरह ही विदेशो में काफी प्रचलित है. इस सिस्टम में कंप्रेस्ड हवा एक यूनिट में उपर की और भरी रहती है जिसे हम एक चेंबर भी कहते है, जिसके कारण  डायफ्राम और हाइड्रोलिक प्रेशर व्दारा इस हवा का प्रेशर कम या ज्यादा किया जा सकता है.

डायफ्राम यह हाइड्रोलिक आयल और कंप्रेस्ड हवा के चेम्बर इनके बिच में लगा रहता है, और हाइड्रोलिक आयल सबसे निचे की और फिट जाता है, जब जब गाड़ी का पहिया निचे उपर उठता है. तब तब पिस्टन भी निचे उपर होते रहता है, जिसके कारण सिलेंडर के अन्दर का आयल प्रेशर भी कम ज्यादा होते रहता है, जब जब आयल प्रेशर बढ़ता है तब तब डायफ्राम को उपर की और उठता है. (suspension system ke prakar/type)

परिणाम स्वरुप कंप्रेस्ड की हुई हवा को और दबाता है, और जब प्रेशर कम होते रहता है, तब पिस्टन निचे की और जाने पर कंप्रेस्ड की गयी हवा को और दबाता है. कंप्रेस्ड की गयी हवा हाइड्रोलिक आयल को निचे की और धकेल देती है, और इसी तरीके से पूरा यूनिट अपना अपना कार्य करते रहता है.

 

रबर स्प्रिंग सस्पेंशन सिस्टम (Rubber Spring Suspension System):-

रबर स्प्रिंग सस्पेंशन सिस्टम इस तरह की सिस्टम भी भारत से ज्यादा विदेशो में काफी प्रचलित है. इसका मुख्य कारण यह है की यह सिस्टम को लगाते समय जगह कम लेती है, इस तरह की सिस्टम काम करने में बहुत ही कारगिल साबित होती है. जब कभी गाड़ी सड़क पर चल रही हो और इस बिच कभी गाड़ी का पहिया पत्थर के उपर से हो कर गुजर जाये तो रबर स्प्रिंग सस्पेंशन सिस्टम में किसी भी तरह की कोई आवाज पैदा नहीं करती, और तो और यह वजन में औरो की तुलना में हलकी होती है. (suspension system ke prakar/type)

इस तरह के सिस्टम में दो रबर के खोकले पाइप बिच में फिट किये जाते है, उपर वाली डिस्क उपर वाली आर्म्स के साथ फिट की जाती है, और निचे वाली डिस्क निचे वाली आर्म्स के साथ फिट की जाती है. इस तरह से यह सिस्टम अपना कार्य पुरे आसानी से पूरा करती रहती है.

 

Author by: Prashant

Hydrostatic suspension

Inspection supervision:

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