suspension system ki servicing kaise kare – सस्पेंसन सिस्टिम का मेंटेनन्स

सस्पेंसन सिस्टिम का मेंटेनन्स कैसे करे. suspension system ki servicing kaise kare, लीफ स्प्रिंग की देखभाल कैसे करे (Maintenance of leaf spring), लीफ स्प्रिंग की जानकारी (leaf spring ki jankari), सस्पेंसन सिस्टिम की सर्विसिंग.

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suspension system ki servicing kaise kare – सस्पेंसन सिस्टिम का मेंटेनन्स:

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में आप सभी का स्वागत है, दोस्तों जैसा की पिछले लेख में आपने सस्पेंशन प्रणाली, उसके प्रकार और लीफ स्प्रिंग के बारे में जानकारी प्राप्त की थी. तथा उसी लेख को पूरा करते हुए लीफ स्प्रिंग की देखभाल कैसे करे (Maintenance of leaf spring) इस बारे में जानकारी हासिल करेंगे, उम्मीद करते है की आप इस लेख को भी उतना ही पसंद करेंगे. जितना पहले के लेख को पसंद किया, तो दोस्तों आइये जानते है सर्विसिंग के बारे में.

प्रिय पाठक, क्या आप ऑटोमोबाइल के गाडियों में प्रयोग होने वाले लीफ स्प्रिंग की देखभाल कैसे करे (Maintenance of leaf spring) इस बारे में जानते है? क्वाइल स्प्रिंग के फायदे (Benefits of Coil Spring) क्या है? लीफ स्प्रिंग की देखरेख (leaf spring ki dekhrekh) ऐसे अन्य सवाल के जवाब आज के लेख में प्रकाशित करने जा रहे है.

 

लीफ स्प्रिंग की देखभाल कैसे करे (Maintenance of leaf spring):-

दोस्तों, आपके जानकारी के लिए बता दे की, लीफ स्प्रिंग चलने में तो कई सालो तक चलती रहती है, लेकिन इसके रिपेयरिंग का तरीका भी बहुत आसान होता है, गाडियों के अन्दर जरुरत से अधिक सामान लोड कर देते है, और जब कभी ड्राईवर गाड़ी चलता है तो, लीफ स्प्रिंग सस्पेंशन रफ ड्राइविंग करते समय गाडियों में रखे अधिक बोझ के कारण लीफ स्प्रिंग टूट जाते है, जिसके कारण लीफ असेंबली निचे उतारकर खोलना पड़ता है.

उसका सेंटर बोल्ट खोलने पर इसमें साइड में लगा हुआ U क्लिप खोलने पर आप देखेंगे की लीफ पट्टे अलग अलग टूटे हुए दिखाई देंगे, इन लीफ पट्टे को बदलकर नया लीफ पट्टा फिट किया जाता है, और इस पट्टे के बिच में ग्रीस गन कि सहायता से लुब्रीकेंट्स किया जाता है. फिर जिस तरह से लीफ असेंबली को खोला गया था उसी तरीके से वापस फिट भी किया जाता है.

गाड़ी जब सड़क पर चलती है, तो उसे कई झटको से होकर गुजरना पड़ता है, इसी झटको के कारण कभी कभी लीफ स्प्रिंग असेंबली अधिक समय तक प्रयोग में लाने से या जरुरत से ज्यादा अधिक बोझ उठाने के कारण लीफ असेमबली सीधी पड़ जाती है, जिसके वजह से इसे फिर खोलकर हतोड़े की सहायता से इसे पिट पिट कर गोलाकार आकर दिया जाता है, और फिर इसे उपयोग में लाया जाता है, इसका इलास्टिसिटी (Tension) सही है या नहीं चेक किया जाता है.

 

लीफ स्प्रिंग की देखरेख (leaf spring ki dekhrekh):-

1. गाड़ी चलाने से पहले, गाड़ी एक साइड झुकी है या नहीं यह चेक कर लेना चाहिए.

2. स्प्रिंग टूटी है या नहीं इसे चेक करना चाहिए.

3. स्प्रिंग की पकड़ मजबूत है या नहीं यह चेक करना चाहिए.

4. लीग स्प्रिंग का शेकल एक साइड लगा है या दोनों साइड इसे भी चेक करना चाहिए.

5. अगर कभी शेकल टुटा हो तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए, नहीं तो टायर घिसेंगे और एक्सीडेंट होने का खतरा भी बना रहेंगा.

6. जब कभी लीफ का एक पट्टा टूट जाये तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए, नहीं तो बाकी पट्टे पर अधिक भार आ जायेंगा और अधिक भार आने के परिनाम स्वरुप बाकी पट्टे भी टूट सकते है,

7. स्प्रिंग के उपर या चेसिस के निचे जो रबर के बफर लगे रहते है, इनको चेक करते रहना चाहिए.

8. अगर यह टूट जाये तो स्प्रिंग चेसिस के साथ टच करेंगा और चेसिस ख़राब कर सकता है.

9. फ्लेट स्प्रिंग को चेक करते रहना चाहिए, अगर यह जम्पिंग करता है तो गाड़ी की चेसिस को टच करके इसे ख़राब कर सकता है.

10. और इसके कारण पट्टे टूट सकते है, इसलिए इसे लुब्रीकेंट्स करे और चेक करते रहे.

11. हेल्पर लीफ स्प्रिंग को हमेशा चेक करते रहना चाहिए, अगर कभी खाली गाडी को टच करता है, और लीफ स्प्रिंग के पट्टे कमजोर हो गए हो, तो उसे तुरंत बदल दे या फिर बाँध दे.

12. अगर कभी लीफ स्प्रिंग का पट्टा अच्छे कंपनी का न होकर लोकल हुआ तो यह जल्दी टूट जायेंगा. इसलिए हमेशा उच्च दर्जे का लीफ पट्टा लगवाना चाहिए.

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लीफ स्प्रिग सस्पेंसन सिस्टिम का मेंटेनन्स:

13. लीफ स्प्रिग की मेन ऑय हमेशा चेक करते रहना चाहिए, इसे कभी लूझ होने न दे.

14. कभी कभी गाड़ी अधिक चलने के कारण मेन ऑय स्प्रिंग खुल जाती है, इस स्तिथि में उसे जल्द से जल्द टाइट कर देना चाहिए,

15. अगर कभी ऐसा हुआ तो गाड़ी चलाते समय आवाज आएँगी, गाड़ी एक साइड खिची जाएँगी और तो और स्प्रिंग मे लगा हुआ बुश या पिन भी टूट सकता है,

16. गाड़ी चलाते समय कभी भी आराम से चलानी चाहिए.

17. कई बार ड्राईवर गाड़ी जल्दी चलाने के कारण गाड़ी का एक्सेलेटर जल्दी बढा देते है, जिसके कारण स्प्रिंग पर जोर का झटका लगता है, जिससे स्प्रिंग टेढ़ी हो जाती है,

18. ज्यादा और जल्दी ब्रेक मारने के कारण भी स्प्रिंग टेढ़ी हो जाती है, इस स्तिथि में स्प्रिंग ओपन ओरिजिनल शेप को बैठती है, ऐसे स्पिंग को बदल देना चाहिए.

19. स्प्रिंग के अन्दर लगे बुश को चेक करना चाहिए. अगर बुश घिस जाये तो उससे आवाज आना सुरु हो जाता है.

20. जब लीफ स्प्रिंग ढीली होती है, तो केंद्र में बोल्ट ढीला हो जाता है और घिस कर लीफ का पट्टा कमजोर हो सकता है. जिसके कारण स्प्रिंग को बहुत अधिक बोझ उठाना पड़ सकता है.

21. यदि तेज गति से वाहन चलाते समय पट्टा टूट जाता है, तो दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है.

 

क्वाइल स्प्रिंग के फायदे (Benifits of Coil Spring):-

A. क्वाइल स्प्रिंग वजन में हमेशा हल्के होते है,

B. लीफ स्प्रिंग से छोटे आकार की होकर कम जगह लेते है.

C. इन स्प्रिंग का डिजाईन काम्पेक्ट होता है,

D. इस तरह के स्प्रिंग मे कभी घर्षण निर्माण नहीं होता.

E. काम करने में अच्छे साबित होते है,

F. इनका शेप राउंड की तरह गोलाकार होता है,

G. इसलिए यह शॉक अब्सोर्बर में उपयोग में लाया जाता है.

 

Author by: Prashant

 

Inspection supervision:

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Benefits of Suspension system: वाहन का अधिक लोड सहन करना. आराम प्रदान करना,

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यह आर्टीकल जरूर पढ़े…

1. सस्पेंशन सिस्टम की जानकारी

2. सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार

3. व्हील बैलेंसिंग कैसे करे

4. टायर की लाइफ कैसे बढ़ाये

 

हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा है क्योंकि आपने जाना है की suspension system ki servicing kaise kare – Leaf spring ki servicing kaise kare और यदि आपको इस लेख से कुछ मदद मिलती है, तो इसे अपने मित्रों तथा ज़रूरतमंद व्यक्ति को साझा करें ताकि हम भी इन लेखों को लिखना जारी रख सकें,

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