Telescope ke bare me jankari – टेलीस्कोप के बारे में जानकारी

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Telescope ke bare me jankari – टेलीस्कोप के बारे में जानकारी:

Telescope ki paribhasha kya hai: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार हम आपको नई जानकारी से अवगत कराते है. तो दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में Telescope के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. क्या आप टेलीस्कोप के बारे में जानते है, इसका उपयोग क्या है, (Telescope ke bare me jankari), दोस्तों क्या आपको पता है की, दुर्बीन याने क्या होता है? यह किस तरह काम करता है? इन सारी बातोँ की जानकारी आज के लेख के माध्यम से हम ज्ञात करते है.

दोस्तों, मुझे आशा है कि यह लेख आपको पसंद आएगा, और हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि यह लेख आपको कैसा लगा.

आज हम आपको जो जानकारी देने जा रहे है वह जानकारी टेलीस्कोप/दुर्बीन के बारे में है. दोस्तों क्या आप जानते है की टेलीस्कोप क्या है? उसकी रचना किस प्रकार की होती है? उसका शोध किसने लगाया? तो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में इन सब के बारे में बताने जा रहे है. तो दोस्तों आइये जानते है.

टेलीस्कोप और उसके उपयोग के बारे में जानने से पहले आपको टेलीस्कोप का बेसिक महत्व और परिचय से वाक़िफ़ होना ज़रुरी है. इसलिए सबसे पहले हम टेलीस्कोप क्या है इसके बारे में जानते है.

 

टेलीस्कोप का परिचय:

टेलिस्कोप एक ऑप्टिकल उपकरण है जो लेंस या घुमावदार दर्पण और लेंस की व्यवस्था का उपयोग करके दूर की वस्तुओं को बड़ा करता है, या विभिन्न उपकरणों का उपयोग उनके उत्सर्जन, अवशोषण या विद्युत चुम्बकीय विकिरण के प्रतिबिंब द्वारा दूर की वस्तुओं का निरीक्षण करने के लिए किया जाता है. पहली ज्ञात व्यावहारिक दूरबीनें ग्लास लेंस का उपयोग करके, 17 वीं शताब्दी की शुरुआत में नीदरलैंड में आविष्कार किए गए दूरबीनों को अपवर्तित कर रही थीं. उनका उपयोग स्थलीय अनुप्रयोगों और खगोल विज्ञान दोनों के लिए किया गया था.

 

टेलीस्कोप क्या है?

टेलीस्कोप की मदद से हम चीजों को दूर से आसानी से देख सकते हैं. टेलीस्कोप की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है. टेली का अर्थ है दूर देखना और स्कोपिन का अर्थ है देखना. अर्थात्, दूर की चीजों को अनायास देखना और जिस यंत्र के साथ यह देखा जाता है वह दूरबीन है.

टेलीस्कोप/दुर्बीन के मुख्य दो प्रकार होते है. पहला ऑप्टिकल और दूसरा रेडिओ. ऑप्टिकल टेलीस्कोप के भी दो प्रकार है पहला रिफ्राक्टिंग और दुसरा रिफ्लेक्टिंग.

 

टेलीस्कोप की रचना जानिए:

रिफ्राक्टिंग टेलीस्कोप में एक खली नळी में हर छोर पर एक एक लेंस लगा होता है. उस नळी के साथ लेंस हिलने लगते है. object की ओर रखे हुए लेंस को कहा जाता है और निरीक्षक (आब्जर्वर) की ओर जो लेंस होता है उसे ऑय पिस कहा जाता है. object की ओर से आने वाली किरने यह objective लेंस पर गिरती है और objective लेंस उसकी एक बडाई हुई प्रतिमा तयार करती है और निरीक्षक (observer) करने वाली व्यक्ति यह उस प्रतिमा को ऑय पिस लेंस का जरिये उसे देखती है.

यह जानकारी हो गयी ऑप्टिकल टेलीस्कोप के बारे में, अब थोड़ा रेडिओ टेलीस्कोप के बारे में भी जानते है. तो दोस्तों रेडिओ टेलीस्कोप में आकाशीय पिंडो से आने वाली रेडिओ तरंगो को मेटल से बने हुए एक बड़े आईने पर प्राप्त करके इलेक्ट्रॉनिक यंत्र के माध्यम से बाद में उसका आध्ययन किया जाता है. objective लेंस के डायमीटर के उपर से टेलीस्कोप का आकर निश्चित किया जाता है. जितना बड़ा डायमीटर उतने ही अधिक प्रमाण पर टेलीस्कोप से दूर की चीजे दिखने लगती है.

 

टेलीस्कोप का आविष्कार:

दोस्तों, इस प्रकार टेलिस्कोप और उससे जुडी जानकारी आपने तो जान लीं. लेकिन क्या आप जानते है की पहला टेलीस्कोप किसने तयार किया और कब तयार किया, तो चलीये थोडा इससे भी परिचय करते है. साल 1608 में होलंड के होन्स लिपरागे इसने विश्व की सबसे पहला टेलीस्कोप तयार किया लेकिन उसे इसमें सफलता प्राप्त नही हुई. लेकिन जब प्रसिद्ध इटालियन वैज्ञानिक Galileo इसको जब यह बात पता चली तब उसने साल 1609 में एक अलग ही प्रकार के टेलीस्कोप तैयार करके दिखाया. और विश्व का पहला टेलीस्कोप बनाने का श्रेय प्राप्त किया.

Galileo का टेलीस्कोप भलेही दिखने में पेचीदा था लेकिन लिपरागे के टेलीस्कोप से 33 गुना ज्यादा बड़ी वस्तुए नजर आती थी. इस टेलीस्कोप की मदत से Galileo ने चंद्र का पृष्ठ भाग, शनि गृह की वलये, आकाशगंगा ऐसे अनेक आकाशीय पिंडो का अध्ययन किया. उसके बाद अनेक प्रकार के टेलीस्कोप के आविष्कार हुए.

बाद में अनेक देशो ने टेलीस्कोप में विकास करते गए. अमेरिका के माउन्ट पालोमर यह 200 इंच डायमीटर की रेफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप 1928 में बनाई. रशिया ने भी 234 इंच की रेफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप तयार की. विश्व में यह दो टेलीस्कोप सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप माने जाते है. ग्रह और तारे इनके अध्ययन के लिए यह टेलीस्कोप अत्यंत उपयुक्त है.

 

टेलीस्कोप का उपयोग:

टेलीस्कोप का उपयोग पेशेवरों द्वारा केवल आकाशीय वस्तुओं का अध्ययन करने के लिए किया जाता था, लेकिन समय बीतने के साथ, लोगों ने खगोल विज्ञान का आनंद लेने के लिए दूरबीनों को खरीदना शुरू कर दिया. लोगों ने खगोल विज्ञान को एक शौक के रूप में अनुकूलित किया और वे आकाश में दूर की वस्तुओं को देखकर मोहित हो गए. लोग हमेशा उस जगह को देखने के लिए मोहक हो जाते हैं जहां वे रहते हैं;

आज हम सभी दूरबीन द्वारा प्रदान किए गए लाभों को जानते हैं. विभिन्न आकाशीय वस्तुओं की संभावनाएं, जिन्हें आप दूरबीन का उपयोग करके देख सकते हैं, अनंत हैं. आप चांद, तारे, ग्रह आदि देख सकते हैं. आप चांद पर आने वाले गड्ढों को आसानी से देख सकते हैं. इसके अलावा, आप टेलीस्कोप का उपयोग करके रात में तारों की चमक की भी जांच कर सकते हैं. आप नक्षत्रों का पता लगा सकते हैं या उनका अध्ययन कर सकते हैं क्योंकि उनका हमेशा कुछ पौराणिक महत्व होता है.

 

Author by: RITIK

 

Inspection supervision:

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