Tyre ke prakar aur jankari – टायर के प्रकार Guide in Hindi

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Tyre ke prakar aur jankari - टायर के प्रकार

 

Tyre ke prakar aur jankari – टायर के प्रकार:

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com पर आपका स्वागत है, दोस्तों, इस लेख से पहले, हमने आपको पिछले लेख में टायर की जानकारी के बारे में बताया था, आज हम उसी लेख को आगे बढ़ाते हुए टायर के प्रकार के बारे में जानकारी देंगे, उम्मीद है कि आप इस लेख को पहले के लेख जितना ही पसंद करेंगे, क्योंकि हमारा यही प्रयास है की आप तक सही और बेहतर जानकारी पंहुचा सके.

तो आइए जानते हैं ऑटोमोबाइल में इस्तेमाल होने वाले टायर के प्रकार के बारे में. (Tyre ke prakar) क्या आप हाई प्रेशर टायर क्या है यह जानते है? क्या आप (low pressure Tyre kya hai यह जानते है? क्या आप एक्स्ट्रा लो प्रेशर टायर क्या है (extra low pressure Tyre kya hai) और क्या आप टायरों के साइज़ (Size Of Tyre) के बारे में जानते है? अगर नहीं जानते और जानना चाहते है तो आप सही आर्टिकल पढ रहे है. जी हाँ दोस्तों आज के इस लेख में, हम आपको टायर और उसके प्रकार के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे, और जानेंगे की कैसे टायर और उसके साइज़ बहुत ही ज़रुरी और लाभकारी होती है.

 

टायर का परिचय:-

दोस्तों आपको मालूम होंगा की, पुराने ज़माने में गाडियों में बैठें यात्रियों को पथरो के बिच में गाड़ी का पहिया आने से, झटके लगने लगे, इन झटको और वाइब्रेशन को रोकने के लिए इन पहियों पर सॉलिड रबर के बने रिंग चढायें गए, क्योंकि रबर थोडा नरम होता है, इसलिए कुछ झटके कम हो गए, लेकिन जैसे ही गाड़ी की स्पीड अधिक बढायें तब यह झटके फिर आना सुरु हो जाते थे और साथ ही साथ वाइब्रेशन, और आवाज भी आने लगती थी, कुछ समय बाद यह पहिये मोटर गाडियों में लगाना बंद कर दिए और छोटे बच्चो के गाडियों में लगाना सुरु किया गया.

 

न्युमाटिक टायर का प्रयोग (use of pneumatic tyre):-

दोस्तों आपके जानकारी के लिए थोड़ा हम पिछले आर्टिकल के बताये गए पॉइंट को डिस्क्राइब करते है. हमारे वाहनों में जो टायर फिट किए जाते हैं, वे सभी वायवीय टायर होते हैं, जिनका उपयोग सभी प्रकार के दो पहिया और चार पहिया वाहनों और एक ही प्रकार के वायवीय टायर में एक ही प्रकार के वाहनों में किया जाता है, पहली बार 1920, वायवीय टायर्स का उपयोग किया गया था और आज तक इस प्रकार के टायर को सभी प्रकार के ऑटोमोबाइल में स्थापित किया जाता है,

दोस्तों आप तो जानते ही है कि टायर का उपयोग सभी प्रकार की कारों में किया जाता है, तथा इसके दो भाग होते हैं, एक भाग बाहर होता है, जिसे टायर कहा जाता है, और दूसरा हिस्सा जो अंदर है, उसे ट्यूब कहा जाता है, इस ट्यूब के अंदर हवा भरी होती है ताकि आपके वाहन का पूरा भार या भार सहन करने की क्षमता बढे, और इसके साथ ही बाहर का टायर का हिस्सा मदद करता है. इस तहर आपने पिछले लेख में टायर का महत्व जाना है. तो आइये इसके प्रकार के बारे में थोडा विस्तार से जानते है.

 

टायर के प्रकार:-

1. हाई प्रेशर (high pressure)

2. लो प्रेशर (low pressure)

3. एक्स्ट्रा लो प्रेशर (extra low pressure)

 

हाई प्रेशर (high pressure):-

हाई प्रेशर टायर काफी सालो से इन टायरों का उपयोग प्रचलन में है, और अभी भी इन टायरों का उपयोग बड़ी बड़ी गाडियों में प्रयोग किया जाता है, दोस्तों आपको मालूम होंगा की, टायरों में अधिक हवा भरने के कारन सड़क पर चलते समय गाडियों में झटके अधिक लगते है, और इसी कारन से इन झटको को जज नहीं कर पाते, मगर यह टायर रोड पर चलते समय रोड के साथ इनका contact कम होने के कारण स्टेअरिंग घुमाने में आसानी होती है.

 

लो प्रेशर (low pressure):-

दोस्तों आपको बता दे की, लो प्रेशर टायर मोटर कारो में प्रयोग में लाये जाते है, इसका कारण यह है की टायर छोटी मोटी रास्तो पर, ख़राब सडको पर, उंच नीची रास्तो पर अपने आप एडजस्ट करके जज कर लेती है, और इसके साथ साथ सड़क पर चलते समय, टायर और सड़क का contact area अधिक होने के कारण, यह टायर सड़क पर फिसलते नहीं है. रोड और टायर का contact ज्यादा होने के कारण स्टेअरिंग में भारी पना आ जाता है, जिसके कारण गाड़ी को राईट या लेफ्ट की ओर घुमाने में अधिक ताकत लगानी पड़ती है, जिससे ड्राईवर को गाडी चलाने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, पर एडवांस टेक्नोलॉजी के प्रयोग के कारण स्टारिंग की डिजाईन चेंज करके इस तरह के पुराणी स्टेयरिंग को हटा दिया गया है, और इसकी जगह पावर स्टेयरिंग का उपयोग किया गया है.

 

एक्स्ट्रा लो प्रेशर (extra low pressure):-

एक्स्ट्रा लो प्रेशर टायर को बैलून टायर भी कहते है, इस तरह के टायर ये चौड़ाई से काफी मोटे होते है, और इन टायरों में हवा भी जरुरत के हिसाब से कम ही भरी जाती है, यह टायर विशेष तरह के बनाये जाते है, यह टायर रेती वाले जगहों पर बहुत ही कारगल साबित होते है, ओर तो ओर आज कल तो इस टायर का उपयोग रेसिंग गाडियों में बैलून टाइप टायर का ही प्रयोग में लाये जताए है, क्योंकि इस तरह के टायर सड़क पर चलते समय रोड और टायर का contact अधिक होता है, और इसी कारण गाड़ी टर्न लेते समय स्लिप नहीं मारती,

इस तरह के विशेष गाडियों में विशेष प्रकार की hydraulic स्टेयरिंग ही प्रयोग में लायी जाती है, जिससे टायर और सड़क की कांटेक्ट जादा होने के कारण भी आसानी से राईट और लेफ्ट की घुमाये जा सकते है, और तो और ट्रैक्टर में भी इन्ही टायरों का उपयोग होता है, जिसे हम एक्स्ट्रा लो प्रेशर टाइप टायर कहते है.

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टायरों के साइज़ (Size Of Tyre):-

हर टायर पर उनका एक अलग साइज़ लिखा हुआ होता है, जो लग अलग होता है, १. टायर पर लिखा होता है, ८.२५-२०-१० PR इसका मतलब टायर शोल्डर से शोल्डर तक ८.२५ इंच चौड़ा है, और इसके बीड से बिड तक २० इंच का डायमीटर है, १० pr का अर्थ होता है, टायर के अन्दर १० प्लाई लगे है, इन टायर में जितनी अधिक प्लाई लगी रहती है, उतनी ही अधिक यह वजन उठाने की शक्ति भी रखती है, पर यह ध्यान रहे की ज्यादा प्लाई के कारण टायर हार्ड और सकत हो जाता है, जिसके कारण यह रोड पर सॉक्स अब्सोर्ब नहीं कर पाता.

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Author by: Prashant

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Inspection supervision:

Overview:- Tyre ke prakar aur jankari – टायर के प्रकार (solid Tyre ke bare me jankari).

Name:- न्युमाटिक टायर का उपयोग कैसे करे.

Benefits of Tyre: वाहन का अधिक लोड सहन करना. वाहन को स्थलांतर करना,

Type of Tyre: solid Tyre, Pneumatic Tyre, high-pressure, low-pressure, extra-low pressure

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हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा है क्योंकि आपने जाना है की Tyre ke prakar aur jankari – Tyre ke bare me jankari और यदि आपको इस लेख से कुछ मदद मिलती है, तो इसे अपने मित्रों तथा ज़रूरतमंद व्यक्ति को साझा करें ताकि हम भी इन लेखों को लिखना जारी रख सकें,

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