wheel balancing kaise kare – व्हील बैलेंसिंग कैसे करे Guide In Hindi

व्हील बैलेंसिंग कैसे करे. wheel balancing kaise kare, व्हील बैलेंसिंग के फायदे. wheel balancing ke fayde, टायर की लाइफ कैसे बढ़ाये (Tyre ki life kaise badhaye), व्हील बैलेंसिंग के प्रकार (types of wheel balancing), व्हील अलाइमेंट क्या है और कैसे करते है.

wheel balancing kaise kare - व्हील बैलेंसिंग कैसे करे

 

wheel balancing kaise kare – व्हील बैलेंसिंग कैसे करे:

नमस्कार दोस्तों, apnasandesh.com में फिर एक बार आप सभी का स्वागत है, दोस्तों इसके पहले भी हमने टायर की लाइफ बढ़ाने के बेसिक टिप्स जाने है. और हम आशा करते हैं कि आपने यह लेख अवश्य पढ़ा होगा, क्योंकि इस लेख को जानने के बाद ही आप सही से टायर के महत्व और लाइफ के बारे में जान पाएंगे, और यह जानने के बाद आप व्हील बैलेंसिंग के बारे में अधिक समज पाएंगे, क्योंकि इस लेख में हम पहिये की व्हील बैलेंसिंग (wheel balancing) कैसे करते है, इस बारे में जानकारी देंगे, और हमें उम्मीद है की आप इस लेख को भी उतना ही पसंद करेंगे, जितना पहले के लेख को पसंद किया, तो चलिए दोस्तों देर न करते हुए जानते है व्हील बैलेंसिंग प्रोसेस के बारे में.

दोस्तों, इस लेख में गाडियों में प्रयोग होने वाले पहिये के व्हील बैलेंसिंग (wheel balancing), व्हील बैलेंसिंग के फायदे (wheel balancing ke fayde) टायर की लाइफ कैसे बढ़ाये (Tyre ki life kaise badhaye), व्हील बैलेंसिंग के प्रकार (types of wheel balancing) और wheel alignment के बारे में जानकारी, तथा टायर की व्हील बैलेंसिंग और wheel alignment इसके बारे में विस्तृत जानकारी देंगे.

 

READ MORE:

1. टायर के बारे में जानकारी
2. टायर के प्रकार जानिए
3. ट्यूबलेस टायर की जानकारी

 

व्हील बैलेंसिंग कैसे करे:

1. व्हील बैलेंसिंग के टिप्स,

2. स्टैटिक बैलेंसिंग प्रक्रिया करना,

३. डायनामिक बैलेंसिंग की प्रक्रिया करना,

4. टायर का वेट बराबर स्थिर करना,

5. गाड़ी चलाते समय व्हील का बैलेंसिंग चेक करना,

6. व्हील अलैमेंट करना,

7. टायर का घिस जाना,

 

व्हील बैलेंसिंग के टिप्स (wheel balancing):-

गाड़ी चलाते समय गाड़ी के पहिये सीधे और आसानी से चल सके, लेकिन यही पहिये यदि लेफ्ट, राईट टर्न लेते समय बहुत कष्टकारी हो तो, ड्राईवर को गाड़ी चलाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, एक टायर और रीम इनको अगर अच्छे तरीके से बैलेंस नहीं किया गया हो, तो यह अनबैलेंस हो जाता है.

हम जब गाड़ी कम या ज्यादा की स्पीड में चलाते है तब इसमें कंपकपाहट पैदा हो जाती है, और बब्लिंग के कारण गाड़ी उपर की और उछलने लगती है, जिसके कारण टायर घिसने लगते है, और साथ ही साथ स्टेयरिंग पर ड्राईवर का कण्ट्रोल बिघडते रहता है, जिसके कारण ड्राईवर को गाड़ी चलाने में बड़ी असुविधा होती है, जब कभी किसी पहिये पर प्रहार किया हो या फिर कभी टायर बदलना हो तो, उस पहिये को बैलेंस करना जरुरी हो जाता है. (wheel balancing kaise kare)

टायर के साथ साथ रीम और ट्यूब को एक बंच मानकर इसे बैलेंस किया जाता है, जब कभी हम नयी गाड़ी खरीदते है उस समय, चारो टायर बैलेंस करने के बाद ही कस्टमर को दिया जाता है. गाड़ी की स्टेयरिंग ठीक और सटीक रहे इस लिये, एक एक टायर करके दोनों टायर को अलग अलग से बैलेंस किया जाता है.

 

READ MORE:

1. ट्यूब के बारे में जानकारी
2. रीम के बारे में जानकारी
3. टायर की लाइफ कैसे बढ़ाये

 

व्हील बैलेंसिंग के प्रकार:-

A. स्टैटिक बैलेंस

B. डायनैमिक बैलेंस

 

स्टैटिक बैलेंस प्रक्रिया:-

स्टैटिक बैलेंस उसे कहते है, जब हमारा व्हील आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो जाता है, या आउट ऑफ़ बैलेंस हो जाता है, जब ऐसा होंगा तब हमारे गाड़ी का टायर कंपकपाहट करेंगा, इस अन बैलेंस को ठीक करने के लिए, टायर के रीम को कंप्यूटराईस मशीन के व्दारा विडियो ग्राफी करके रीम के अन्दर वेट, वजन लगाये जाते है, जिसे हम लीड के रूप में देखते है.

 

डायनैमिक बैलेंस प्रक्रिया:-

जब हम गाड़ी की स्पीड अधिक करके चलाते है, उस समय रीम के बाहरी वाला भाग या कोना बाहर की और निकल आता है, जिसके कारण गाड़ी तेज चलाने पर बब्लिंग होना सुरु हो जायेंगी और जिससे गाड़ी चलाना कठिन हो जायेंगा, इसे हम डायनैमिक आउट ऑफ़ बैलेंस व्हील कहते है, इस टायर को अन बैलेंस से बैलेंस करने के लिए, टायर के भारी वाले भाग के, विरुद्ध वाले भाग को रीम के अन्दर और बाहर की और वेट, वजन लगाये जाते है. टायर का कोण सा भाग भारी है यह जानने के लिए कंप्यूटराईस मशीन के व्दारा विडियो ग्राफी करके पता लगाया जा सकता है, और जिसके कारण रीम के अन्दर और बाहर वेट, वजन लगाये जाते है.

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व्हील अलाइमेंट करना:-

इंजन के बाद गाड़ी में सबसे महत्वपूर्ण भाग टायरों का होता है, क्योंकि सड़क और गाड़ी के बिच का रिश्ता टायर ही होता है, अगर गाड़ी अनबैलेंस हो और उसे सही नहीं करवाया तो हमारे गाड़ी का एक साइड वाला टायर ज्यादा घिस जायेंगा, इसलिए सही समय पर व्हील अलाइमेंट करते रहना चाहिए, नहीं तो इसका परिणाम हमारे सस्पेशन सिस्टम और स्टेयरिंग सिस्टम में होकर जल्द ख़राब कर सकती है, जिससे हमारी परेशानी और बढ़ सकती है,

अपने गाड़ी को सीधे लेन पर चलाने के लिए ड्राईवर को अधिक ताकत का उपयोग करना पड़ता है, और साथ ही साथ ड्राईवर की कंप्लेंट भी होती है की, गाडी एक साइड जा रही है, कभी कभी गाड़ी की स्पीड बढ़ाने पर गाड़ीअधिक वाइब्रेशन करती है, इसलिए गाड़ी को सही और सटीक रखने के लिए जब भी जरुरत हो, गाड़ी के चारो टायरों को बैलेंसिंग और व्हील अलाइमेंट करते रहना चाहिए, जिससे हमारी गाड़ी की लाइफ और टायरों की लाइफ बढ़ जाये.

 

टायर का घिस जाना:-

जब कभी हमारी गाड़ी एक साइड जा रही हो, इसका मतलब हमारी गाड़ी के टायरों को बैलेंस करने की जरुरत आ पड़ी है, और अगर हमने उसी समय व्हील बैलेंसिंग और व्हील अलाइमेंट नहीं किया तो, गाड़ी का ज्यादा से ज्यादा वजन एक ही टायर पर आ जायेंगा और इसका परिणाम हमारा टायर जरुरत से पहले ही घिस जायेंगे, और हमें पैसो का खर्चा बढ़ाकर नया टायर खरीदने पर मजबूर कर देंगा. इसलिए हो सके तो गाड़ी की देखभाल अच्छे से करे और समय समय पर टायरों को बैलेंसिंग करते है.

 

Author by: Prashant

 

Inspection supervision:

Overview:- wheel balancing Kaise Kare – व्हील बैलेंसिंग कैसे करे (Tyre ki life Kaise badhaye).

Name:- टायर का उपयोग कैसे करे. Wheel alignment Kaise Kare.

Benefits of Tyre: वाहन का अधिक लोड सहन करना. वाहन को स्थलांतर करना,

Types of wheel balancing: Static balance, Dynamic balance.

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3. चेसिस फ्रेम की रिपेयरिंग

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हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा है क्योंकि आपने जाना है की wheel balancing kaise kare – Wheel alignment kaise kare और यदि आपको इस लेख से कुछ मदद मिलती है, तो इसे अपने मित्रों तथा ज़रूरतमंद व्यक्ति को साझा करें ताकि हम भी इन लेखों को लिखना जारी रख सकें,

धन्यवाद….

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