Yoga ke bare me jankari – योग के बारे में जानकारी guide in Hindi

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Yoga ke bare me jankari - योग के बारे में जानकारी

 

योग के बारे में जानकारी – Yoga ke bare me jankari :-

Yoga Vidya se sambandhit jankari: नमस्कार, आज फिर एक बार ApnaSandesh वेबपोर्टल पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है. दोस्तों हर बार हम आपको नई जानकारी से अवगत कराते है. तो दोस्तों आज आपके लिए इस लेख में योगा अभ्यास के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. क्या आप योग विद्या के बारे में जानते है, (yoga ka mahatva janate hai), दोस्तों क्या आपको पता है की, Yoga याने क्या होता है? योग विद्या की ट्रेनिंग? इन सारी बातोँ की जानकारी आज के लेख के माध्यम से हम ज्ञात करते है.

दोस्तों, मुझे आशा है कि यह लेख आपको पसंद आएगा, और हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि यह लेख आपको कैसा लगा. तो दोस्तों आइये जानते है. अपने शारीरिक जीवन ने योग की क्या भूमिका क्या है? और योग करना क्यों जरुरी है?

योग और उस के बारे में जानने से पहले आपको योगा के जरुरी टिप्स, तथा बेसिक महत्व और परिचय से वाक़िफ़ होना ज़रुरी है. इसलिए सबसे पहले हम योग शक्ति क्या है इसके बारे में जानते है.

 

शरिरिक जीवन में योग की भूमिका और महत्त्व:

दोस्तों, योग की सुरवात अपने भारत देश से ही हुई है. कुछ महान व्यक्तिओ की वजह से आज पुरे विश्व में योग का प्रचार और प्रसार होने लगा है. आजकल सभी लोग पुरे विश्व में योग को महत्त्व और वक्त देने लगे है. लेकिन दोस्तों क्या आप जानते है की आखिर कार अपने शारीरिक जीवन में योग की भूमिका क्या है? शायद कुछ सिमित लोगो के पास इसका जवाज है हाँ. (Yoga ke bare me jankari – yoga ka mahatva in hindi)

अनेक लोग योग के आसनों का संबंध शक्तिशाली शारीरिक व्यायाम या शारीर को मांसल बनाने वाली प्रकियाओ से जोड़ते है. लेकिन यह धरना पुर्णतः गलत है. आसन न तो शरीर को झटके के साथ हिलाने – डुलाने के लिए बनाये गये है और अनावश्यक मांसपेशियों को बढ़ाने के लिए उनकी रचना की गयी है. अपनी अंतरात्मा के साथ एकाकार होने के अनुभव को ही योग कहते है. आसन शरीर की वह स्थिति है जिसमे आप अपने शरीर और मन के साथ शांत, स्थिर और सुख से रह सकते है. अंत: इस संदर्भ में यह कहा जाता है की आसनों का अभ्यास बिना कष्ठ के एक ही स्थिति में अधिक से अधिक समय तक बैठने के क्षमता को बढ़ने के लिए किया जाता है.

 

अन्य स्वस्थ प्रणालियो की तुलना में योगासन:

शरिरिक, मानसिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व के विकास में भी आसनों का विशेष महत्त्व है. जबकि अन्य व्यायामों का प्रभाव केवल शरीर की मस्पेशियो और हड्डियों पर ही होता है. शारीरिक व्यायाम शिघ्र्तापुर्वाक और अधिक श्वास-प्रश्वास के साथ किया जाता है. परिणाम हृदय को अधिक कार्य करना पड़ता है. इस प्रकार प्राण शक्ति का Deterioration होता है. इन व्यायामों के अभ्यास करने के बाद एक युवक खुद को पूर्ण स्वस्थ और शाक्तिशाली महसूस कर सकता है लेकिन बढ़ती उम्र के साथ उसके विभिन्न अंगो की कार्य प्रणाली मंद पड़ जाती है.

श्रमसाध्य व्यायाम तथा वजन उठाने वाले अभ्यास और शरीर गठन की अन्य विधिया प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी नही होती. बीमार या दुर्बल व्यक्ति इनका अभ्यास नही कर सकता. वृद्ध या फिर बच्चे तो निश्चित तौर पर इनका अभ्यास कर ही नही सकते. तो दोस्तों आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा की क्या आसन इससे अलग है?

 

योगासन का अभ्यास कैसे करे:

जी हा दोस्तों, आसन इनसे पूर्ण: भिन्न है और इनसे अधिक लाभदायक भी है. आसनों का अभ्यास आराम से, धीरे-धीरे और एकाग्रता के साथ किया जाता है. इस तरह बाह्य और आंतरिक संस्थानों पर भी प्रभाव पड़ता है. मांसपेशिय सुचारू रूप से कार्य करने लगती है. इन आसनों का प्रभाव शरीर और मन पर भी पड़ता है जिससे अनेक दुर्बताओ से मुक्ति मिलती है. इनका अभ्यास स्वस्थ, अस्वस्थ, युवा, वृद्ध सभी कर सकते है. एकाग्रता और ध्यान के लाइट यह बहुत ही उपयुक्त है. असल में व्यायाम की अन्य विधिया शरीर में विशैले पदार्थ की वृधि करती है. जबकि योगासनों का अभ्यास इनकी मात्र को न्यून करता है.

दोस्तों, अब आप स्वयं से ही प्रश्न कीजिये की आसनों में व्यक्तित्व के हरएक पहलु को प्रभावित करने की क्षमता है तो मै शारीरिक व्यायाम की अन्य विधिय क्यों कर रहा हु?

 

योग से होने वाले सामान्य लाभ:

शारीरिक लाभ: 

आसनों से शरीर की सबसे महत्त्वपूर्ण अंत: स्त्रावी ग्रंथि प्रणाली नियंत्रित और सुव्यवस्थित होती है. परिणामत: सारे ग्रन्थियो में से सही मात्रा में रस स्त्राव होने लगता है. इसका सुप्रभाव शरीर के साथ साथ मानसिक दृस्ठीकोंन पर भी पड़ता है. पाचन क्रिया तीव्र हो जाती है. सही मात्र में पाचक रस तयार होता है.

Yoga ke bare me jankari - योग के बारे में जानकारी

 

मानसिक लाभ:

आसन मन को शक्तिशाली बनता है और दू:ख, दर्द सहन करने की शक्ति प्रदान करता है. दृडता और एकाग्रता की शक्ति प्रदान करता है. आसनों के नियमित अभ्यास से दिमाग शक्तिशाली और संतुलित बना रहता है. बिना विचलित हुए आप शांत मन से संसार के दुःख चिंताओ और समस्याओ का आप सामना का सकेंगे. व्यक्ति में आत्मविश्वास बड़ता है. कठिनाइयों पूर्ण मानसिक स्वस्थ हेतु सीढिया बन जाती है.

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आध्यात्मिक लाभ:

आसन राजयोग के अस्ठांग मार्ग का तृतीय सोपान है. हठयोग का गहन शरीर के उच्च आध्यात्मिक प्रकिया के लिए तयार करने से ही है. इसमें शरीर शुद्धी को ज्यादा महत्त्व दिया जाता है. भले ही आसन स्वयं आध्यात्मिक अनुभव नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे आध्यात्मिक मार्ग का एक साधन जरुर हैं.

 

Author by- RITIK

 

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