Aadhunik frost sinchan Takanik fawara – पंप फवारा न्य सिंचाई के तरीके

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aadhunik sinchan Takanik fawara sinchan - पंप फवारा न्य सिंचाई के तरीके

 

aadhunik sinchan Takanik fawara sinchan – पंप फवारा न्य सिंचाई के तरीके:

नमस्कार प्रिय पाठक, apnasandesh.com पर आप सभी का स्वागत है. दोस्तो आज के इस लेख में हमारी टीम द्वारा Agree Technology से संबंधित आधुनीक सिंचाई तकनीके (MORDERN IRRIGATION SYSTEM) के बारे मे जानकारी दी जा रही है. (Pump sprinkler irrigation), सिंचाई कैसे करे? सिंचाई के बारे में जानकारी (Sinchai ke bare me jankari). तुषार सिंचाई करने के साधन, फ्रॉस्ट सिंचाई की विधिया (New Sinchai ki vidhiyaa) तथा परंपरागत सिंचाई करने की प्रक्रिया जानिए. नए आधुनिक सिंचाई की तकनीक. उम्मीद है इस लेख को भी उतना ही पसंद करेंगे जितना पिछले लेख को किया था.

प्रिय पाठक पिछले लेख में हमने आधुनीक सिंचाई तकनीक मे DRIP IRRIGATION (टपकन सिंचाई) क्या होता है, ड्रिप इरीगेशन के फायदे, और नुकसान के बारे मे जाना है. प्रिय दर्शक उसी लेख को पूरा करते हुए आज के इस लेख में आपके लिए पंप फवारा सिंचाई पद्धत (Pump sprinkler irrigation) के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. जी हा दोस्तो इस लेख में हम फवारा सिंचाई तकनीक के बारे में बात करेंगे, तो आइये जानते है.

 

Pump Fawara Paddhat (Aadhunik Sinchai ke Tarike) – पंप फव्वारा से सिंचाई कैसे करे:

aadhunik sinchan Takanik fawara sinchan - पंप फवारा न्य सिंचाई के तरीके

इस विधि में, पंप के माध्यम से पानी का दबाव दिया जाता है तथा पानी का दबाव छोटा होता है. इस तकनीक में छेद से पानी फव्वारे के रूप में फसल को दिया जाता है. स्प्रिंकलर में सिंचाई का पानी बारिश की तरह जमीन पर गिरता है. इसलिए, इसका एक संतुलित वितरण होता है. उन क्षेत्रों में जहां मिट्टी बड़ी है और जमीन असमान है. यह तरीका बेहद सुविधाजनक है. इस तरह, एक बड़े क्षेत्र को भी सिंचित किया जा सकता है. इस विधि का उपयोग चावल और जूट को छोड़कर सभी फसलों के लिए किया जा सकता है. फव्वारे की सिंचाई क्षमता 80% से अधिक है. यह विधि उथली और रेतीली मिट्टी की सिंचाई के लिए उपयोगी है. लेकिन यह भारी मिट्टी वाली मिट्टी के लिए उचित नही है. (aadhunik frost sinchan Takanik fawara)

“एल्यूमीनियम या पीवीसी पाइप को जोड़ कर स्प्रिंकलर नोजल की मदत से पानी के दबाव का उपयोग कर उसे बारिश जैसे सभी फसलो पर एक जैसा गिराए जाने की प्रणाली को तुषार सिंचन (Frost irrigation) कहा जाता है.”

 

आधुनीक तुषार सिंचन सेट कैसे करे – (modern frost sprinkler set up kaise kare):

A. तुषार सिंचन का उपयोग करने के लिए उचित स्प्रिंकलर का चयन करे,

B. साथ ही हर घंटे बाहर आनेवाला पानी या उसकी गती हमेशा उस जमीन के पानी की पोषण क्षमता से कम होना चाहिए.

C. उपलब्ध पानी की मात्रा को ध्यान में रखकर स्प्रिंकलर का चयन कर सकते है.

D. तुषार सिंचन सेट शुरू करने से पहले जानकारी पुस्तिका के अनुसार या विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करे,

E. सभी नट-बोल्ट उचित तरीके से बैठे या नहीं यह देख ले.

F. सभी पाइप्स साफ़ रखें, सेट बंद करते समय पहले गेट वाल्व धीरे से बंद करे और फिर पंप बंद करें, स्प्रिंकलर को ऑइल या ग्रिस न लगाए. (aadhunik frost sinchan Takanik fawara)

 

तुषार सिंचन के फायदे (Benefits of frost irrigation):-

1) पारंपरिक विधि की तुलना में 30 से 35 प्रतिशत पानी की बचत होती है.

2) उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है.

3) भूमि समतलन करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

4) श्रम लागत कम हो जाती है. इसमें मजदूरी का खर्च कम आता है.

5) प्रवाही सिंचनसे अधिक सिंचन क्षमता मिलती है.

6) तुषार सिंचन प्रणाली लगभग सभी फसलों के लिए उपयुक्त होती है.

7) पत्तियां धुलने से रोग और कीट कम हो जाते हैं. पानी बारिश के जैसा हर फसलो पर गिरने के कारण कीटक, रोग धोकर निकलते है.

8) खाद, कीटनाशक, फफूंदनाशक और खरपतवारों से पानी उपलब्ध कराया जा सकता है. द्रवरूप रासायनिक उर्वरक तुषार-सिंचन के माध्यम से देते आते है.

9) उर्वरक फसलों के जड़ो के पास दिये जाते है. परिणामतः उर्वरको का कार्यक्षम उपयोग होकर उसमे बचत होती है.

10) जैसे ही बारिश होती है, हवा में नाइट्रोजन पानी में घुल जाती है और फसल को जन्म देती है.

11) ठंड के मौसम में फसलों को खतरे से बचाता है.

12) उच्च तापमान पर फसल को ठंडा किया जा सकता है.

13) ठिबक सिंचन प्रणाली के मुकाबले पर एकड़ का खर्च कम आता है.

14) हर तरफ एकजैसे मात्रा में पानी दे सकते है.

15) मिट्टी की धूप नहीं होती है.

 

तुषार सिंचन की सीमाएं (Frost irrigation limits):-

1. उच्च दबाव पंप बिजली की लागत में वृद्धि करते हैं.

2. उच्च तापमान पर पानी वाष्पित होता है.

3. यदि हवा की गति अधिक है, तो पानी हर जगह उपलब्ध नहीं होता.

4. पानी बर्बाद हो जाता है और खरपतवार संक्रमण बढ़ता है क्योंकि पानी खेत के अवांछित क्षेत्रों पर गिरता है.

5. फव्वारा सिंचन में क्षारीय पानी का उपयोग सिंचाई के लिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि पत्तियों पर नमक की परत जम कर पत्तियों को जलाने का जोखिम होता है.

6. फसलों की पत्तियों पर पानी गिरने से फफूंद जनित रोगों की घटना बढ़ सकती है.

7. फूलों के पुंकेसर को पानी के स्प्रे से धोया जाता है जो फलों के उत्पदन को प्रभावित करता है.

8. फसल वृद्धि के दौरान भूमि को वापसी की स्थिति में नहीं रखा जा सकता है.

 

स्प्रिंकलर सिंचाई घटक :-

1) पंप – Pump,

2) मुख्य पाइप – main pipe,

3) उप-पाइप – Sub-pipe,

4) रिसर – riser,

5) सिंकलर – Sinkler,

6) निस्पंदन उर्वरक टैंक – Filtration Fertilizer Tank,

8) वाल्व – valves etc,

Pump Fawara irrigation Technology

Author By:- KHUSHAL

Pump Fawara irrigation Technology

Inspection supervision:

Overview:- Aadhunik Sinchai ki Takanik – आधुनीक सिंचाई की तकनीक (पंप फव्वारा से सिंचाई कैसे करे).

Name:- Pump Fawara Se Sinchai kaise kare (तुषार सिंचाई करने की प्रक्रिया)

Benefits of irrigation: सिंचाई से पानी की बचत होती है, तापमान को अनुकूल बनाये रखता है.

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धन्यवाद….Sinchai karne ke tarike

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