Evolution ke bare me jankari – एवोलुसन/उत्क्रांति के बारे में जानकारी

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Evolution ke bare me jankari – एवोलुसन/उत्क्रांति के बारे में जानकारी:

Development ki jankari: नमस्कार, दोस्तों आप सभी का फिर एक बार आपके अपने चहिते चैनल “अपना सन्देश” वेब पोर्टल में स्वागत है. दोस्तों, आज हम आपको बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. दोस्तों, आज का हमारा विषय है, उत्क्रांति याने की Evolution, एवोलुसन के बारे में जानकारी (evolution ke bare me jankari), उत्क्रांति कैसे हुई, (Utkranti ki paribhasha aur arth kya hai), Utkranti kya hai, एवोलुसन किसे कहते है, (Evolution ke vividh prakar). Evolution ki jankari. विकसन का महत्व क्या आपको पता है की, उत्क्रांति कैसी होती है. तो आज हम आपको बताते है, की यह किस तरह होती है. इसके बारे में जानकारी जाने.

तो आइये प्रिय पाठक, आज हम आपको इस लेख के माध्यम से पूरी जानकारी देने जा रहे हैं. उम्मीद है इस लेख को भी उतना ही पसंद करेंगे जितना पहले के लेख को किया, तो आइये दोस्तों जानते है.

 

पृथ्वी का विकास/इतिहास – Utkranti kya hai:

यह कहानी सुरु होती है, बहुत साल पहले – याने की आसपास 4 अब्ज साल पहले, उसी समय अपने पृथ्वी का जन्म हुआ था. उस समय की पृथ्वी याने की एक तप्त द्रवरूप धातु, धुल और वायु इनका द्रवरूप गोला था, अनेक लक्ष साल विलुप्त होते गए और इस गोले का पृष्ठभाग का हिस्सा धीरे-धीरे ठंडा होता गया. और उसका रुपांतर एक कठिन कवच में होता गया. यह कवच याने की, खड़क से बना हुआ पृथ्वी का पृष्ठ भाग. अंदर के तपते द्रव के धड़क से फूटता था, और दुबारा और बन जाता था. जगह बदलते रहता था. पृथ्वी पर मिले हुए सबसे पुरातन खड़क की उमर लगभग चार अब्ज तीस लाख साल है.

समय-समय पर पृथ्वी का यह सतह हिस्सा बन रहा था, इसके साथ ही उस सतह वाले हिस्से पर पानी भी जमा हो गया था. और वायुमंडल का वातावरण भी पास में बन रहा था, लेकिन यह वायुमंडल कार्बन-डाय-ऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन, इन वायु से बन रहा था. दोस्तों, पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन नहीं था. विभिन्न भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं से ऑक्सीजन के साक्ष्य में वृद्धि हुई. और यह जीवभूति के निर्माण के लिए बहुत उपयुक्त था.

 

पृथ्वी पर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया:

इन सब क्रियाओ को मिलकर बनाया हुआ यह रसायन पृथ्वी के पृष्ठभाग पर फ़ैल गया था. और उसके उपर हमेशा टकराते हुये सूर्य के अत्यधिक किरणें, उस रसायन में घड रहा थे. बिजलियों का चमचमाट. या भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया में से ही पहिले सजीव पेशि के जन्म के लिए आवश्यक रहनेवाले अलग-अलग घटकों के प्रथिने बनाने वाले अमीनो एसिड का उदभव हुआ. पृथ्वी के जन्म से आज तक के समय के वैज्ञानिको ने अलग-अलग हिस्से किये है, लगभग दो अब्ज साल का समय यह ”अर्चियन कल्प” इस नाम से जाना जाता है. इस समय में पृथ्वीपर सजीव पेशी का जन्म नहीं हुआ था.

आर्चियन कल्प के बाद लगभग 1 अब्ज 90 कोटि साल का समय यह ”प्रोटेरोज़ोइक कल्प” के नाम से जाना जाता था.

 

मनुष्य की उत्क्रांति कैसे हुयी:

दोस्तों, गोरिल्ला और चिम्पांजी यह बंदर के शारीर के रक्त में से प्रथिने, हिमिग्लोबिन और डीएनए इनके मनुष्य के शरीर के अंदर यही घटक का साम्य है. इसके उपर से ही गोरिला और चिम्पान्झी और मनुष्य यह तीनो शाखा ४०-५० लाख साल पहले एक ही पूर्वजो के कारण अस्तित्व में आई होगी. ऐसा अंदाज किया जाता है. लेकिन बंदर और मनुष्य इनको विभाजित फ़िलहाल कोनसे समय, और कोनसे तरीके से और किस कारण से हुई, यह फिलहाल बताते नही आता है. उत्खनन में मिली हुई जीवाश्म के मदद से मनुष्य के उत्क्रांति की चिन्हे दिखाई देती है.

 

सजीव सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई:

दोस्तों, भारत और दक्षिण आफ्रिका में मिले हुए अवशेष के कारण आज के मनुष्य के साम्य बताने वाली शारीरिक चिन्हे यह रामपिथेक्स थे. यह ध्यान में आता है. यह लगभग एक कोटि 20 लाख साल पहले का समय था. दोस्तों, आज का मनुष्य याने की होमो सेपियन्स. जीवाश्म स्वरूप में यह होमो सेपियन्स नियंदेर्थाल के कवट की हड्डी जाड थी, और मस्तक यह अरुंद था. सजीव सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई, इस सृष्टि पर तरह तरह के सजीव प्राणी है और हर एक प्राणी की जोड़ी बनाई गई है. इन सभी क्रियाविधि को समझने में हर एक व्यक्ति प्रयास कर रहा है लेकिन हर एक अपने अपने अनुभव से अपना विचार बताते है.

सन 1925 में शाली विज्ञार्थी को डार्विन के उत्क्रांति वाद का शिक्षण देने के घोर अपराध के बारे में जोन्स स्कोप्स नाम के अमेरिकन शिक्षक के उपर न्यायलय में शिक्षा सुनाई गयी. लेकिन आज जगभर डार्विन का उत्क्रांतिवाद का अविभाज्य अंग बना है.

फिर भी मनुष्य के विचार में ही सामाजिक उत्क्रांति कैसे हुए यह एक सवाल ही रहा है.

 

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