Green House Effect ki jankari – ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट के बारे में जानकारी

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Green House Effect ki jankari - ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट के बारे में जानकारी

 

Green House Effect ki jankari – ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट के बारे में जानकारी:

नमस्कार, दोस्तों आज आप सभी का एक बार फिर “अपना सन्देश” वेब पोर्टल पर स्वागत है. दोस्तों, आज हम आपको ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट के बारे में जानकारी बताने जा रहे है. हाँ दोस्तों इस लेख में, ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट किस तरह और कैसे काम करता है? (green house effect ki jankari) इसके बारे में जानेंगे. तो आइये प्रिय पाठक, सबसे पहले ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट क्या होता है? इसके बारे में विस्तार से जानते है.

ग्रीनहाउस एक एयर-टाइट ग्लास बिल्डिंग है, जिसका उपयोग वाणिज्यिक पौधों के उत्पादकों, बागवानों और वनस्पति विज्ञानियों द्वारा बड़े पैमाने पर पौधों को उगाने के लिए किया जाता है जो अन्यथा ठंड के मौसम में नहीं बचेंगे. ग्रीनहाउस इमारतों का उपयोग आमतौर पर कूलर जलवायु वाले देशों में किया जाता है. तो चलिए दोस्तों इसके बारे में अधिक जानते है.

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ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट क्या है:

प्रिय पाठक, शायद आपने इसका नाम सुना ही होगा, ग्रीनहाउस याने काचघर. लेकिन बहुत कम लोगो ने इसे देखा होगा? क्योंकि अपने भारत में काचघर ज्यादा संख्या में नही पाए जाते है. ग्रीन हाउस अधिकतर प्रगत देशो में, जहा पर अत्यंत विषम हवामान है, वहां पर बागायती खेती के लिए काचघर का उपयोग किया जाता है.

दोस्तों, बाहर कितनी भी कड़ाके की ठंडी हो, फिर भी काचघर में गर्मी सहन हो ऐसा वातावरण निर्माण होता है. इसका कारण याने दिनभर सूर्यप्रकाश काच के अन्दर जाता है. अंदर की जमीन, पेड़, हवा इसके कारण पूरी जगह गरम हो जाती है. यह सारी गरम हुई चीजो को थोडा सा गर्मी का उत्सर्जन होता है. लेकिन उत्सर्जित उष्णता काच के कारण रोकी जाती है. यह रोकी हुई उष्णता अंदर के वातावरण को उबदार रखने में मदद करती है. इसी प्रक्रिया को हम “ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट” कहते है.

 

ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट किस तरह काम करता है?

दोस्तों, पृथ्वी के बाहर गए कई सालो से यही चीजे हो रही है, ऐसा शास्त्रज्ञो कहना है. याने सूर्य की किरण पृथ्वी पर आती है. यह पृथ्वी गरम होती है. लेकिन उसर्जित उष्णता यह वातावरण से दोबारा अवकाश में फेकी नही जाती है. इसका कारण यह की हवा में बढ़ने वाले कार्बन डायओक्साईड का प्रमाण. इसको मदद करने वाले वायु याने के मीथेन, नायटस सी, एफ, सी यह थे. सबका एकत्रित स्वरूप याने की पृथ्वी का बढ़ता तापमान. गए शतक में पृथ्वी का सरासरी तापमान एक अंश सेंटीग्रेट से बढ़ा है. आनेवाले 50 सालो में इसमें 3 अंश सेंटीग्रेट से बढ़ोतरी होने की आशंका दर्शायी जाती है.

अब इस पर किसी किसी की प्रतिक्रिया यह हो सकती है? की क्या फर्क पड़ता है, की इस चार डिग्री सेंटीग्रेट के बढे हुए तापमान से? गर्मी और ठंडी में फर्क नही पड़ता ओर अब क्यों? लेकिन दोस्तों यहाँ पर फरक पड़ता है. वह पृथ्वी के सरसरी तापमान में. इसका अर्थ यह की कई हिस्सों में तापमान बर्फ पिघलने के लिये कारण बन सकता है. दोस्तों, सोचो तापमान अगर बढ़ता गया तो, क्योंकि पृथ्वी पर जमीन सिर्फ ३०% .और उसमे १०% बर्फाच्छादित है. इसमें पानी भी जमा है. इसका पिघलना सुरु हुआ, तो महापुर आ सकता है और समुद्र की टंचाई 1 मीटर और बढ़ जाएगी. और अगर ऐसा हुआ तो.

दुनिया में कई जगह पर अकाल गिरने लगेगा, औए कई हिस्सों में अतिवृष्टि होगी. तथा वाहनों का उपयोग ज्यादा होने लगा है. और इसी वजह से कार्बन डाय ऑक्साइड का प्रमाण बढ़ते जा रहा है. और खनिज तेल का उपयोग करना यह ज्यादा प्रमाण में बढ़ चूका है.इस कारण जमीन खोकली बन चुकी है. कहने का मतलब आधिनिकरण ने हमारे नेचर को बादल दिया है.

 

green house effect ka mahatva:

इसी परिमाण से बचने के लिए ग्रीन हाउस याने नेचर (पर्यावरण) की शक्ति निर्माण हुई है, तथा कार्बन डाय ऑक्साइड का समतोल रखने के लिए नेचुरल रूप से यह व्यवस्था की गयी थी. सभी जीवित प्राणी अपने दूषित वायु को बाहर निकालकर और इसका उपयोग करके सभी पेढ पौधे अपना भोजन तैयार करते थे. लेकिन मनुष्य ने इसके श्रुंखला को उलटी ही बना दीया है. यह निसर्ग के चक्र बदलकर मनुष्य में जंगल की लकडिया इंधन बनाने के लिए सुरुवात की, इसी के कारण वातावरण प्रदूषित होने लगा है.

 

Green House effect kya hota hai:

ऐसी समस्या की तीव्रता हर एक के समज में आ गयी है. दोस्तों, लेकिन उसके विषय पर अभी तक व्यावहारिक उपाययोजना दिखी नही है. वह जिस समय प्रत्यक्ष जिस समय उतारेगी, तभी ग्रीनहाउस इफ़ेक्ट को मदद होगी, इसके लिए हमें कुछ चीजो के लिए प्रयत्न करने चाहिए. जैसे की ज्यादा से ज्यादा हमें पेड लगाने चाहिए, वृक्षा तोड़ बंद करनी चाहिए, नए पेड़ लगाने चाहिए, और साथ ही समय रहते वाहनों का उपयोग हमें कम करना चाहिए.

और साथही साथ हमें इन्धानो का उपयोग कम करना चाहिए. जैसे की कोयला इसका का भी उपयोग हमें कम मात्रा में करना चाहिए, इसी के कारण हमारे आसपास का परिसर प्रदूषि होता है. इस समय हमें दोस्तों, अपारंपरिक उर्जासाधानो को खोजकर उनका उपयोग करना आवश्यक रहेगा और इसी के कारण हमारा वातावरण प्रदूषित नही होगा. तो आइये प्रतिज्ञा लेते है अगर जीवन को समतोल बनाये रखना है तो पर्यावरण का बचाव करना जरुरी है.

 

Author by: APARNA

 

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