Industry ke bare me jankari – उद्योग के बारे में जानकारी

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Industry ke bare me jankari - उद्योग के बारे में जानकारी

 

Industry ke bare me jankari – उद्योग के बारे में जानकारी:

Udyog se sambandhit jankari: नमस्कार, दोस्तों आज एक बार फीर आप सभी का “अपना सन्देश” वेब पोर्टल स्वागत है. दोस्तों आज हम आपको उद्योग के बारे में जानकारी बताने जा रहे. दोस्तों, शायद आप सभी को पता ही है, की उद्योग क्या है? सही अर्थ से देखा जाये तो उद्योग (Gharelu Udyog aur prakar) मतलब एखादी चीज और उसको लगने वाला समय, किया हुआ खर्च और उन सबसे मिलने वाला फायदा, तथा जहाँ पर आवश्यक है वहां उत्पादन या बड़े पैमाने पर सेवाएं प्रदान करना इसे ही “उद्योग” कहते है.

अन्य भाषा में कहा जाते तो, किसी विशेष क्षेत्र में बड़ी मात्रा में माल के विनिर्माण/उत्पादन या बड़े पैमाने पर सेवाएं प्रदान करने के मानव अधिनियम को उद्योग कहा जाता है. उद्योगों के कारण, गुणवत्ता वाले उत्पाद सस्ते दामों पर प्राप्त होते हैं, जो लोगों के जीवन स्तर में सुधार करता है और जीवन को आसान बनाता है.

दोस्तों, मुझे आशा है कि यह लेख आपको पसंद आएगा, और हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि यह लेख आपको कैसा लगा. तो दोस्तों आइये जानते है.

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उद्योग के बारे में जानकारी (Udyog se sambandhit jankari):

उद्योग मतलब हम भारतीय लोग इस बात की व्याख्या बहुत संशयपूर्ण दृष्टिकोण से करते हैं. गए दशक में यह परिस्थिति बदलती जा रही है, फिर भी अभी तक सही अर्थ से उद्योग, औए उद्योगी वृत्ति अंगीकृत नही किया गया है. हमें आज भी ऐसा कहना पड़ता है. इसके महत्त्व का कारण उद्योग ही है, कुछ चीजे हमारे नजरो के सामने लगता है. हर रोज के व्यवहार कुछ असंख्य चीजो से वह उद्योग में आते है, इस दृष्टी से हम उसे कभी नहीं देखते है. जिन्होंने देखा है, उनका प्रगति का रास्ता खुला हुआ है. (Industry ke bare me jankari)

दोस्तों, जैसे की अमेरिका में हस्पताल को एक उद्योग ही समजा जाता है. हस्पताल की जगह, ईमारत, बिजली, पानी, नोकर, यंत्रणा, और पैसा यह सारी चीजे हमें व्यापार से ही मिलाना पड़ता है. फिर आता है डॉक्टर और रुग्न. फिर इसका सारा पैसा निकलेगा रुग्णसेवा के आकार से. यह चीज हमें बिलकुल भी मान्य नही रहती है. दोस्तों, ऐसी बात खेती की भी है. किसान को उसके मेहनत की कमाई, जमीन का बाजारभाव, उसके अवजारो की कीमत, घर से मेहनत करने वाले हात और उनके मदद की कीमत इसका विचार हम करते नही है. दोस्तों, स्वाभाविक ही है, खेती से मिलने वाली फसल और उसका बाजारभाव ये उद्योग व्याख्या को भुलाकर दिया जाता है.

 

उद्योग के प्रकार (Type of Udyog):

दोस्तों, जैसे की जागतिक बाजार में मिलने वाला अंगूर, सेब, गुलाब का फूल (Gulab ka Ful) इनकी सिर्फ हम तारीफ ही करते रहेंगे; लेकिन मुलभुत चीजो को भुलाकर घरघुति स्वेटर बुनना यही भी एक उद्योग ही है. मसाला, आचार बनाकर बेचना ये भी एक उद्योग है. तब उद्योग यह नाम सर्वव्यापी है. उद्योग सर्वसामान्य तरह प्राथमिक और मुलभुत उद्योग, कारखानदारी, और घरघुति निर्माण यह तिन उद्योग के प्रकार है. कारखानदारी या घरघुति वस्तु निर्माण करते समय पैसा मिलना यह कला कौशल्य, सफाई और नवनिर्मिति इनमे यश मिलता है. यह उद्योजकता जहा पर वहा प्रगति होती है.

 

बढ़ते उद्योग की मांग:

दोस्तों, वैसे ही मुलभुत उद्योग पुरे दुनिया में चलता है. प्रवासी, मालवाहतूक, होटल, सब्जी, पर्यटन इ. इस उद्योग में असंख्य दिमाग काम करते रहते है. इतनाही नही बल्कि, इसके ऑफिस भी सभी तरह स्वच्छ रहती है. मुलभुत उद्योग में जितनी अधिक मनुष्य की मेहनत होगी उतनी अधिक प्रॉफिट (Profit) होती है. और कारखानदारी में जितने आदमी ज्यादा, उतना ही उत्पादन ज्यादा होता है, उसी तरह इंडस्ट्री में जितना मनुष्य बल ज्यादा लगता है. उतनी ही देश की प्रगति होती है. ऐसा निष्कर्ष लगाने में कुछ हरकत नही है. (robotics और कम्पुटर) इनका उपयोग जैसा बढ़ते जा रहा है और इस युग को देखते हुए ऐसा निष्कर्ष लगाया जा सकता है की देश में उद्योग के क्षेत्र में अधिक प्रगति होगी.

 

भारत का उद्योग समूह:

दोस्तों, 21 वा शतक आने के कारण उद्योग इस नाम की व्याप्ति बढ़ते ही जा रही है. इससे पहले मनुष्य, यंत्रे इनमे प्रचंड उत्पादन याने इसका अर्थ बड़े उद्योग या कारखानदारी ऐसा होतो है. बैंकिंग शाखा में भी बहुत कर्मचारी और भरपूर कर्ज (loan) याने बड़ी बैंक ऐसी सोच थी. लेकिन दोस्तों, संशोधन से ही उद्योग की सुरुवात होती है. बायोटेक (Biotech) और स्पेस रिसर्च (Space research) इस दो चीजो के कारण इसके आगे अपने देश को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है. फिलहाल इसका स्वरूप हमें जानने जैसा नही होगा फिर भी, आया दशक उनका ही रहने वाला है. भारत का उद्योग समूह अब दुनिया के अन्य देशो के उद्योग को स्थापन करके आंतरराष्ट्रीय होने लगे है. गए कुछ सालो में अपने भारत देश के औद्योगिक बढ़ोतरी का प्रमाण हर साल १०% से ज्यादा हो रहा है. इस बात को हमने ध्यान में रखना चाहिए.

 

Gharelu Udyog aur prakar (उद्योग के प्रकार):

1. Making Ghee and Paneer,

2. Making Toffee and Sugar Sweets,

3. Fruit pulp extract and sale,

4. Make home use cooler,

5. Making water pouches,

6. Gift packing,

7. Making water pouches,

8. Make vinegar,

9. Incense Making Industry,

10. Color dyeing industry,

11. Tooth Powder Industry,

12. Lei and gum making industry,

13. Make vinegar,

14. Making cookies and biscuits,

 

Author by- APARNA

 

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