Steering system ke bare me jankari – स्टीयरिंग सिस्टम की जानकारी

स्टीयरिंग सिस्टम की जानकारी Steering system ke bare me jankari, स्टीयरिंग किसे कहते है (Steering kise kahte hai), स्टीयरिंग क्या है (Steering Kya Hai), स्टीयरिंग का उपयोग steering system ke upyog, स्टीयरिंग सिस्टम की कार्य पद्धति, स्टीयरिंग गियर रेशो जानिए,

Steering system ke bare me jankari - स्टीयरिंग सिस्टम की जानकारी

 

Steering system ke bare me jankari – स्टीयरिंग सिस्टम की जानकारी:

Steering system ki jankari: प्रिय पाठक, आज के लेख में ऑटोमोबाइल के गाडियों में प्रयोग होने वाले स्टीयरिंग (Steering) के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, इस लेख में स्टीयरिंग का क्या मतलब होता है? स्टीयरिंग सिस्टम की (karya paddhat) कार्य पद्धति (Working Procedur Of Steering System), स्टेयरिंग सिस्टम की गुणवत्ता? (Steering Kya Hai) स्टीयरिंग गियर रेशो के अंदरूनी और बाहरी वाले हिस्से और उपयोग के बारे अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे, उम्मीद है आप इस लेख को भी उतना ही पसंद करेंगे, जितना पहले के लेख को पसंद किया, क्योंकि हमारा यही प्रयास है की आप तक सही और बेहतर जानकारी पंहुचा सके. तो आइये जानते है.

 

स्टीयरिंग सिस्टम क्या है:

दोस्तों शायद आप जानते है की हर गाड़ी में स्टेयरिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है, और यह स्टेयरिंग सिस्टम इसलिए गाडियों में लगाया जाता है, क्योंकि जब कभी हम सड़क पर गाड़ी चला रहे हो, और इस गाड़ी को लेफ्ट या राईट सड़क के अनुसार मोड़ने की आवश्यकता पड़ती हो, तब हम बड़ी आसानी से अपनी गाड़ी जिस ओर चाहे उस ओर मोड़ सके, जब कभी वाहन चालक को स्टेयरिंग सिस्टम की आवश्यकता पड़ती हो तब स्टेयरिंग व्हील के माध्यम से गाड़ी को किसी भी साइड से लेफ्ट या राईट मोड़ सकते है, क्योंकि स्टेयरिंग सिस्टम का सम्बन्ध सीधे गाड़ी के सामने वाले पहिये के साथ होता है.

 

स्टेयरिंग सिस्टम की गुणवत्ता (mahatva):-

1. स्टेयरिंग सिस्टम कार्य करते समय या घुमाते समय यह घुमाने में हल्का होना चाहिए.

2. स्टेयरिंग सिस्टम की बनावट हमेशा मजबूत होना चाहिए.

3. सड़क पर स्टेयरिंग सिस्टम कार्य करते समय कभी फेल न हो.

4. स्टेयरिंग को घुमाते समय कभी भी वाहन चालक को थकावट महसूस नहीं होनी चाहिए.

5. सड़क पर चलते समय अचानक ब्रेक मारने पर इसमें कोई हानी न हो.

6. जब कभी लेफ्ट या राईट मोड़ने पर आसानी से मोड़ सके. (steering system ke upyog)

7. जब कभी जरुरत से जाता गाड़ी में वजन आ जाये या फिर अधिक बोझ ढोते समय इसमें लगे स्टीयरिंग जोमेट्री ख़राब न हो.

8. हर गाड़ी के स्टीयरिंग सिस्टम में सेल्फ एलाइनिंग होना चाहिए.

9. लेफ्ट राईट मोड़ काटने के बाद खुद ही अपनी जगह सीधी सीधी बना ले. ताकि वाहन चालक को बार बार परेशानी न हो.

10. स्टीयरिंग सिस्टम की बनावट ऐसी हो की सड़क पर चलते समय आने वाले रोड के झटके या किसी गड्डे, टीले का इस स्टीयरिंग सिस्टम पर कोई असर न हो.

 

स्टीयरिंग सिस्टम की कार्य पद्धति:

वैसे देखा जाये तो स्टीयरिंग सिस्टम की आवश्यकता हर गाड़ी में होती है, जब कभी वाहन चालक स्टीयरिंग को घुमाता है, तो स्टीयरिंग व्हील में लगे स्टीयरिंग शाफ़्ट के निचे लगा हुआ वर्म जिसे हम वर्म व्हील भी कह सकते है, यह भी घूमता है, यह वर्म शाफ़्ट के अन्दर फिट किया जाता है, जिसके कारण वर्म सेक्टर शाफ़्ट को भी घुमा पता है, और सेक्टर शाफ़्ट पर लगे ड्राप्ट आर्म आगे पीछे की और घुमती रहती है.

गाड़ी के सामने वाले हिस्से में जो की निचे की ओर होता है, वहा बॉल जॉइंट के साथ ड्रेग लिंक हमेशा बंधा रहता है, और ड्रेग लिंक का दुसरे हिस्से का बॉल जॉइंट स्टब एक्सेल के स्टीयरिंग आर्म के साथ जोड़ा जाता है, जब कभी वाहन चालक स्टीयरिंग व्हील को लेफ्ट राईट घुमाता है, तब ड्राप आर्म आगे और पीछे की और होता है, तो वह अपने साथ ड्रेग लिंक के द्वारा स्टब एक्सेल को भी घुमा पाती है, इसमें दो स्टब एक्सेल लगे रहते है, एक लेफ्ट साइड और दूसरा राईट साइड, राईट साइड का स्टब एक्सेल लेफ्ट साइड के स्टब एक्सेल के साथ आर्म और टाई रॉड के व्दारा जुड़ा रहता है. जिसके कारण दोनों स्टब एक्सेल एक साथ मोड़ पाते है, और जिस और चाहे उस और गाड़ी को मोड़ सकते है, इसलिए गाड़ी में स्टीयरिंग सिस्टम की बहुत आवश्यकता होती है.

 

स्टब एक्सेल आर्म – Steering System

दोस्तों इसके पहले वाले लेख में हमने देखा था और पढ़ा था की, स्टब एक्सेल को घुमाने से दोनों पहिये घूम जाते है, और ये दोनों स्टब एक्सेल आर्म और टाई रॉड के साथ बंधे रहते है, और आपने यह भी पढ़ा होंगा की स्टब एक्सेल का एक आर्म जो ड्रेग लिंक के द्वारा स्टीयरिंग के ड्राप आर्म से बंधा रहता है, इस ड्राप आर्म को घुमाने एव मोड़ने के लिए स्टीयरिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है. ताकि वाहन चालक गाड़ी के अन्दर बैठकर गाड़ी को जिस और चाहे उस और मुड़ा सके, और गाड़ी के अन्दर ही बैठकर पूरी गाड़ी को कण्ट्रोल कर के गाड़ी पूरी सावधानी पूर्वक सड़क पर चला सके.

Read More – Manual aur power steering system ki jankari

 

स्टीयरिंग गियर रेशो क्या है:-

दोस्तों आपको हम बता दे की हर गाड़ी में गियर तो रहते ही है, फिर वह चाहे गियर बॉक्स में हो. या फिर किसी दो पार्ट्स को घुमाने में हो या स्टीयरिंग रेशो में हो, यहाँ पर स्टीयरिंग गियर रेशो का यह मतलब है की, स्टीयरिंग व्हील कितना घुमाने पर एक चक्कर सेक्टर शाफ़्ट घूम पाए, सभी गाडियों में यह अलग अलग रेशो में होती है, जैसे की छोटी गाडियों में इसका रेशो १०:१ से लेकर २२:१ तक होती है,

जबकि बड़ी और हैवी गाडियों में जैसे ट्रक और बड़ी गाडियों के अन्दर २१:१ से लेकर ३२:१ तक रह सकती है, आप हमेशा यह ध्यान रखे की जीतन जादा अधिक रेशो होंगा उतना ही जादा स्टीयरिंग व्हील हलकी चलेंगी और वाहन चालक को ज्यादा परेशानियों का सामाना नहीं करना पड़ेंगा .निचे की और कुछ स्टीयरिंग व्हील के गियर रेशो दिए गए है, उमीद है इसी आधार पर अपने गाडियों में कंपनी के हिसाब से स्टीयरिंग के प्रकार और उसके गियर रेशो ज्ञात रखोंगे

 

स्टीयरिंग सिस्टम गियर रेशो:

गाड़ी का नाम :-

A. फियाट,

B. एम्बेसडर,

C. जीप,

D. अशोक लेलैंड,

E. मेटाडोर,

F. टाटा,

G. मारुती,

 

स्टीयरिंग सिस्टम के प्रकार (Type of Steering system):-

A. वर्म एंड रोलर,

B. रैक और पिनियन,

C. कैम और लीवर,

D. कैम और डबल रोलर,

E. वर्म और रोलर,

F. रिसर्कुलेटिंग बाल,

G. रैक पिनियन टाइप,

 

स्टीयरिंग गियर रेशो –

A. १६:४:१,

B. १४:१,

C. १४:१ और १२:१,

D. २४:१,

E. ७.१७:१,

F. २९.७:१ और ३४.२:१,

G. १७.५:१,

 

Author by: Prashant

 

Inspection supervision:

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Benefits of a Steering system: वाहन का अधिक लोड सहन करना. आराम प्रदान करना,

Type of Steering system: Worm and roller, Rack and Pinion,

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हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा है क्योंकि आपने जाना है की Steering system ke bare me jankari – Steering system ke prakar और यदि आपको इस लेख से कुछ मदद मिलती है, तो इसे अपने मित्रों तथा ज़रूरतमंद व्यक्ति को साझा करें ताकि हम भी इन लेखों को लिखना जारी रख सकें,

धन्यवाद….

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