watch ke bare me jankari – वॉच का आविष्कार kaise huaa

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watch ke bare me jankari - वॉच का आविष्कार

 

watch ke bare me jankari – वॉच का आविष्कार:

नमस्कार, दोस्तों आप सभी का एक बार फिर ”अपना सन्देश” वेब पोर्टल पर स्वागत है. दोस्तों, आज हम आपको प्राचीन घड़ियों का आविष्कार कैसे हुआ? इसके बारे में बताने जा रहे है. जी हा दोस्तों, हमारे मन में ऐसे कई सवाल आते है की घडी का अविष्कार कैसे हुआ? और घडी के अविष्कार के पीछे कारण क्या है, वॉच का निर्माण किसने किया? वॉच का जनक कौन है? घडी के प्रकार (type of watch), प्राचीन काल में घडी का उपयोग, और इसका महत्व क्या है?

समय का निर्माण यह हमारे कार्य और दिनचर्या का एक भाग है. देखा जाये तो घडी जिसे हम अंग्रेगी में Watch कहते है. जिसे समय के साथ सही तरीके से निर्माण किया है. हाँ प्रिय पाठक आज के लेख का यही टॉपिक है की किस तरह यह घडी हमारे जीवन का हिस्सा बनी है और भारत का घडी अविष्कार के पीछे की प्राचीन कथाए, इनके आवश्यक सत्य के बारे में अधिक जानकारी जाने.

 

घडी का अविष्कार कैसे हुआ?

दोस्तों, जैसे की समय के साथ दिन और रात कैसे आते है और इसी आधार पर कुछ वैज्ञानिको ने कैलेंडर का आविष्कार/प्रारंभ किया इसके बारे में हमने पहले ही जिक्र किया है. तो प्रिय पाठक इसी आधार पर घडी का भी आविष्कार हुआ है.

इतिहास के अनुसार प्राचीन भारत में 1 महीने को 30 दिनों में विभाजित किया गया था. और दिन और रात एक साथ गिने जाते थे, प्रत्येक समय को एक विशिष्ट नाम दिया गया था. अपने प्राचीन काल में साहित्यिक रचनाओ में दिन और रात के समय की नैसर्गिक भाग के रूप में वर्णन किया गया है. दोस्तों, दिन और रात का मीनिंग होता है, पुरे दिन के २४ घंटे होते है. (watch ke bare me jankari – ghadi ka avishkar kaise hua)

आधुनिक भारत के गणित शास्त्रज्ञ आर्यभट्ट ने इ. स. 500 में उन्होंने अपने आर्यभटीय ग्रंथ में समय के हिस्से पर विचार किया था, तो आईये दोस्तों, आज हम जानते है, घडियो के प्रकार और अधिक महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में.

 

घडी के प्रकार (type of watch):

1. आरम्भिक घडिया (originating watches),

2. परछाई घडिया और धुप घडिया,

3. जल घडी,

4. यांत्रिक घडिया,

5. बड़ी चक्राकार घडिया,

 

आरम्भिक घडिया (originating watches):

जैसा की आप अभी भी इस तंत्रज्ञान का उपयोग कर सकते है. और समय का अभ्यास कर सकते है. जैसे एक ही जगह पर पड़ने वाली परछाई की स्थिति में बदल होते रहता है, इसलिए कुछ वैज्ञानिक जो हमारे पूर्वज है उन्होंने एक ऐसे जगह जहाँ पर सूर्यकिरण अधिक ज्यादा मात्रा में आती थी, वहां पर एक लम्बा बांस लगा दिया था, फिर दिन जैसे तैसे बांस की परछाई की स्थिति में बदल होता रहता.

उसे देखते रहने पर उन्हें पता चला की, परछाई तो सूर्य के निकलने पर लम्बी थी. जैसे दिन ढलता रहता वह छोटी होती जाती थी. दिन के एक विशेष बिंदु तक घटने के बाद परछाई फिर से लम्बी हो जाती थी.और दोपहर के समय परछाई सबसे छोटी हो जाती थी. इसी आधार पर प्राचीन तथा हमारे ग्रैंडफादर के ज़माने में समय का पता लगाया जाता था. शायद आप इस तकनीक से वाकिफ होंगे. मित्र इस तकनीक का भी आप अध्ययन कर सकते है.

इसी तरह सूर्य, चंद्र व अन्य ग्रहों की गति का अभ्यास करने वाले भारतीय विद्वानों ने कई astronomus devices को विकसित किया. जैसे की आर्च, गोल, आदि.

 

परछाई घडिया और धुप घडिया:

दोस्तों, ऐसी घडिया केवल दिन में ही समय बता सकती है. और वह भी तब-तक आकाश में बादल ना हो, लेकिन आकाश में बादल हो तो ऐसे समय इस तरह की घडिया बंद और बेकार हो जाती है.

 

जल घडी की जानकारी:

दोस्तों, यह दोनों घडिया ख़राब हुई तब वैज्ञानिको ने जल घडी को बनाने का विचार किया, और जल घडी में एक पात्र के तली में छोटा सा छेड़ होता है. जिससे पानी बूंद-बूंद गिरता रहता है, पानी की परत को सिक्वेंसिअल गिरने से समय का तर्क लगाया जाता था. जैसे पानी की परत याने की घंटे बताने वाली मोजमापीय रेषा दिखाई देने लगती थी. जब इन जल घडियो का उपयोग किया करते थे. जब भाषण के प्रारम्भ में जल घडी के पात्र में कितना पानी डाला जायेगा यह पानी के तट पर अवलंब था, की जिस विषय पर अन्भन होने जा रही है, और वह कितना महत्वपूर्ण है.

दोस्तों, सन 1660 के आसपास पेंडुलम का उपयोग हुआ. उसकी खोज में गैलिलियो का बहुत बड़ा योगदान है.

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यांत्रिक घडिया की जानकारी:

दोस्तों, इस घडियो का आविष्कार जब उस समय यह कल्पना करना कठिन था. इन घडियो के प्रथम रूप का विवरण हमें सन 1250 में मिला था.

बड़ी चक्राकार घडिया:

दोस्तों, पेंडुलम के खोज के बाद कुछ घडिया बाटो द्वारा चलती थी. वे देखने में अच्छी नही दिखाई देती थी. और वे भारी भी होती थी. इसलिए किसी वैज्ञानिक ने सोचा की यह घडी और उनकी डोरियो को आरमारी जैसे बॉक्स में बंद कर दिया जाये तो कैसा रहेगा, और इस तरह बहुत बड़ी घडी का जन्म हुआ. जिन्हें grandfather of clock कहा जाता है.

दोस्तों, फिर कुछ वर्षो बाद इन सभी समस्याओ का हल spring नामक यंत्र और spring से हुआ. इनके कारण छोटी सी घडियो का बनना संभव हुआ. दोस्तों सोचो अगर जग में घडी न रहती तो क्या हम वक्त पाबंद कर पाते. और क्या हमें समय की आहट होती, दोस्तों इसका जवाब होगा नहीं, क्योंकि हमारे सभी सफल कार्य और दिनचर्या इसी घडी और कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

क्लॉक के प्रकार (घडी के प्रकार – type of clock):

1. परमाणु घड़ी (Atomic Clock),

2. खगोलीय घड़ी (Astronomical Clock),

3. मोमबत्ती घड़ी (Candle Clock),

4. डिजिटल घड़ी (Digital Clock),

5. इलेक्ट्रिक घड़ी (Electric Clock),

6. धूप घड़ी (Incense Clock),

7. घंटा घड़ी (Hourglass clock),

8. पेंडुलम क्लॉक (Pendulum Clock),

9. स्टीम क्लॉक (Steam Clock,),

10. जल घड़ी (Water Clock),

 

Author by:- Aparna

 

Inspection supervision:

Overview:- watch ke bare me jankari – clock ka avishkar aur puri jankari.

Name:- Ghadi (clock) ka avishkar kaise Hua,

type of clock:- Atomic Clock, Astronomical Clock, Candle Clock, Digital Clock,

Who is the father of the clock: Thomas Tompion

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दोस्तों, उम्मीद है की आपको watch ke bare me jankari – ghadi clock ka avishkar kaise hua यह आर्टिकल पसंद आया होगा, यदि आपको यह लेख उपयोगी लगता है, तो इस लेख को अपने दोस्तों और परिचितों के साथ ज़रूर साझा करें, और ऐसे ही रोचक लेखों से अवगत रहने के लिए हमसे जुड़े रहें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ,

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