Dussehra Festival kaise manaye? दशहरा उत्सव indian in Hindi

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Information Dussehra Festival | utsav indian kaise manaye in Hindi

 

Dussehra Utsav ki jankari | विजयादशमी kab hai,?

प्रिय पाठक, आप सभी को Dussehra Festival और Vijayadashami की शुभकामनाएं, दोस्तों इस वर्ष 25 अक्टूबर को Dussehra Festival [Vijayadashami] बड़े ही धूम धाम से मनाया जाएगा और यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. दोस्तों बताना चाहूंगी हर त्योहार का अपना एक महत्व होता है और इसके पीछे कुछ इतिहास होता है. तो आइये हम दशहरा उत्सव के इतिहास और महत्व क्या है? इसके बारे में जो आप शायद ही जानते होंगे, तो आइये जानते है.

दोस्तों हिंदू कैलेंडर के अनुसार, Dussehra Tyohar अश्विन के महीने में मनाया जाता है और यह दसवें दिन पड़ता है.

जैसा कि हम पौराणिक रहस्य और एतिहासिक काल से जानते हैं की भगवान राम ने राक्षस राजा रावण के साथ लंका पर युद्ध किया था. जहाँ भगवान राम ने रावण का वध किया था. इसलिए, दशहरा या विजयादशमी मनाया जाता है.

यह त्यौहार नौ दिवसीय Navratri के समापन के बाद दसवे दिन मनाया जाता है. 

इस वर्ष दशहरा 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा ताकि बुराई पर अच्छाई का इतिहास अंकित किया जा सके.

दोस्तों Covid-19 [Coronavirus] महामारी के बीच, Dussehra Utsav पिछले वर्षों की तुलना में कुछ अलग होगा.

यह Utsav अब Social distance रखकर सेलेब्रेट करना है और बुराई पर अच्छाई की जित लाना है.

 

दशहरा  का Utsav – Festival ki jankari, In Hindi.

दशहरा, जिसे विजयदशमी भी कहा जाता है, दोस्तों रामायण जहा भगवान विष्णु के अवतार श्री राम जिनका अलग ही अवतार देखने को मिला हैं, यहाँ 10 सिर का राक्षस राजा रावण जो विजय का प्रतीक है, जिन्होंने राम की पत्नी, सीता का अपहरण किया था. और इसी बुराई पर अच्छाई की जित जिसे दशहरा के रूप में मनाया जाता है.

दोस्तों बता दू की त्योहार का नाम संस्कृत शब्दों में दशा (“दस”) और हारा (“हार”) से लिया गया है. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा, हिंदू कैलेंडर के सातवें महीने अश्विन (सितंबर-अक्टूबर) के महीने के 10 वें दिन मनाया जाता है. (Dussehra Festival kaise manaye)

दशहरा, मुख्य रूप से एक उत्तर भारतीय त्यौहार है, जिसे बहुत ही उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है. इसमें राम लीला शामिल होती है, जो राम की जीवन कहानी का एक नाटकीय नाट्य विधान है.

दशहरे का अर्थ – Utsav ka Arth kya hai

दशा-हार, दसेरा और दुर्गोत्सव के रूप में जाना जाने वाले इस त्यौहार का अपना अनूठा अर्थ है. यह एक त्योहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. तो दशहरा शब्द दो हिंदी शब्द ”दस और हारा” से बना है, जहाँ दस का अर्थ दस और हारा का सत्यानाश है. इसलिए यदि इन दो शब्दों को मिला दिया जाए तो ‘दशहरा’ नाम की पहचान होती है.

दशहरा देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बुराई पर अच्छाई की जीत इसी मूल कारण के लिए मनाया जाता है.

 

दशहरा में लोग क्या करते है?

अधिकतर पूरे भारत में घर या मंदिरों में विशेष प्रार्थना सभाओं और देवताओं को भोजन प्रसाद के माध्यम से दशहरा मनाते हैं. वे राक्षस रजा रावण के पुतलों के साथ कुछ जगह बड़े परेडों का आयोजन करते हैं. और शाम को अलाव जलाकर पुतले जलाए जाते हैं. बता दू की दशहरा नवरात्रि पर्व की परिणति है.

भारत में कुछ क्षेत्रों में कई स्थानीय समारोह आयोजित करते हैं जो 10 दिनों तक रह सकते हैं:

बंगाल में लूची (डीप फ्राइड फ्लैट ब्रेड) और एलुर डोम (डीप फ्राइड मसालेदार आलू स्नैक्स) सहित विशेष खाद्य पदार्थों की तैयारी,

उत्तरी भारत में रामलीला (महाकाव्य रामायण का संक्षिप्त संस्करण) का प्रदर्शन करते है,

कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर में हाथियों पर चढ़े एक सिंहासन पर देवी चामुंडेश्वरी सहित एक बड़ा त्योहार और जुलूस,

कर्नाटक राज्य में किताबें, कंप्यूटर, खाना पकाने के पैन और वाहनों जैसे घरेलू और काम से संबंधित उपकरणों का आशीर्वाद, Utsav res

दशहरे के बारे में तथ्य –

कम ही लोग जानते हैं कि दशहरा को विश्वकर्मा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो कि भारत का राष्ट्रीय मजदूर दिवस है.

विजयादशमी एक ऐसा दिन है जब शस्त्रों की पूजा की जाती है, जिसे ‘शस्त्र पूजा’ के नाम से जाना जाता है. यह दो स्रोतों से महत्वपूर्ण है, एक महाभारत और दूसरा देवी दुर्गा द्वारा
महिषासुर को मारने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों की पूजा. (Dussehra Festival kaise manaye)

दोस्तों इतिहास हमें इस दिन के बारे में एक ओर तथ्य याद दिलाता है ओ व्यास पूजा है, जो सबसे अग्रणी गुरु, गुरु वेद व्यास की पूजा है.

 

दशहरा महोत्सव का इतिहास –

दोस्तों इस त्योहार के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं. भारत के कुछ हिस्सों में यह दिन उस दिन का संकेत देता है जिस दिन देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था. इसीलिए नवरात्रि पर देवी दुर्गा के सभी नौ अवतारों की पूजा की जाती है.

दक्षिण भारत में, दशहरा त्योहार मुख्य रूप से मैसूर, कर्नाटक में उस दिन के रूप में मनाया जाता है जब देवी दुर्गा के एक अवतार चामुंडेश्वरी ने राक्षस महिषासुर का वध किया था. वास्तव में देवी चामुंडेश्वरी के जुलूस ले जाने वाले हाथियों के परेड भी पूरे शहर में किए जाते है.

 

आश्चर्यजनक तथ्य – जो शायद ही आप जानते है.

उत्तर भारत में, दशहरा उत्सव उस दिन के रूप में मनाया जाता है जब भगवान राम ने लंका में राक्षस राजा रावण का वध किया था.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि राक्षस राजा रावण ने भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण किया था.

राक्षस राजा रावण को भी अविनाशी होने के लिए भगवान ब्रह्मा से वरदान मिला था.

बुराई पर जित के लिए भगवान राम को भगवान विष्णु के सातवें पुनर्जन्म और यह युद्ध कला में माहिर थे.

दोस्तों कहते है न की विधि के विधान के आगे कुछ भी नहीं जिसका अंतिम समय आता है ओ कुछ तो गलती कर बैठता है. जैसे राक्षस राजा रावन ने किया था.

दोस्तों कथा के अनुसार जब राक्षस राजा रावन और प्रभु श्री राम दोनों में युद्ध हुआ तब राक्षस राजा के पेट में तीर मारने में प्रभु श्री राम कामयाब रहे, इसीलिए दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. (Dussehra Festival kaise manaye)

 

दशहरा उत्सव Celebrations कैसे करे –

उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में, राक्षस राजा रावण के विशाल और रंगीन पुतलों को जमीन या खुले खेतों में आग लगा दी जाती है.

अधिक से अधिक लोग इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं और इसका आनंद लेते हैं.

राम के जीवन की राम कथाओं के एक नाटकीय अधिनियमन का आयोजन करके दशहरा उत्सव भी मनाया जाता है.

तथा दुर्गा पूजा के अंत में, लोग पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में इस त्योहार को मनाते हैं.

बंगाली लोक गीत, देवी दुर्गा की मूर्तियों को जल निकायों में विसर्जित करते हैं.

हिमाचल प्रदेश में, कुल्लू में विजयादशमी उत्सव को राज्य सरकार द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा दिया गया है. (Dussehra Festival kaise manaye)

 

विजयादशमी मनाने के कारण –

इस दिन रावण पर भगवान राम की विजय के अलावा विजयादशमी से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक घटनाएं हैं.

विजयादशमी भारत की सांस्कृतिक परंपरा में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है.

यह त्यौहार अश्विन के महीने (सितंबर / अक्टूबर) में उज्ज्वल पखवाड़े के दसवें दिन मनाया जाता है और किसी भी नए उद्यम को शुरू करने, नए घरेलू सामान खरीदने या यात्रा शुरू करने के लिए एक शुभ अवसर माना जाता है.

विजयादशमी आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्ति की विजय का प्रतीक है,

मैसूरु में इस्कॉन नव बृंदावन धाम में, विजयादशमी को भव्य तरीके से मनाया जाता है.

श्री राम दशा सहस्रार्चन (श्री राम के 10,000 नामों का जप) और

उत्तर भारत में, इस अवसर पर रामलीला (महाकाव्य रामायण का संक्षिप्त संस्करण) का प्रदर्शन बहुत लोकप्रिय है.

इस दिन वाल्मीकि रामायण से सुंदर खंड का पाठ करने की भी सिफारिश की जाती है.

 

विजयादशमी – दानव महिषासुर के वध:

तथा इस दिन दानव महिषासुर के वध का जश्न मनाना,

कहानी का सरांस कुछ इस तरह है की शक्तिशाली दानव था जिसके नेतृत्व में असुरों ने देवताओ के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और उन्हें हरा दिया, फिर देवताओ ने महिषासुर को मारने के लिए देवी दुर्गा की मदद मांगी.

शेर पर आरूढ़ दिव्य मां दुर्गा देवी ने नौ दिनों तक शक्तिशाली राक्षस का मुकाबला किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया.

विजयादशमी को मां दुर्गा की इस जीत के स्मरण के रूप में भी मनाया जाता है.

विजयादशमी से पहले के नौ दिनों को नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है, जब देवी शक्ति या दुर्गा को उनके विभिन्न रूपों में दुर्गा, विजया, वैष्णवी, कुमुदा, चंडिका, कृष्णा, माधवी, कन्या, माया, नारायणी, ईशानी, शारदा, अंबिका और भद्रकाली के रूप में पूजा जाता है.

दक्षिण भारत में, विशेष रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक में, नवरात्रि को गोलू प्रदर्शन और महिलाओं को एक दूसरे से मिलने के लिए आमंत्रित किया जाता है.

मैसूरु (कर्नाटक) में, देवी चामुंडेश्वरी (दुर्गा) को एक स्वर्ण सिंहासन पर बिठाया जाता है.

जुलूस में रंग-बिरंगी झांकी, नृत्य समूह, संगीत बैंड, सजे-धजे हाथी, घोड़े और ऊँट शामिल होते हैं, जो मैसूरु पैलेस से शुरू होते हैं और बन्निमंतपा नामक स्थान पर समाप्त होते हैं जहाँ बन्नी (शमी) के पेड़ की पूजा की जाती है.

 

शमी वृक्ष की पूजा क्यों करते है –

इस दिन शमी वृक्ष की पूजा क्यों करते हैं? इसका उत्तर जानने के लिए हमें महाभारत का संदर्भ देना होगा.

जी हाँ दोस्तों इतिहास के अनुसार महाभारत में पांडव कौरवों से पासा के खेल में हार गए और फलस्वरूप उन्हें 12 साल के लिए जंगल में रहने के लिए राज्य से निकाल दिया गया था.

12 साल का वनवास पूरा करने के बाद, पांडवों ने विराट के राज्य में गुप्त रहने का फैसला किया, राजा के पास जाने से पहले, उन्होंने अपने दिव्य अस्त्रों को कपड़े में लपेटा और शमी के पेड़ की ऊंची शाखा पर रख दिया था.

महाभारत के अनुसार, यह विजयादशमी का दिन था जब उन्होंने अपने जीवन के वर्ष को सफलतापूर्वक पूरा किया.

कहा जाता है की अर्जुन ने शमी के पेड़ से हथियार एकत्र किए और कौरवों को हराकर जित प्राप्त की थी. इस वृक्ष को शुभ माना जाता है.

यदि दसरे के दिन इस वृक्ष की पूजा करते है तो आपको सुख समृधि प्राप्त होती है.

उस दिन के बाद से, महाभारत में इस विशेष घटना के प्रतीक नवरात्रि के नौवें दिन शमी के पेड़ और हथियारों की पूजा की जाती है.

 

Saraswati Puja and Vidyarth | किसान का महत्वपूर्ण त्यौहार विजयादशमी

विजयादशमी को आपकी शिक्षा शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है.

केरल और कर्नाटक में मुख्य रूप से मनाया जाने वाला पारंपरिक विद्यारंभ समारोह संगीत, नृत्य, भाषाओं और अन्य लोक कलाओं को सीखने के लिए बच्चों का औपचारिक रूप से परिचय कराता है.

विद्या का अर्थ है ज्ञान; अरम्भम का अर्थ है शुरुआत.

केरल में इस अवसर पर एक और उत्सव और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तीन दिवसीय सरस्वती पूजा होती है जिसमें पुस्तकों की पूजा की जाती है.

अष्टमी के दिन (नवरात्रि के आठवें दिन) किताबें पूजा के लिए रखी जाती हैं और औपचारिक रूप से विजयादशमी के दिन सीखने वाली देवी माँ सरस्वती की पूजा के बाद पढ़ने और लिखने के लिए निकाली जाती हैं.

किसान के लिए विजयादशमी एक महत्वपूर्ण त्यौहार है.

लोग अच्छी फसल, शांति और समृद्धि के लिए धरती माँ का आशीर्वाद चाहते हैं.

इसलिए किसान इस त्यौहार को बड़े आदर के साथ मनाते है.

 

क्या दशहरा एक सार्वजनिक हॉलिडे है?

हाँ दशहरा एक सार्वजनिक हॉलिडे है. यह सामान्य आबादी के लिए एक दिन की छुट्टी है, और स्कूल और अधिकांश व्यवसाय इस दिन बंद रहते हैं.

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