Bhaidooj kaise Celebrate kare – भाई दूज त्योहार कैसे मनाएं?

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Bhaidooj kaise Celebrate kare - भाई दूज त्योहार कैसे मनाएं? 2020 Bhaiya Dooj

 

BhaiDooj kaise Celebrate kare – इस साल भाई दूज त्योहार Kaise Manaye?

Bhaiyadooj kaise Celebrate kare? Bhaidooj Celebrate in Hindi. – दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पुरुषों को अपनी पत्नी द्वारा पकाया गया भोजन नहीं करना चाहिए. उन्हें अपनी बहन के हात से बना खाना और उसे नए कपड़े, गहने आदि उपहार देने चाहिए तथा उसके साथ भोजन करना चाहिए. यदि किसी व्यक्ति के पास बहन नहीं है, तो वे किसी अन्य महिला को अपनी बहन के रूप में मान सकते हैं और उनके हात से बने भोजन का स्वाद लें सकते हैं. दोस्तों आप सोच रहे होंगे की ऐसा क्यों, तो जानकारी के लिए बता दू की और कुछ ग्रंथो तथा एतिहासिक कथाओ [Historical stories] के अनुसार इस दिन, यमराज देवता भोजन के लिए अपनी बहन से मिलते हैं, इस कारण नरक में पीड़ित आत्माएं कम से कम एक दिन के लिए मुक्त हो जाती हैं.

यदि किसी महिला का Bhai नहीं है, तो वह भी किसी परिचित पुरुष को अपना भाई मानते हुए उसे (Aarati/Puja) के चारों ओर जलते हुए दीपक चलाने का कार्य कर सकते है.

यदि यह संभव नहीं है, तो वह चंद्रमा को अपना भाई मान सकती है और चंद्रमा के लिए Aarati/Puja कर सकती है.

दोस्तों Bhai Dooj का Tyohar भाई-बहन के लिए एक अनमोल त्यौहार है. जैसे रक्षा बंधन एक महत्वपूर्ण त्यौहार है उसी तरह Bhaiya-Dooj भी महत्वपूर्ण है. तो दोस्तों आइये How to celebrate Bhai Dooj festival? भाई दूज क्यों मनाते हैं? (Why Do We Celebrate Bhai Dooj), भाईदूज कैसे मनाते है – How Do We Celebrate Bhaidooj?
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भाई दूज कैसे मनाई जाती है – How is Bhai Dooj celebrated?

Bhaidooj एक महत्वपूर्ण अवसर है जिसे पूरे भारत में बड़े ही उत्साह और भावना के साथ मनाया जाता है. समारोह की शुरुआत भाइयों को उनके पसंदीदा व्यंजन या मिठाई के शानदार भोजन के लिए आमंत्रित करने के कार्य के साथ होती है. पूरा अवसर अपनी बहन की रक्षा के लिए भाई की मन्नत का संकेत करता है जबकि एक बहन भगवान से प्रार्थना करती है की अपने भाई के कल्याण के लिए आशीर्वाद मिले.

त्यौहार का महत्व तब पता पता चलता है जब एक बहन अपने भाई के लम्बी उमर के लिए भगवान से प्रार्थना करती है.

दोस्तों त्यौहार कब और कैसे सेलिब्रेट करते है और तिथि कैसे जाने? आइये भाई-बहन के इस अनमोल फेस्टिवल की जानकारी अंत तक जरुर पढ़े.

 

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भाई दूज मनाने की आधुनिक परंपरा [Modern Tradition of Bhai Dooj]

वर्तमान में, Bhai Dooj के स्थान पर Raksha Bandhan का त्योहार अधिक लोकप्रिय हो गया है.

क्योंकि दोनों त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित हैं. इसलिए, आज के समय में, Bhaidooj के त्योहार की लोकप्रियता कम हो रही है.

इसके साथ ही, वर्तमान समय में इस त्यौहार में कई बदलाव देखे गए हैं. आजकल की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्ते निभाना शायद ही कोई जनता हैं और इसलिए भी क्योंकि यह दिन छुट्टी नहीं रहती है. यही कारण है कि लोग पहले की तरह इस दिन को भव्यता के साथ नहीं मना पा रहे हैं.

पहले के समय में, लोग अपनी बहन के घर जाकर इस दिन को Celebrate करते थे, लेकिन आज के समय में यह प्रथा पूरी तरह से समाप्त हो गई है. अब बहुत कम ही लोग इस प्रथा का पालन करते हैं.

अगर हम भाई दूज के इस त्योहार का महत्व रखना चाहते हैं, तो हमें इसके पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना होगा. और इसके महत्व को जानना होगा तभी एक भाई को अपने बहन के प्यार का महत्व समझेगा, तो आइये दोस्तों इस लेख को पढ़कर इस त्यौहार के महत्व को जानते है.

 

भाई दूज कब मनाया जाता है – Bhai Dooj Kab Manaya Jata hai?

Bhai Dooj कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है. शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि जब शाम के समय आये तो उस दिन भाई दूज मनाई जाती है.

यदि दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि लग जाती है तो Bhai Dooj अगले दिन मनाने का विधान है.

इसके अलावा यदि दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि नहीं आती है तो भी भाई दूज अगले दिन मनाई जानी चाहिए. ये तीनों तिथि शास्त्रों, कथा कहानी और कुछ ग्रंथो से उल्लेख है.

ऐसा कहा जाता है की भाई दूज के दिन दोपहर के बाद ही भाई को तिलक व भोजन कराना चाहिए. इसके अलावा यम पूजन भी दोपहर के बाद किया जाना चाहिए.

दोस्तों अब आप सोच रहे होंगे की यह त्यौहार का क्या महत्व है? तो दोस्तों बता दू की कुछ त्यौहार का महत्व जीवन के महत्व को महसूस करता है. और दोस्तों त्यौहार का महत्व हमें तब पता चलता है जब हम उसके इतिहास और पौराणिक रहस्य को जानेंगे,

 

भाई दूज का इतिहास – History of Bhai Dooj

दोस्तों यदि भाई दूज के योहार का रहस्य जानना है तो हमे इतिहास के पन्नो को जरुर पढ़ना चाहिए, दोस्तों इस त्योहार का Itihas बहुत पुराना है.

ऐसा माना जाता है कि भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित यह त्योहार प्राचीन काल से मनाया जा रहा है और इसका इतिहास Raksha Bandhan के History से भी पुराना माना जाता है.

वास्तव में, यह भाई और बहन के अनोखे बंधन का सबसे पुराना त्योहार माना जाता है. इस त्योहार के बारे में कई ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियां हैं.

 

हिस्टोरिकल स्टोरी | भाई दूज क्यों मनाते हैं – Bhai Dooj Celebrate kyo Karate hai?

भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित यह भाई दूज का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना गया है.

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाने वाले इस पर्व को Yamadvitiya के नाम से भी जानते है. इस पर्व पर बहनें अपने भाईयों को रोली चंदन का तिलक लगाकर उनके उज्वल भविष्य – Bright Future की मनोकामना करती हैं.

इस त्योहार को लेकर कई सारी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं. लेकिन भाई दूज के त्योहार को लेकर जो कहानी सबसे अधिक प्रचलित है उसके अनुसार – मृत्युलोक के स्वामी यमराज की बहन यमुना अपने भाई से बहुत प्रेम करती थी.

वह सदैव उनके बारे में अपने घर आने का निवेदन करती थी लेकिन अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण यमराज अपने बहन के घर नहीं आ पाते थे. लेकिन एक बार कार्तिक शुक्ल के दिन यमुना ने एक बार फिर अपने भाई को घर आने के लिए मना ही लिया. और अपनी बहन की बात मानकर यमराज भी अपने बहन के घर जाने के लिए राजी हो गये और यमुना के घर जाने से पहले उन्होंने नर्क में आने वाले सभी जीवों को मुक्त कर दिया था.

अब कहानी में ट्विस्ट कुछ इस तरह आता है की जब यमराज अपनी बहन के घर पहूँचते है, दोस्तों जरा सोचो की क्या भगवान अपने बहन से प्रसन्न हुए? क्या वह जाने के लिए तैयार थे?

 

Bhai Dooj ki Historical Story – भाई दूज की ऐतिहासिक कहानी

तो दोस्तों जब भगवान उस दिन आये तो उनकी बहन यमुना में अपने भाई को चंदन लगाकर उनकी आरती उतारी और इसके साथ ही कई प्रकार के पकवान बनाकर अपने भाई को खिलाया और उनकी खूब मेजबानी की, यमराज अपने बहन के इस प्रेमभक्ति को देखकर काफी प्रसन्न हुये. और अपनी बहन से कोई वरदान मांगने को कहा.

तब उनकी बहन ने कहा कि ”हे भद्र आप हर साल इसी दिन मेरे घर आए और इस दिन जो भी बहन अपने भाई का स्वागत करे, उसे कभी भी आपका भय ना रहे”. उनकी इस बात को
यमराज ने स्वीकार कर लिया. तब से इसी कारणवश लोग हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई-दूज के त्योहार के रूप में मनाते हैं.

 

भाई दूज कैसे मनाते है – रिवाज एवं परंपरा [How Do We Celebrate Bhai Dooj]

हर त्यौहार की तरह, भाई दूज सेलिब्रेट करने का अपना तरीका है.

इस दिन, बहन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और गणेश की Puja करती हैं और अपने भाई के लंबे और अच्छे जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं.

इसके बाद बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर और उनकी आरती उतारकर व्रत रखती हैं.

भैया दूज के दिन, कई भाई भोजन करने के लिए अपनी बहनों के घर जाते हैं और उन्हें कुछ उपहार भी देते हैं.

इसके अलावा, इस दिन, यमुना नदी में नाने और इसके तट पर पूजा करने से विशेष फल भी मिलता है.

 

भाई दूज का महत्व | Significance of Bhai Dooj in Hindi

भाई और बहन के इस खास रिश्ते को समर्पित Bhaiya Dooj का यह त्योहार काफी महत्वपूर्ण है.

इस त्योहार का मूल उद्देश्य इस तरह से भाइयों और बहनों के बीच प्रेम और सद्भाव के प्रवाह को बनाए रखना है.

यमुना और यमराज की कहानी हमें यह संदेश देती है कि रिश्ते सभी कार्यों से अधिक हैं.

दोस्तों, हम अपने जीवन में चाहे कितने भी व्यस्त हों, हमें यह सुनिश्चित करने की कोशिश करनी चाहिए कि विशेष अवसरों पर हम अपने रिस्तो के लिए समय निकालें और Bhai Dooj का यह त्योहार हमें यह संदेश भी देता है.

इसलिए हमें इस त्योहार के महत्व को समझना चाहिए और हर साल इसे और अधिक उत्साह के साथ मनाने की कोशिश करनी चाहिए.

 

BhaiyaDooj – भाई दूज की सभी को शुभकामनाए

 

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Overview:- Bhaidooj kaise Celebrate kare – भाई दूज त्योहार कैसे मनाएं?
Name- Deepavali Laxmi pooja kab Hai? Bhaidooj Kaise Celebrate Kare?

 

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